इसराइल-ईरान युद्ध (2025)- क्या प्रभाव पड़ेगा भारतीय अर्थव्यवस्था पर..?

इसराइल और ईरान के बीच भीषण जंग की शुरुआत हो चुकी है जिसमें अमेरिका सहित और भी कई देश शामिल हो सकते हैं।. दोस्तों, इतिहास गवाह है और हमने और आपने कई लड़ाइयां देखी है, इसलिए यह जानते है कि युद्ध के परिणाम गंभीर होते हैं। युद्ध में न केवल जान माल की हानि होती है। बल्कि कई बार मानवीयता भी तार तार हो जाती है। युद्ध से प्रभावित देशों की अर्थव्यवस्थाएं बर्बाद हो जाती है। वैसे तो इस युद्ध से जुड़ी खबरें दिन भर टीवी चैनलों पर प्रसारित हो रही है। हर बात पर चर्चा और हर स्थिति के आकलन हो रहे हैं। जॉन माल का भारी नुकसान भी हो रहा है। स्थिति बड़ी गंभीर है। पश्चिम एशिया भीषण युद्ध, अराजकता, अशांति, और खतरे की ओर बढ़ रहा है।

आर्थिक फंदा ब्लॉग (arthikfunda.com) आज के इस आर्टिकल में यह इजरायल ईरान युद्ध की राजनीतिक पक्ष को नजरअंदाज करते हुए इसके आर्थिक पहलू पर फोकस करेंगे … क्योंकि आर्थिक फंडा में अर्थव्यवस्था से जुड़े आर्टिकल प्रकाशित होते हैं। लेकिन आज की यह पोस्ट एक खास पोस्ट साबित होने वाली है इस संदर्भ में क्योंकि युद्ध के राजनीतिक और भू-समरिक और सेंड परिणाम की व्याख्या करने वाली वेबसाइट और आर्टिकल काफी संख्या में प्रकाशित होते हैं। पर युद्ध के अर्थव्यवस्था पर होने वाले प्रभावों की विवेचना करने वाले आर्टिकल कम प्रकाशित किए जाते हैं। यह पोस्ट ईरान इजरायल युद्ध के विश्व की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर की विवेचना करेगा..? इस बात पर फोकस रहेगा कि इस युद्ध से दुनिया में क्या आर्थिक बदलाव आएंगे..? अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर क्या असर पड़ने वाला है..? कीमतें बढ़ेगी..? तेल महंगा होगा ..? जब तेल महंगा होता है तो अन्य सब चीज भी महंगी हो जाती हैं। भारत पर इस युद्ध का क्या असर पड़ेगा इस बात को भी हम समझने का प्रयास करेंगे।

1. इस युद्ध से बदल सकती है अर्थव्यवस्थाओं की चाल :

इजरायल ईरान के बीच अक्सर तनाव की स्थिति बनी रहती है। दोनों देश दशकों से एक दूसरे को चुनौती देते आ रहे हैं।शुक्रवार (13 june2025) को इसराइल ने ऑपरेशन “राइजिंग लॉयन” लॉन्च किया और इससे टकराव की नई और खतरनाक स्थिति बन गई। इसराइल ने तेहरान और नतांज के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया। खास बात यह है कि यमन लेबनान और सीरिया जैसे देशों में ईरान समर्थित मलेशिया हिज्बुल्लाह और होती आतंकी समूह युद्ध को और भड़का सकते हैं। अमेरिका और ब्रिटेन के युद्ध में शामिल होने की आशंका बनी हुई है।

इस युद्ध से सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर नकारात्मक असर पड़ेंगे। विश्व की अर्थव्यवस्था में भारी उथल-पुथल होगी। इस संघर्ष का सबसे विपरीत असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा। ईरान और फारस की खाड़ी तथा लाल सागर आदि को जोड़ने वाली हार्मोन जल संधि को बंद करने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने को मजबूर हो रही है। हार्मोन जलसंधि एक बहुत बड़ी व्यापारिक वाटर स्ट्रेट है। इस जल संधि से होकर तेल का व्यापार करने वाले जहाज आते जाते हैं। पश्चिम एशिया के देस ही विश्व के अधिकांश क्षेत्रों में तेल की आपूर्ति करते हैं। तेल उत्पादक देशओ और तेल क्षेत्रों में पढ़ने वाले जलमार्गों के बन्द होने से तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हो गई।. भारत अपनी तेल जरूर का 85 फ़ीसदी सऊदी अरब इराक और यूएई से आयात करता है। तेल की पट्टी कीमतों के कारण विश्व में महंगाई बढ़ेगी।

इस युद्ध के कारण दुनिया की अर्थव्यवस्था को एक नुकसान यह होगा कि बेरोजगारी में इजाफा होगा।

1. महंगाई बढ़ाने वाला एक और युद्ध भड़का :

वैसे तो यह दुनिया बहुत बड़ी है इसमें कहीं ना कहीं संघर्ष और विवाद चलते ही रहते हैं। लेकिन एक और एक से अधिक देशों में जब सैंया युद्ध उत्पन्न होता है तो इसका प्रभाव पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है और इसका असर कुछ ही दिनों में दिखाई देने लगता है। पिछले कई वर्षों से लगातार रूस यूक्रेन युद्ध चल रहा है। इजराइल फिलिस्तीन के मध्य भी काफी समय से युद्ध की स्थिति चल रही है। अब एक और नया मोर्चा खुल गया। अब यहआग इसराइल और ईरान के बीच लग चुकी है। 2 दिन में तेल की कीमाते 9 फीसदी बढ़ गई.

विश्व इस समय वैसे ही आर्थिक संकट से गुजर रहा है. क्योंकि ईरान तेल का काफी बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है और वहां जंग छिड़ चुकी है। यदि आसपास के कुछ देश और इसमें शामिल हुए जैसे की संभावना है। अमेरिका भी युद्ध में कूदने की तैयारी कर रहा है। अगर ऐसा हुआ तो विश्व अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होना तय है।

इस युद्ध की शुरुआत दो दिनों में ही कच्चे तेल के दाम 9 फ़ीसदी चढ़ गए दुनिया भर के बाजारों में हड़कंप मच गया अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत पहली बार 1 साल के पार चली गई। दुनिया के शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई।

3. हवाई किराया 20% तक बढ़ा.

ईरान इजरायल तनाव के कारण भारत से यूरोप अमेरिका सहित पश्चिमी देशों की हवाई यात्रा पर बड़ा असर पड़ा है। पश्चिम एशिया के कई देशों ने अपने हवाई मार्ग बंद कर दिए हैं। इससे हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और मार्ग बदले गए हैं। मार्ग बदलने से किराए और परेशानियां बढ़ गई है। किराए में 20% तक की बढ़ोतरी हो गई। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान इजरायल के बीच संघर्ष और हवाई क्षेत्र बंद होने से उड़ानों का रास्ता लंबा हो गया है जिसका सीधा असर विमान के समय और किराए पर पढ रहा है। कुछ क्षेत्रों में पहले से ही 12 से 15% की वृद्धि देखी जा रही है। हवाई क्षेत्र में अस्थाई प्रतिबंध से विमान को आने-जाने में दो से चार घंटे का वक्त अधिक लग रहा है इससे विमान कंपनियों की परिचालन लागत में वृद्धि हो गई है मार्ग बदलने से कुछ मार्गों के किराए में 15 से 20 फ़ीसदी तक की वृद्धि हुई है हवाई क्षेत्र में जारी प्रतिबंध के कारण खाड़ी देशों से आने जाने वाली उड़ानों का मार्ग पर भारी भीड़ है।

समुद्री माल ढुलाई लागत 50% बड़ी :

ईरान इजरायल युद्ध से भारत में केवल हाईवे यात्रा महंगी नहीं हुई है बल्कि समुद्री माल ढुलाई दरों में भी 50% तक इजाफा हुआ है। इसके साथ ही बीमा शुल्क में भी बढ़ोतरी का जोखिम बना हुआ है। निर्यातकों का कहना है कि इस युद्ध के कारण यूरोप रूस और खादी के देशों को किया जाने वाला निर्यात प्रभावित होगा। अगर युद्ध लंबे समय तक चलता है तो ईरान और यूएई के बीच हार्मोन जलसंधि और लाल सागर जैसे


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