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प्रेरणा आर्थिक फंडा.

 भारत और दुनिया में इन दोनों SUV खरीदी का ट्रेंड बढ़ रहा है। पेट्रोल की आसमान छूती कीमतों ने इसे और गति प्रदान करदी है। इलेक्ट्रिक कर की बिक्री में बढ़ रही तेजी की कई वजह है, लेकिन इस बढ़ते क्रेज के कई साइड इफेक्ट भी हैं। वैसे तो प्रेरणा डायरी ब्लॉक में सव से संबंधित आर्टिकल पब्लिश नहीं होने चाहिए पर जो की इलेक्ट्रिक कारों का शौक हमारे युवा और छात्रों में तेजी से बढ़ रहा है इसीलिए मैं इससे संबंधित एक पोस्ट प्रकाशित कर रहा हूं। आइये सबसे पहले मैं आपको यह समझता हूं, कि इलेक्ट्रिक कार या S.U.V.   आखिर होती क्या है..? और इसकी क्या खास बात है..? यह बातें करने के बाद हम आर्टिकल में आगे बढ़ेंगे।

 कभी गाड़ियां एक जगह से दूसरी जगह तक का सफर करने का एक साधन मात्र हुआ करती थी, मगर अब ऐसा नहीं है। टाटा मोटर्स के एक सीनियर ऑफिसर कहते हैं अब कारों को परिवार की रक्षक के रूप में बेचा जा रहा है। मजबूत बॉडी, शानदार बिल्ड क्वालिटी, ऊंची ड्राइविंग पोजीशन, किसी भी राह में कोई परेशानी नहीं…। कुछ कार कंपनियों ने तो अपने एसयूवी मॉडल्स को “मस्कुलर”  (मर्दाना) इंपोजिंग (रोबदार) और एग्रेसिव (आक्रामक) जैसे शब्दों से वर्णित किया है।

 एसयूवी का फ़ुल फ़ॉर्म है – स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल. यह एक तरह की कार होती है, जिसे शानदार ड्राइविंग के लिए बनाया गया है. एसयूवी कारें अलग-अलग आकार में आती हैं. ये कारें, शहर में ड्राइविंग के सथ-साथ ऊबड़-खाबड़ इलाकों में भी आसानी से चल सकती हैं.

 SUV कार की खासियतऐं

1. एसयूवी कारों में यात्रियों और सामान रखने के लिए काफ़ी जगह होती है. 

2. इनमें हाई ग्राउंड क्लीयरेंस होता है, जिसकी वजह से ये कारें ऊबड़-खाबड़ इलाकों में भी आसानी से चलती हैं. 

3. एसयूवी कारें, ट्रकों के समान स्टॉक से बनी होती हैं, इसलिए ये मज़बूत होती हैं और भारी भार उठाने में माहिर होती हैं. 

4. एसयूवी कारों में चौकोर आकार के शरीर होते हैं, जिससे इनका गुरुत्वाकर्षण केंद्र ऊंचा होता है.

 SUVs कार के प्रकार

– फ़ॉर्च्यूनर जैसी कारें फ़ुल साइज़ एसयूवी कहलाती हैं. 

– ब्रेज़ा एक सब-कॉन्पैक्ट एसयूवी है. 

– क्रेटा मिड-साइज़ एसयूवी है. 

– ह्युंडई की वेन्‍यू, किया सॉनेट, मारुति ब्रेज़ा, महिंद्रा एक्‍सयूवी    300 और टाटज्ञ की नेक्‍सॉन

SUV भविष्य कि उड़ान – 

 10 में से 6 कारें एसयूवी —

 सोसाइटी ऑफ इंडियन मोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के 25 वर्षों के डेटा के द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार एसयूवी की बिक्री अब है बैक से आगे निकल रही है। 2000 से 2010 के दशक में सबसे ज्यादा बिकने वाली 10 यात्री वाहनों की सूची में निर्यात के रूप में केवल दो सव शामिल होती थी – महिंद्रा बोलेरो एंड महिंद्रा स्कार्पियो। लेकिन यह भी ज्यादातर ट्रैवल एजेंसी द्वारा और ग्रामीण क्षेत्रों में ही इस्तेमाल की जाती थी। फिर अगले दशक यानी 2010 से 2020 में टोयोटा,इनोवा, और मारुति अर्टिगा ने इस सूची में जगह बनाएं. लेकिन असली बदलाव 2020 के बाद आया साल 2024 में भारत में बिकने वाली सीट 10 कण में से 6 करें कंपैक्ट या फुल साइज एसयूवी थी। इसमें मारुति सुजुकी की अर्टिगा ( फुल साइज मल्टी यूटिलिटी वाहन ) तीसरे स्थान पर और हुंडई की क्रेटा पांचवी स्थान पर थी पहला स्थान टाटा पांच ने हासिल किया जो एक कंपैक्ट SUV है।

एसयूवी मतलब “वैल्यू फॉर मनी” –

 स्कोडा के नोएडा स्थित डीलर के पास आए खरीदार ने कहा 40 लख रुपए की कोड़ियाक खरीदना मेरे लिए संभव नहीं लेकिन 12 लाख की कइलाक लाख मुझे लगभग वही सेटिस्फेक्शन देती है।  विभिन्न कर डीलरशिप पर करीब एक दर्जन संभावित खरीदारों से बात की गई लेकिन कोई भी हैचबैक खरीदना नहीं चाहता। लगभग सभी कर डीलर इस बात पर सहमत थी कि एक खरीदार को कंपैक्ट suv बेहतर “वैल्यू फॉर मनी” का अनुभव करती है. कर डीलर्स में मार्क्स भी इस खरीदारी को बढ़ावा देने के पक्ष में है क्योंकि इससे उनकी जेब में अधिक पैसा आता है। उद्योग से जुड़े तीन शीर्ष अधिकारियों के अनुसार एक हैचबैक और एक कॉन्पैक्ट एसयूवी की निर्माण लागत में आमतौर पर 10 से 15 फ़ीसदी का अंतर होता है। विशेष रूप से जब भी एक ही प्लेटफार्म पर बनाई गई हो। लेकिन एसयूवी की खुदरा कीमत उसके अतिरिक्त कॉस्मेटिक फीचर्स की वजह से 25 से 50 फ़ीसदी तक अधिक होती है। उदाहरण के लिए मारुति सुजुकी की बोलेरो हैचबैक, व frons, हुंडई की आई -20 हैचबैक, व वेन्यू ( कंपैक्ट एसयूवी ) और होंडा की जैज़ (हैचबैक) व WR -V ( क्रॉसओवर ) को देखें तो इन सभी मॉडलों की निर्माण लागत में मामूली अंतर है। फिर भी हैचबैक का टॉप एंड मॉडल एसयूवी की तुलना में काम से कम 30 फीसदी सस्ता होता है।

 बाजार में ज्यादा एसयूवी के आखिर क्या मायने हैं…?

 हादसों की अधिक आशंका..!

 सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में सालाना सड़क दुर्घटना रिपोर्ट तैयार करने वाली अनुसंधान टीम के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं, -” एसयूवी की बढ़ती बिक्री का यह ट्रेंड सुरक्षा के नजरिए से घातक हो सकता है।” 2010 से 2022 के बीच कार, टैक्सियां, औसतन हर 10 में से दो घातक हादसों में शामिल थी। उक्त अधिकारी ने बताया कि 2023 से 2024 के बीच यह संख्या 30% के करीब पहुंच गई है। अधिकारी कहते हैं कि सड़क हादसों के संदर्भ में एसयूवी का क्रेज का वास्तविक असर 2025 के बाद स्पष्ट दिखाई देगा। पुरानी कारों से सबसे ज्यादा दुर्घटना होती है क्योंकि इस समय तक ड्राइवर गाड़ी चलाने में अधिक सहज़ हो जाते हैं और तेजी से गाड़ी चलाने लगते हैं। 2023 और 2024 में भारत में बिकने वाली हर दो में से एक कर सव है जिसका मतलब है कि 2026 के अंत तक यह वाहन “खतरे के दायरे” में आ जाएंगे.

 दुर्घटनाओं की ज्यादा आशंका क्यों..?

SUVs चाहे कंपैक्ट हो या बड़ी पैदल यात्रियों और दो पहिया वाहन चालकों के लिए सबसे ज्यादा घातक क्यों होती है..? इसकी एक प्रमुख वजह है इनका ऊंचा बोनट। इंटरनेशनल ट्रांसपोर्टेशन इकोनॉमिक्स संगठन की रिपोर्ट के अनुसार बोनट की ऊंचाई में मैच 10 फ़ीसदी की वृद्धि पैदल यात्रियों की मृत्यु दर में 22% तक की वृद्धि कर सकती है। इसकी पुष्टि दिल्ली स्थित एम्स के एक ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टर भी करते हैं उनके मुताबिक ऊंची बोनट वाली गाड़ियां 20 किलोमीटर घंटा की रफ्तार पर भी स्थाई चोट या मृत्यु का कारण बन सकती है।

 अपार्टमेंट में पार्किंग प्रॉब्लम

एक बड़ी समस्या बिल्डरों की भी है दिल्ली के द्वारका और गुरुग्राम में बिल्डरों को एक नई समस्या से जूझना पड़ रहा है और यह है पार्किंग की समस्या। गुरुग्राम स्थित एक रियल एस्टेट डेवलपर की वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अगर पहले एक पार्किंग क्षेत्र में 100 कार्य फिट हो सकती थी तो अब उसी जगह पर अधिकतम 7075 करें ही आ पाएंगे उन्होंने देखें साथ एक 12 साल पुरानी हाउसिंग सोसाइटी में जाकर पुराने और नए पार्किंग मानकों का अंतर समझाए उनके मुताबिक पहले प्रतिकार 3.5 से 3 पॉइंट 9 मीटर लंबाई और 1.6 मीटर चौड़ाई की जगह आलोट की जाती थी. ज्यादा तरकारी इन मापदंडों में फिट हो जाती थी। कुछ अपवाद होती थी उन्हें समायोजित कर लिया जाता था लेकिन अब कारों के लिए पुराने मापदंड अपवाद बन गए खासकर बहू मंजीरा इमारत में जहां बड़ी गाड़ियों के लिए अलग से जगह निकलना मुश्किल हो रहा है।

 सड़कों पर पड़ रही भारी

एस यू वी भारतीय सड़कों के लिए बहुत भारी साबित हो रही है उदाहरण के लिए मारुति सुजुकी की एसयूवी सोंग्स उसके हैचबैक मॉडल बलेनो से 50 से 100 किलोग्राम अधिक वजनी है। नतीजा क्या..? इस तरह की लगभग तमाम सव सड़कों पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं जिससे सड़क तेजी से खराब होती है। केंद्रीय परिवहन मंत्री के साथ कई प्रोजेक्ट पर काम कर चुके एक वरिष्ठ सिविल इंजीनियरिंग कहते हैं कि भारतीय सड़क ट्रैकों और लॉरियों का भार सहने के लिए डिजाइन की गई है, जोकरो की तुलना में कहीं अधिक भारी होती हैं लेकिन भारी वाहन आमतौर पर शेरों की सड़कों पर प्रतिबंध होते हैं या उन्हें बहुत कम अनुभूति होती है लेकिन जब औसत बाहर लगातार बढ़ेगा तो सब ग्रेड लिए सड़क की नई कमजोर होने लगती है यह सड़कों के डसने या गढ़ों में बदलने की वजह बनती है। 

निष्कर्ष – भारत में इन दिनों SUV खरीदने की ट्रेंड में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। 2016 में प्रति 10 में से दो कार्य ही सव कार्य होती थी लेकिन 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 6 हो गया है अर्थात पृथ्वी 10 में से कारें suv खरीदी जा रही है। यह इस इजाफा ध्यान आकर्षित करता है। दोस्तों, विकास के दो पहलू होते हैं उससे फायदा भी हासिल होता है, तो उसके नुकसान भी उसके साथ जुड़े होते हैं। सव का भविष्य तो बढ़ रहा है लेकिन आने वाले समय में इसके कारण कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, मुस्लिम हादसों की संख्या बढ़ेगी अपार्टमेंट और बड़े शहरों में प्रॉब्लम होगी, पार्किंग की समस्या उत्पन्न होगी सड़कों की रखरखाव पर अधिक भार पड़ेगा होगा। कई संस्थाओं के बड़े अधिकारी इस पर चिंता भी व्यक्त कर चुके हैं।

 महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर  —

क्वेश्चन –  S.U.V. (स्पोर्ट यूटिलिटी कार ) क्या कैसी होती है..?

उत्तर – SUV का मतलब है “स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल” (Sport Utility Vehicle), जो कि एक तरह की कार है जो यात्री कारों और ऑफ-रोड वाहनों के फीचर्स को मिलाती है, जैसे कि ज्यादा ग्राउंड क्लीयरेंस और चार पहिया ड्राइव। आजकल इनका चलन तेजी से बढ़ रहा है।

 एसयूवी की क्या विशेषताएं हैं..?

यहाँ SUV के बारे में कुछ और बातें दी गई हैं:

फीचर्स:

1.बड़ा आकार: SUV आमतौर पर यात्री कारों की तुलना में बड़ी होती हैं. 

अधिक जगह: इनमें यात्रियों और सामान के लिए अधिक जगह होती है. 

ऊंचा ग्राउंड क्लीयरेंस: ये खराब रास्तों पर भी आसानी से चल सकती हैं. 

चार पहिया ड्राइव: कई SUV में चार पहिया ड्राइव होती है, जो कि खराब रास्तों पर बेहतर पकड़ प्रदान करती है. 

उपयोग:

SUV का उपयोग परिवार के लिए, लंबी यात्राओं के लिए, और ऑफ-रोड गतिविधियों के लिए किया जाता है. 

उदाहरण:

कुछ लोकप्रिय SUV में शामिल हैं: महिंद्रा थार, टाटा हैरियर, हुंडई क्रेटा, किआ सेल्टोस, मारुति सुजुकी विटारा ब्रेज़ा. 

अन्य नाम:

SUV को कभी-कभी “स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल” या “स्पोर्ट यूटिलिटी कार” भी कहा जाता है. 

SUV और MUV में अंतर:

MUV (Multi Utility Vehicle) भी एक तरह की कार है, लेकिन यह आमतौर पर SUV से छोटी होती है और इसमें अधिक यात्री क्षमता होती है. 

ब्लॉग – आर्थिक फंडा

Kedar Lal
Kedar Lalhttps://arthikfunda.com
मेरा नाम केदार लाल है ( K. L. Ligree)। मैं भारत देश के अंतर्गत राजस्थान राज्य के करौली जिले के टुड़ावली गांव का रहने वाला हूँ। मैंने राजस्थान विश्वविधालय एवं वर्धमान महावीर विश्वविद्यालय कोटा से बीए, एमए, बीएड, एमबीए एवं बीजेएमसी (पत्रकारिता ) कि शिक्षा प्राप्त कि है। कुछ वर्षों तक मैं राजस्थान एवं देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका एवं दैनिक भास्कर में विपणन ( Marketing ) कार्य भी किया हैं. एमबीए के बाद मैंने गोदरेज, टाटा AIG, आइडिया एवं वोडाफोन जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्य किया है। मैं करौली जिले के कई विद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में काफी समय तक शिक्षण कार्य से जुड़ा रहा हूं। रुचियाँ -- मुझे समाचार पत्र पढ़ने, न्यूज़ देखने, डिबेट देखने, घूमने का शोक है। मुझे पारिवारिक और मनोरंजक फिल्में देखने का भी काफी शौक है। मुझे घूमना और लॉन्ग ड्राइव पर जाना अच्छा लगता है। मैं पर्वतीय क्षेत्र में घूमने का शौकीन हूँ। मुझे पढ़ने और अपने ब्लॉग के लिए आर्टिकल लिखने का भी काफी शौक है। मेरे दो ब्लॉग है जिनके लिए मैं आर्टिकल लिखता हूं और मैं फुल टाइम कंटेंट क्रिएटर हूं। मेरे ब्लॉग -- 1. प्रेरणा डायरी ( ब्लॉग ) prernadayari.com (blogger ) 2. आर्थिक फंडा (ब्लॉग ) arthikfunda.com ( wordpress मैं बचपन से ही लेखक, पत्रकार, और एक अच्छा शिक्षक बनना चाहता था। अगर अब तक कि मेरी जिंदगी का मूल्यांकन करें, तो मेरे कुछ सपने पूरे हुए हैं, जबकि कुछ अभी भी अधूरे हैं। फिलहाल में फुल टाइम कंटेंट क्रिएटर हूं। और गूगल, ब्लॉगर तथा वर्डप्रेस जैसे प्लेटफार्म पर लोकप्रिय कंटेंट क्रिएटर और आर्टिकल राइटर बनना चाहता हूं। इस क्षेत्र में मुझे काफी लोकप्रियता मिल रही है।
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