आर्थिक अपराध भी… आस्था से खिलवाड़ भी..।

फोटो विश्लेषण = केशपति पोसवाल, W/O केदार लिग़री

अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में आठ आरोपियों की गिरफ्तारी और मंदिर ट्रस्ट के महासचिव और एक अन्य ट्रस्टी के इस्तीफा की खबर ने देश के करोड़ों धर्म प्रेमियों को जगजोर कर रख दिया है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: आर्थिक अपराध के साथ आस्था से भी खिलवाड़हाल ही में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी का मामला चर्चा का विषय बना है। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल धन की चोरी का मामला नहीं बल्कि एक गंभीर आर्थिक अपराध और करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था के साथ विश्वासघात भी माना जाएगा।चढ़ावा वह धन है जिसे श्रद्धालु अपनी श्रद्धा, विश्वास और धार्मिक भावना से मंदिर में अर्पित करते हैं। यह राशि किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं होती, बल्कि धार्मिक और सामाजिक उद्देश्यों के लिए उपयोग की जाने वाली सार्वजनिक आस्था की निधि होती है। ऐसे धन का गबन, चोरी या दुरुपयोग सीधे-सीधे आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है क्योंकि इससे धार्मिक संस्था की वित्तीय व्यवस्था और पारदर्शिता प्रभावित होती है।दूसरी ओर, यह मामला केवल पैसों तक सीमित नहीं है। जब कोई व्यक्ति भगवान के नाम पर चढ़ाए गए धन में अनियमितता करता है, तो वह करोड़ों भक्तों के विश्वास को ठेस पहुंचाता है। मंदिरों की पहचान केवल इमारतों से नहीं, बल्कि लोगों की आस्था और विश्वास से होती है। इसलिए ऐसी घटनाएं समाज में अविश्वास, निराशा और धार्मिक संस्थाओं की साख पर भी प्रश्नचिह्न लगा सकती हैं।हालांकि, किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकाला जाना चाहिए। आरोप और दोष सिद्ध होने में अंतर होता है, इसलिए तथ्यों के आधार पर ही निर्णय करना उचित है।

मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी का मामला केवल धन की हानि नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर भी आघात है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई आवश्यक है, ताकि धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और जनता का विश्वास हमेशा कायम रह सके।

चढ़ावे की चोरी आर्थिक अपराध से भी कहीं बढ़कर है..।

यह एक तरह से चूड़ियां गबन की घटना तक की सीमित नहीं है बल्कि देश के करोड़ों धर्म प्रेमियों और श्रद्धालुओं को आस्था के साथ खिलवाड़ भी है मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था देख रहे श्री राम जन्मभूमि तीर से क्षेत्र ट्रस्ट ने दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का भरोसा दिलाया है लेकिन क्या पर्याप्त है..?

अयोध्या में बना भगवान श्री राम का मंदिर सिर्फ एक मंदिर नहीं बल्कि सालों तक सड़क से लेकर संसद और अदालत तक चले संघर्ष में मिली जीत का प्रतीक है यह मंदिर ने सरकारी अनुदान से बने किसी राजनीतिक दल से मिले चंदा से बनाएं यह मंदिर देश-विदेश में रह रहे करोड़ों राम भक्तों की मेहनत के फल से बना

हैरत इस बात की भी है कि चढ़ने की चोरी किसी भारी व्यक्ति ने नहीं की है चढ़ने की चोरी के आरोप में जिन आठ लोगों को गिरफ्तार किया है वह सभी मंदिर संचालन की व्यवस्था से जुड़े हुए महत्वपूर्ण लोग हैं इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच चोरी अकस्मात नहीं हो सकती इसलिए यह सवाल उठना भी लाजमी है की योजना बंद तरीके से इसे अंजाम दिया गया होगा। आरोपियों के घरों से बरामद की गई राशियों की मात्रा से अंदर लगाना मुश्किल नहीं है कि मामला काफी दूर तक जा सकता है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी होने की बात कही है देश की जनता भी यही चाहती है कि इतने बड़े घोटाले में सिर्फ निकली कड़ी ही नहीं पड़ी जानी चाहिए बल्कि आरोपी कितने ही बड़े क्यों नहीं हो सजा सबको मिलनी चाहिए मामला उजागर होने के बाद अनेक भक्तों ने आरोप लगाया है कि उन्हें चांदी की रसीद नहीं मिली।

मंदिर ट्रस्ट को इस बार को भी संज्ञान में लेना चाहिए कि चंदा देने वालों को रसीद दी गई या नहीं एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में मंदिर ट्रस्ट को दोबारा गठित करने की सिफारिश की है। मतलब साफ है कि प्रारंभिक जांच में मंदिर ट्रस्ट की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए हैं जब मंत्र में सैकड़ो सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं तो चोरी संभव कैसे हुई राम भक्तों के मन में उसे सैकड़ो सवालों के जवाब सामने आने चाहिए

देश के दूसरे मंदिरों के ट्रस्टों को भी अयोध्या की घटना से सबक लेने की जरूरत है देश में जो दर्जन और धार्मिक संस्थान ऐसे जहां हर साल करोड़ों रुपए का चढ़ावा आता है इस पेज का सही इस्तेमाल हो इसकी पुख्ता व्यवस्था करने की जिम्मेदारी भी सरकार को लेनी चाहिए क्योंकि भगवान और भक्तों के बीच बैठे लोगों पर नियंत्रण का काम सरकार से बेहतर और कोई नहीं कर सकता भविष्य में अयोध्या जैसी घटनाओं को रोकने के लिए जो भी संभव हो किया जाना चाहिए

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