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भारतीय अर्थव्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। 1991 में आर्थिक सुधारों ने अर्थव्यवस्था को उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की ओर मोड़ा, जिससे आर्थिक विकास को गति मिली. इन सुधारों के परिणामस्वरूप विदेशी निवेश बढ़ा, व्यापार उदारीकरण हुआ और वित्तीय क्षेत्र में सुधार हुए.
1991 से पहले की अर्थव्यवस्था:
- नियंत्रित अर्थव्यवस्था:भारत में पहले एक नियंत्रित अर्थव्यवस्था थी, जिसमें सरकार ने उद्योगों पर बहुत अधिक नियंत्रण रखा था.
- कृषि पर निर्भरता:अर्थव्यवस्था कृषि पर अत्यधिक निर्भर थी, और लगभग 65% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती थी.
- कम आर्थिक वृद्धि:आर्थिक वृद्धि धीमी थी, और भारत गरीबी और असमानता जैसी चुनौतियों से जूझ रहा था.
1991 के बाद आर्थिक सुधार:
- उदारीकरण:उद्योगों पर सरकार के नियंत्रण को कम किया गया, जिससे निजी क्षेत्र को अधिक अवसर मिला.
- निजीकरण:सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को निजी क्षेत्र को सौंपा गया, जिससे निजी क्षेत्र को अर्थव्यवस्था में अधिक भूमिका निभाने का मौका मिला.
- वैश्वीकरण:अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा दिया गया, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था विश्व अर्थव्यवस्था से और अधिक जुड़ गई.
- आर्थिक विकास में वृद्धि:इन सुधारों के परिणामस्वरूप आर्थिक वृद्धि तेज हुई, और भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गई.
आर्थिक सुधारों के परिणाम:
- निवेश में वृद्धि:निवेश दर में वृद्धि हुई, जिससे उत्पादन और रोजगार में वृद्धि हुई.
- सेवा क्षेत्र का विकास:सेवा क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ, और यह अब भारत की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा हिस्सा है.
- विदेशी निवेश:भारत में विदेशी निवेश बढ़ा, जिससे पूंजी और प्रौद्योगिकी का प्रवाह हुआ.
- गरीबी में कमी:हालांकि, गरीबी में कमी हुई, लेकिन असमानता में भी वृद्धि हुई.
आज की अर्थव्यवस्था:
भारतीय अर्थव्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं। 2025 में भारत की अर्थव्यवस्था 6.5% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो इसे सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाता है. डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और AI-संचालित नवाचार का विस्तार हो रहा है, और सरकार इन क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी प्रयास कर रही है. इसके अलावा, भारत का उपभोक्ता बाजार, विनिर्माण क्षमता, और अप्रयुक्त प्राकृतिक संसाधन इसे निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाते हैं.
यहाँ कुछ प्रमुख बदलाव दिए गए हैं:
- आर्थिक विकास:भारत की अर्थव्यवस्था 2025 में 6.5% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो इसे सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाता है.
- डिजिटल परिवर्तन:डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और AI-संचालित नवाचार का विस्तार हो रहा है, और सरकार इन क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी प्रयास कर रही है.
- निवेश:भारत का उपभोक्ता बाजार, विनिर्माण क्षमता, और अप्रयुक्त प्राकृतिक संसाधन इसे निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाते हैं.
- निर्यात:भारत के मुख्य निर्यात भागीदार संयुक्त राज्य अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात और चीन हैं.
- सरकारी नीतियां:सरकार की विभिन्न राजकोषीय नीतियों से आय वितरण को नया आकार दिया जा रहा है.
इन बदलावों के साथ, भारत वैश्विक आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
- विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था:भारत अब विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, और यह तेजी से आगे बढ़ रही है.
- सेवा क्षेत्र का प्रभुत्व:सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान देता है, और यह तेजी से बढ़ रहा है.
- कृषि क्षेत्र का योगदान:कृषि क्षेत्र अब भी अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसकी हिस्सेदारी कम हुई है.
- चुनौतियां:भारत को अभी भी गरीबी, असमानता, बुनियादी ढांचे की कमी और अन्य चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.
निष्कर्ष:
भारतीय अर्थव्यवस्था में 1991 के आर्थिक सुधारों ने महत्वपूर्ण बदलाव लाए हैं, और इसने देश को आर्थिक विकास और समृद्धि की ओर अग्रसर किया है। हालांकि, भारत को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, और इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर काम करना होगा.
भारतीय अर्थव्यवस्था | दि स्टेट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड
1991 में भारत सरकार ने महत्वपूर्ण आर्थिक सुधार प्रस्तुत किए जो इस दृष्टि से वृहद प्रयास थे जिनमें विदेश व्यापार उदारीकरण, वित्तीय उदारीकरण, कर सुधार और विदेशी निवेश के प्रति आग्रह शामिल था । इन उपायों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद …



