*जेन जी* – भारत की “इकोनामिक कैपिटल” बनेंगे या फिर चुनौती..?

= दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देश भारत का आर्थिक विकास “अपने आप नहीं होगा” इसके लिए हमें अपनी *जवा जनसंख्या* के लिए अवसर उपलब्ध करवाने होंगे।

1. विषय प्रवेश/इंट्रोडक्शन

भारत आज दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है और यही युवा शक्ति आने वाले दशकों में उसकी अर्थव्यवस्था की दिशा तय कर सकती है। Gen Z और Gen Alpha केवल नई पीढ़ियां नहीं हैं, बल्कि वे उस भारत का निर्माण करने वाली पीढ़ियां हैं, जहां AI, Digital Technology, Automation, Entrepreneurship और नई Economy रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रहे हैं। Gen Z तेजी से बदलती technology और digital world के साथ काम करना सीख रही है, जबकि Gen Alpha बचपन से ही AI, smart devices और डिजिटल वातावरण के बीच बड़ी हो रही है।सवाल यह है कि क्या ये दोनों पीढ़ियां भारत के लिए सबसे बड़ी Economic Capital साबित होंगी? क्या उनकी digital skills, creativity, innovation और नए विचार भारत को दुनिया की leading economies में पहुंचाने में मदद करेंगे? या फिर बेरोजगारी, skill gap, technology पर अत्यधिक निर्भरता और बदलती job market जैसी चुनौतियां इन्हें भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बना देंगी? आने वाले वर्षों में इन सवालों के जवाब केवल इन पीढ़ियों के भविष्य को नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक और सामाजिक दिशा को भी तय करेंगे।

आज दुनिया के अधिकतर देश बुद्धि होती आबादी की चुनौती से जूझ रहे हैं वहीं भारत के पास युवाओं की बड़ी और ऊर्जावान फौज है। लेकिन अपनी इस ताकत का अर्थ केवल यह नहीं है कि हमारे पास काम करने वाले हाथ अधिक हैं असली सवाल इन हाथों में कौशल कितना है दिमाग में नहीं सोच कितनी है तकनीकी का इस्तेमाल भी किस तरह करते हैं।

अगर आंकड़ों के हिसाब से बात करें तो भारत में जैन जी की संख्या करीब 40 पॉइंट 7 करोड़ और जैन अल्फा की करीब 33.2 करोड़ है। और यह ने केवल युवा शक्ति है बल्कि भारत के अगले दो-तीन दशकों के बाजार रोजगार इंडस्ट्री टेक्नोलॉजी और सोशल चेंज की दिशा से करने वाली पीढ़ियां हैं। जीन जीन इंटरनेट के साथ अपनी दुनिया बनाई है जैन अल्फा के लिए स्मार्टफोन वीडियो ऑनलाइन शिक्षा गेमिंग और आई नई चीज नहीं है यही बदलाव अर्थव्यवस्था/economi को प्रभावित कर रहा है। आज शिक्षा मनोरंजन बैंकिंग शॉपिंग और यहां तक की नौकरी खोजने के तरीके तक बदल गए हैं इस बदलाव ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नए उपभोक्ते उपभोक्ता दिए हैं तो तेज डिजिटल और अपनी पसंद को लेकर अधिक स्पष्ट है हालांकि यहां एक सावधानी भी जरूरी है केवल डिजिटल होना आर्थिक शक्ति की गारंटी नहीं है डिजिटल सुविधा तभी तक आर्थिक ताकत बनेगी जब उसके साथ अच्छी शिक्षा कौशल रोजगार और एंटरप्रेन्योरशिप के अवसर उपलब्ध हो भारत के सामने असली चुनौती इसी जगह है।

2. भारत की युवा शक्ति अपने आप नहीं बनेगी “आर्थिक पूंजी

मैं आपको एक बहुत बड़ी बात से अवगत कराना चाहता हूं। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष इस बात को कह चुका है और रेखांकित कर चुका है कि भारत का डेमोग्राफिक डिविडेंड अपने आप आर्थिक विकास में नहीं बदलेगा इसके लिए शिक्षा स्वास्थ्य स्किल रोजगार सम्मानजनक अवसर और इन्वेस्टमेंट तथा एंटरप्रेन्योरशिप के अवसर उपलब्ध करवाना जरूरी है। सरकारी जैन जी को लेकर कई उलझन में फंसी हुई है जबकि होना यह चाहिए कि इन्हें आधुनिक सुविधाएं पूंजी और बाजार के अवसर मिले।

ऐसे में जैन जी और जैन अल्फा के विषय में चर्चा इस बात पर होनी चाहिए कि वर्ष 2035 2040 और 2047 का भारत इन पीडिया के ज्ञान और सैम से बनेगा 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन में युवाओं पर विशेष जोर दिखाई दिया इसका अर्थ है कि सरकार भी आई शोध नवाचार खेल एवं नए कौशल को आर्थिक विकास का हिस्सा मान रही है. लेकिन चुनौती यह है कि यह घोषणा जमीन तक कैसे पहुंचे

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