चीन में क्रिप्टोकरेंसी बैन..! क्या है मकसद..?
चीन ने क्रिप्टो करेंसी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। चीन में अब क्रिप्टो करेंसी रखना क्रिप्टोकरंसी ट्रेडिंग करना क्रिप्टो करेंसी से लेनदेन करना गैर कानूनी घोषित कर दिया गया है इसके अलावा सभी क्रिप्टो वॉलेट भी फ्रीज कर दिए गए हैं।
चीन का यह फैसला चौंकाने वाला है। वैसे अक्सर चीन में अंदर ही अंदर क्या चलता रहता है इसकी बहुत ज्यादा जानकारियां दुनिया के सामने नहीं आ पाती हैं. क्योंकि चीन में साम्यवादी शासन है वहां जनता को ज्यादा अधिकार प्राप्त नहीं है आप ज्यादा सवाल जवाब नहीं कर सकते किसी मुद्दे को लेकर। मुझे चीन का फैसला चौंकाने वाला इसलिए लग रहा है क्योंकि दुनिया में एक तरफ जहां क्रिप्टो करेंसी का क्रीज बढ़ रहा है वहीं चीन इसे बैन क्यों कर रहा है..? क्या कोई ऐसी खास बात है जिसे दुनिया से छुपाया जा रहा है..?
इस तरह महेश कुछ दिन पहले तक दुनिया के सबसे वाइब्रेट क्रिप्टो मार्केट के अचानक खत्म होने की संभावना बन गई है। चीन ने क्रिप्टो पर बन के पीछे क्राइम कंट्रोल और आर्थिक स्थिरता को वजह बताया है जबकि चीन दुनिया में बिटकॉइन का दूसरा सबसे बड़ा होल्डर है। क्रिप्टो मार्केट की जानकारी तथा आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रैगन कभी सीधी चाल नहीं चला इसके हर कदम के पीछे खुद छुपे हुए मतलब होते हैं पीपल्स बैंक आफ चीन के हालिया आदेश के मुताबिक अब चीन में किसी भी व्यक्ति का क्रिप्टोकरंसी को रखना दंडनीय अपराध है चीन ने क्रिप्टोकरंसी की मीनिंग पर भी बैन लगा दिया है ड्रैगन की दलील है कि क्रिप्टोकरंसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा हो सकती है इसके अलावा इसका अपराध में इस्तेमाल हो रहा है। इन दोनों वजहों से बैन लगाया जा रहा है। देश के सभी लोकल और इंटरनेशनल क्रिप्टो एक्सचेंज पर पहले से ही बैन लगा हुआ है।
क्या है असली मकसद.
आर्थिक जानकारों और बाजार विशेषज्ञों का दावा है कि चीन ने क्रिप्टो करेंसी पर बेन अपने सीबीडी यानी डिजिटल युवान को प्रमोट करने के लिए किया है. चीन ईरान सहित उन तमाम देशों से व्यापार के लिए क्रिप्टो का इस्तेमाल करता था जिनके साथ डॉलर में लेनदेन प्रतिबंधित है। चीन अब इसके स्थान पर अपनी स्वयं के प्रोडक्ट डिजिटल युआन को प्रमोट करना चाहता है। दुनिया की शक्तिशाली अर्थव्यवस्था वाले फार्मूले पर चीन आजकल आगे बढ़ रहा है। वह सैन्य शक्ति के साथ-साथ मजबूत आर्थिक शक्ति बने रहना चाहता है।

क्या होगा इस फैसले का असर
दोस्तों दुनिया की अगर कोई बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश कोई भी आर्थिक निर्णय लेता है तो इसका असर ने केवल उसे स्वयं की अर्थव्यवस्था पर बल्कि बाकी देशों के अर्थतंत्र को भी प्रभावित करता है। जाहिर सी बात है कि चीन के फैसले का भी असर पड़ेगा दुनिया पर।
चीन के फैसले का सबसे बड़ा असर यह होगा कि दुनिया के सभी देशों में क्रिप्टो की वैल्यू में गिरावट आएगी बल्कि आना शुरू भी हो चुकी है। कुछ देश चीन की भांति क्रिप्टो पर सख्त रुख अपना सकते हैं चीन में बहन से माइनर्स उन देशों का रुख करेंगे जहां के नियम पॉजिटिव है। इससे इस मार्केट में कभी काफी उलट फेल हो सकता है।
क्रिप्टो पर चीनी प्रहार
- 2013 में चीन ने बैंकों को क्रिप्टो में लेनदेन को लेकर चेतावनी दी जिसके बाद चीन के सेंट्रल बैंक ने सभी क्रिप्टो लेनदेन को गैर कानूनी घोषित कर दिया.
- 2017 में चीन ने सभी स्थानीय क्रिप्टो एक्सचेंजों पर प्रतिबंध लगा दिया और नए क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स के फंड रंगिंग को बन कर दिया 2021 में माइनिंग पर शक्ति दिखाई गई
- चीन के पास 194000 से ज्यादा बिटकॉइन है और वह दुनिया में बिटकॉइन का दूसरा सबसे बड़ा होल्डर है।
क्या है मकसद.. असली
हालांकि चीन का कहना है कि क्रिस्टोफर लगाए गए इस प्रतिबंध का कारण क्राइम को कंट्रोल करना और आर्थिक स्टार्ट को वजह बताया है। विशेषज्ञ का मानना है की असली वजह यह नहीं है। असली वजह है ड्रैगन के द्वारा अपना खुद का डिजिटल युवान को प्रमोट करना है। आज आप हम वर्तमान दुनिया के देश से जानते हैं कि केवल सैनिक शक्ति होने से काम नहीं चलेगा अगर सैन्य शक्ति के साथ-सा आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है तो आप दुनिया में पीछे सकते हैं।
चीन क्रिप्टो के स्थान पर अपनी डिजिटल मुद्रा युवान को तरजीह दे रहा है। जैसा मैंने पहले बताया कि ड्रैगन कभी सीधी चाल नहीं चलता है इसके हर कदम के पीछे छिपे हुए मतलब होते हैं। इस फैसले के पीछे भी उसका यही मकसद है कि वह अपनी डिजिटल युवाओं को प्रमोट करने जा रहा है।



