महंगाई दर लगातार घटी, फिर भी आम आदमी को राहत क्यों नहीं मिल राही..?

आज जानेंगे इसकी असली वजह

टेबल ऑफ़ कंटेंट / आज की पोस्ट में

1. समझें महंगाई की असली वजह को

2. क्यों नहीं मिल रही आम आदमी को राहत।

3. महंगाई दर घटी, पर महंगाई क्यों बड़ी।

5. महंगाई घटने के बावजूद महसूस क्यों नहीं हो रही।

6.

7. क्यों महत्वपूर्ण है यह बढ़ोतरी..

8. कितनी बड़ी है फसलों की कीमतें

9. आर्टिकल का निष्कर्ष

10. संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

1. समझो महंगाई की असली वजह को

वर्तमान समय में महंगाई की दर तो घटी है लेकिन फिर भी महंगाई घटी हुई महसूस नहीं हो रही है, इसका कारण यह है कि सरकार द्वारा महंगाई को नियंत्रित करने के प्रयासों के बावजूद, कई कारक ऐसे हैं जो महंगाई को बढ़ावा देते हैं। इनमें से एक प्रमुख कारण है जनसंख्या वृद्धि, जो संसाधनों पर दबाव डालती है और मांग को बढ़ाती है, जिससे कीमतें बढ़ती हैं।इसके अलावा, सरकार की आर्थिक नीतियों में कमियां, जैसे कि कृषि क्षेत्र की उपेक्षा, उद्योगों में घाटा, और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में असमर्थता, भी महंगाई को बढ़ावा देती हैं। साथ ही, कालेधन की समस्या, जमाखोरी, और भ्रष्टाचार भी महंगाई को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।इन कारकों के कारण, महंगाई की दर भले ही घटी हो, लेकिन आम आदमी को इसका फायदा नहीं मिल पाता है, क्योंकि कीमतें अभी भी ऊंची हैं और आमदनी में वृद्धि नहीं हो रही है। इसलिए, महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार को इन कारकों पर ध्यान देना होगा और समग्र आर्थिक नीतियों में सुधार करना होगा।

नई दिल्ली से वर्ष 2025 की एक आर्थिक रिपोर्ट जारी हुई है। रिपोर्ट महंगाई को लेकर है और इस रिपोर्ट में बताया गया की 2025 में खुदरा के साथ-साथ थूक महंगा इधर में भी लगातार कमी आई है। अगर हम तथ्य आत्मक बात करें तो जनवरी में खुदरा महंगा इधर 4 पॉइंट 26 थी जो जुलाई में घटकर 6 साल के निचले स्तर यानी दो पॉइंट 10% पर आ गई। अशोक महंगाई 20 जनवरी के 2.31 से घट करके 20 माह की न्यूनतम स्तर बिरयानी- 0.13 प्रतिशत रहीं।

2. क्यों नहीं मिल रही आम आदमी को राहत

दरअसल महंगाई की तुलना पिछले साल की अवधि में दर्ज रेट से होती है। यानी अगर आप आज अर्थात अक्टूबर 2025 की महंगाई दर की तुलना करना चाहेंगे तो वह 25.तारीख 2024 से से तुलना होगी यदि आप जून 2025 में महंगाई की तुलना करना चाहते हैं तो यह आपको जुन जुन 2024 से करनी होगी।. इसमें यह एक बड़ा पेज है। जिसे समझने की आवश्यकता है। मान लीजिए जून 2024 में आलू 45 किलो था। और वही आलू जून 2025 में 35 से ₹40 में मिला है। जाहिर है कीमत कम हो गई पर आपकी जब को इसलिए महसूस नहीं हुई क्योंकि आलू की कीमतें ₹45 से ज्यादा थी, और ₹40 भी ज्यादा है।

3. महंगाई दर घटी, पर महंगाई क्यों बड़ी

जून 2025 में खुदरा महंगाई दर घटकर 2.1 % रही। इसका मतलब यह है कि जो सामान पिछले साल जून में ₹100 में मिल रहे थे वह अब 102.1 एक रुपए में मिल रहे हैं… हालांकि जून 2024 में खुदरा महंगाई दर में 5.08% थी.। यानी जून 2023 में जो सामान ₹100 का था वह जून 2024 में 105.8 रुपए का था। अब 5% की तुलना में 2% प्रतिशत महंगाई दर कम है। हमें दिखाने और पढ़ने में साफ लगता है कि महंगाई की दर में कमी हो गई। लेकिन लोगों की जेब पर पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष की इस अवधि में महंगाई घटने के बावजूद, 2.1% बड़ा है। का भरा पड़ा है।.

4. महंगाई घट रही है पर महसूस नहीं हो रहा

जून के महीने में अगर हम खाद्य महंगाई के आंखों पर गौर करें तो यह प्रमाणित होता है कि महंगाई में -1.06% की कमी आई। मैं उदाहरण और कैलकुलेशन के साथ आपको इसका मतलब समझता हूं इसका तात्पर्य है कि ₹100 की खाने-पीने की चीज लगभग 99 रुपए में मिल रही है। पिछले साल की तुलना में खाद्य में महंगाई में कमी आई है पर मैं की तुलना में जून में 1.08% की बढ़ोतरी हुई इसका मतलब है कि जो सामान में में 97.90 ₹ में मिला वह वह सामान अब 98 पॉइंट 94 रुपए में मिल रहा है। इसके अलावा हमारी अर्थव्यवस्था में कई सेक्टर ऐसे हैं जो इन की तुलना में महंगाई को दर्शा रहे हैं जैसे आवास 3.24% शिक्षा 4.37 प्रतिशत दवाइयां 4.43 प्रतिशत और यातायात 3 पॉइंट 90% की महंगाई को दर्शा रहे हैं

5. क्यों बढ़ सकती है गेहूं और चावल जैसी फसलों की कीमतें

केंद्र सरकार ने ओपन मार्केट स्कीम के तहत खुले बाजार में बेचे जाने वाले गेहूं और चावल के आरक्षित मूल्य में वृद्धि की है। वर्ष 2024 25 की तुलना में गेहूं का मूल्य लगभग 11% और चावल का मूल्य लगभग तीन प्रतिशत बढ़ाया गया है। यह योजना मुख्य रूप से बाजार में अनाज की आपूर्ति बढ़ाने और खाद्य महंगाई पर नियंत्रण के उद्देश्य चलाई गई है। नई दरें की नीलामी के माध्यम से निजी व्यापारियों सरकारी संस्थाओं और राज्य सरकारों को बिक्री के लिए लागू की गई है।

आर्टिकल का निष्कर्ष एवं सारांश

महंगाई दर के आंकड़े राहत की खबर ला रहे हैं, लेकिन आम आदमी को इसका फायदा महसूस नहीं हो रहा है। जुलाई में खुदरा महंगाई दर 3.54% पर आ गई है, जो 59 महीने का निचला स्तर है। खाने-पीने की चीजों की कीमतें घटने से महंगाई दर में कमी आई है, लेकिन लोगों को लगता है कि चीजें अभी भी महंगी हैं।इसका एक बड़ा कारण यह है कि महंगाई का असर अलग-अलग वर्गों पर अलग-अलग तरीके से पड़ता है। जिन लोगों की आय स्थिर है, उन्हें महंगाई का फायदा महसूस नहीं होता है, क्योंकि उनकी आय में कोई वृद्धि नहीं हुई है। इसके अलावा, कुछ आवश्यक वस्तुओं की कीमतें अभी भी ऊंची हैं, जैसे कि ईंधन और दवाएं।एक अन्य कारण यह है कि महंगाई की दर में कमी आने के बावजूद, लोगों की उम्मीदें अभी भी ऊंची हैं। वे चाहते हैं कि चीजें और सस्ती हों, और उनकी आय में वृद्धि हो। लेकिन यह एक धीमी प्रक्रिया है, और इसमें समय लगता है।इसके अलावा, सरकार और रिजर्व बैंक की नीतियों का भी असर महंगाई पर पड़ता है। अगर सरकार और रिजर्व बैंक महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सही नीतियां बनाते हैं, तो महंगाई दर में कमी आ सकती है, और लोगों को इसका फायदा महसूस हो सकता है।इसलिए, महंगाई दर में कमी आने के बावजूद, आम आदमी को इसका फायदा महसूस नहीं हो रहा है। लेकिन अगर सरकार और रिजर्व बैंक सही नीतियां बनाते हैं, और लोगों की आय में वृद्धि होती है, तो महंगाई का फायदा सबको महसूस हो सकता है।इस आर्टिकल से यह निष्कर्ष निकलता है कि महंगाई दर में कमी आने के बावजूद, आम आदमी को इसका फायदा महसूस नहीं हो रहा है। लेकिन अगर सरकार और रिजर्व बैंक सही नीतियां बनाते हैं, और लोगों की आय में वृद्धि होती है, तो महंगाई का फायदा सबको महसूस हो सकता है।

महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

क्वेश्चन नंबर 1. महंगाई को कैसे परिभाषित किया जा सकता है..?

उत्तर महंगाई एक आर्थिक स्थिति है जिसमें वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ती हैं और मुद्रा की क्रय शक्ति घटती है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें एक ही मात्रा में मुद्रा से कम वस्तुओं और सेवाओं को खरीदा जा सकता है।महंगाई के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि:-

question2. महंगाई बढ़ने के प्रमुख कारण क्या है..?

उत्तर *मुद्रा की अधिकता*: जब सरकार अधिक मुद्रा छापती है, तो मुद्रा की कीमत घटती है और वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ती हैं।-

*उत्पादन लागत में वृद्धि*: जब उत्पादन लागत बढ़ती है, तो उत्पादकों को अपनी कीमतें बढ़ानी पड़ती हैं ताकि वे अपने लाभ को बनाए रख सकें।-

*मांग में वृद्धि*: जब मांग बढ़ती है, तो उत्पादकों को अपनी कीमतें बढ़ानी पड़ती हैं ताकि वे अपनी आपूर्ति को पूरा कर सकें।-

*आपूर्ति में कमी*: जब आपूर्ति कम होती है, तो उत्पादकों को अपनी कीमतें बढ़ानी पड़ती हैं ताकि वे अपनी आपूर्ति को पूरा कर सकें।महंगाई के प्रभाव भी कई हो सकते हैं, जैसे कि:-

*क्रय शक्ति में कमी*: जब महंगाई बढ़ती है, तो लोगों की क्रय शक्ति घटती है और वे कम वस्तुओं और सेवाओं को खरीद सकते हैं।- *बचत में कमी*: जब महंगाई बढ़ती है, तो लोगों की बचत में कमी आती है और वे कम बचत कर पाते हैं।-

*निवेश में कमी*: जब महंगाई बढ़ती है, तो निवेशकों को अपने निवेश पर कम रिटर्न मिलता है और वे कम निवेश करते हैं।महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार और रिजर्व बैंक कई नीतियों का उपयोग करते हैं, जैसे कि:-

*मुद्रा नीति*: सरकार और रिजर्व बैंक मुद्रा की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए मुद्रा नीति का उपयोग करते हैं।-

*ब्याज दरें*: सरकार और रिजर्व बैंक ब्याज दरों को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दर नीति का उपयोग करते हैं।-

*कर नीति*: सरकार कर नीति का उपयोग करके महंगाई को नियंत्रित करने का प्रयास करती है।महंगाई एक जटिल आर्थिक स्थिति है जिसे नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। लेकिन सरकार और रिजर्व बैंक के प्रयासों से महंगाई को नियंत्रित किया जा सकता है और आर्थिक स्थिरता को बनाए रखा जा सकता है।

क्वेश्चन 3. महंगाई घटना या बढ़ाने का अनुमान कैसे लगाया जाता है?

उत्तर -महंगाई घटने या बढ़ाने का अनुमान लगाने के लिए कई तरीके और संकेतक उपयोग किए जाते हैं। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण तरीके और संकेतक दिए गए हैं:*महंगाई के संकेतक:*

1. *उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI)*: यह एक महत्वपूर्ण संकेतक है जो महंगाई को मापता है। यह विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों को मापता है और उनकी औसत कीमत को दर्शाता है।

2. *थोक मूल्य सूचकांक (WPI)*: यह एक अन्य महत्वपूर्ण संकेतक है जो महंगाई को मापता है। यह विभिन्न वस्तुओं की थोक कीमतों को मापता है और उनकी औसत कीमत को दर्शाता है।

3. *जीडीपी डिफ्लेटर*: यह एक संकेतक है जो महंगाई को मापता है और यह देश की जीडीपी को मापता है।

4. *मुद्रा आपूर्ति*: यह एक संकेतक है जो महंगाई को मापता है और यह देश की मुद्रा आपूर्ति को मापता है।

*महंगाई के अनुमान लगाने के तरीके:*

1. *आर्थिक मॉडल*: अर्थशास्त्री विभिन्न आर्थिक मॉडलों का उपयोग करके महंगाई का अनुमान लगाते हैं। ये मॉडल विभिन्न आर्थिक चरों को ध्यान में रखते हैं और उनका विश्लेषण करते हैं।

2. *सांख्यिकीय विश्लेषण*: अर्थशास्त्री सांख्यिकीय विश्लेषण का उपयोग करके महंगाई का अनुमान लगाते हैं। वे विभिन्न आर्थिक चरों का विश्लेषण करते हैं और उनका संबंध महंगाई से जोड़ते हैं।

3. *विशेषज्ञों की राय*: अर्थशास्त्री विशेषज्ञों की राय का उपयोग करके महंगाई का अनुमान लगाते हैं। वे विभिन्न विशेषज्ञों से बात करते हैं और उनकी राय को ध्यान में रखते हैं।

4. *बाजार के रुझान*: अर्थशास्त्री बाजार के रुझानों का उपयोग करके महंगाई का अनुमान लगाते हैं। वे विभिन्न बाजारों का विश्लेषण करते हैं और उनका संबंध महंगाई से जोड़ते हैं।

*महंगाई के अनुमान लगाने में चुनौतियाँ:*

1. *आर्थिक अनिश्चितता*: महंगाई का अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है क्योंकि आर्थिक अनिश्चितता होती है।

2. *आंकड़ों की कमी*: महंगाई का अनुमान लगाने के लिए पर्याप्त आंकड़े नहीं हो सकते हैं।

3. *आर्थिक चरों की जटिलता*: महंगाई का अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है क्योंकि आर्थिक चर जटिल होते हैं।

4. *विशेषज्ञों की राय की विविधता*: महंगाई का अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है क्योंकि विशेषज्ञों की राय विविध होती है।महंगाई का अनुमान लगाना एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें विभिन्न तरीके और संकेतक उपयोग किए जाते हैं। अर्थशास्त्री विभिन्न आर्थिक मॉडलों, सांख्यिकीय विश्लेषण, विशेषज्ञों की राय और बाजार के रुझानों का उपयोग करके महंगाई का अनुमान लगाते हैं। लेकिन महंगाई का अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है क्योंकि आर्थिक अनिश्चितता, आंकड़ों की कमी, आर्थिक चरों की जटिलता और विशेषज्ञों की राय की विविधता होती है।

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जुलाई | 2025 – आर्थिक फंडा

31 Jul 2025 — मासिक आर्काइव: जुलाई, 2025 · “जिंदगी की जीवन शैली मे स्वाद के मायने”. 03/10/2025 · निवेशकों को कमाई कराने के मामले में शेयर मार्केट से आगे है सोना। 03/10/2025 · आर्थिक फंडा ब्लॉग की लोकप्रिय पोस्ट। 03 …

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10/06/2025 – आर्थिक फंडा

10 Jun 2025 — भविष्य को ध्यान में रखें। अपने फाइनेंशियल लक्ष्य को लिखें। रिकरिंग डिपॉजिट शुरू करें। सोच समझ कर लोन ले; बड़े खर्च सोच समझ कर करें। प्रॉपर्टी बनाने पर विचार करें।

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Fashion | आर्थिक फंडा | पेज 2

आर्थिक फंडा ब्लॉग की लोकप्रिय पोस्ट। 03/10 … Arthikfunda is your news, entertainment, music fashion website. We …

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इन्वेस्टमेंट टिप्स – आर्थिक फंडा

आर्थिक फंडा ब्लॉग —“छोटी-छोटी और बेहतरीन निवेश सलाह” … kedar@arthikfunda.com · अपनी बिजनेस स्किल्स को कैसे डेवलप करें..? भारतीय …

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भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व अर्थव्यवस्था में बदलाव इंश्योरेंस लोन शेयर मार्केट

… भी काफी शौक है। मेरे दो ब्लॉग है जिनके लिए मैं आर्टिकल लिखता हूं और मैं फुल टाइम कंटेंट क्रिएटर हूं। ब्लॉग — 1. प्रेरणा डायरी ( ब्लॉग ) prernadayari.com (blogger ) 2. आर्थिक फंडा (ब्लॉग ) arthikfunda …

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Reasons to Choose the New Generation Water … – आर्थिक फंडा

मेरे ब्लॉग — 1. प्रेरणा डायरी ( ब्लॉग ) prernadayari.com (blogger ) 2. आर्थिक फंडा (ब्लॉग ) arthikfunda.com …

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बिहारी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता – आर्थिकफंडा.कॉम

11 Feb 2025 — अगर रोजगार जल्दी मिल जाता है, तो नौकरी मिलने के 6 महीने बाद। चुकौती के तरीके: … वर्डप्रेस (WordPress.com) पर एक स्वतंत्र वेबसाइट या ब्लॉग बनाएँ .

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पैसे बचाने के स्मार्ट तरीके जिन्हें जानकर आप चौंक उठेंगे..। – आर्थिकफंडा.कॉम

22 Jun 2025 — मेरे दो ब्लॉग है जिनके लिए मैं आर्टिकल लिखता हूं और मैं फुल टाइम कंटेंट क्रिएटर हूं। मेरे ब्लॉग — 1. प्रेरणा डायरी ( ब्लॉग ) prernadayari.com (blogger ) 2. आर्थिक फंडा (ब्लॉग ) arthikfunda …

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भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व अर्थव्यवस्था में बदलाव इंश्योरेंस लोन शेयर मार्केट

Business, भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व अर्थव्यवस्था में बदलाव इंश्योरेंस लोन शेयर मार्केट•द्वारा Arthikfunda•पोस्ट किया गया 06/06/2025•0 टिप्पणियाँ. मुख्य नेविगेशन पर जाएंसामग्री पर जाएंफुटर छोड़ना आर्थिक फंडा ब्लॉग — निवेश की …

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05 | जून | 2025 – आर्थिक फंडा

दैनिक आर्काइव: जून 5, 2025. जारी है ट्रंप का ट्रेड वार.. स्टील अल्युमिनियम पर टैरीफ 50% तक बढ़ाया..! Arthikfunda – 05/06/2025 0. दोस्तों नमस्कार। आर्थिक फंडा ब्लॉग में आप सभी पाठकों का स्वागत है।

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मार्च 2025 – आर्थिक फंडा

29 Mar 2025 — ऐसे ही करियरऔर जनरल नॉलेजसे जुड़े ब्लॉगस पढ़ने के लिए आर्थिक फंडा के साथ बने रहे। arthikfunda.com— मतलब “बेहतरीन निवेश सलाह“. ब्लॉग नेम — आर्थिकफंडा.कॉम.

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चीन में क्रिप्टो करेंसी बैन..! क्या हो सकता है चीनी मकसद..? – आर्थिकफंडा …

मेरे ब्लॉग — 1. प्रेरणा डायरी ( ब्लॉग ) prernadayari.com (blogger ) 2. आर्थिक फंडा (ब्लॉग ) arthikfunda.com …

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श्रेणी: Design – आर्थिकफंडा.कॉम

… Arthikfunda•पोस्ट किया गया 19/03/2025•0 टिप्पणियाँ … After gathering ourselves and our packs,… और अधिक जानें. Posts pagination. 1 2 3 अगला पृष्ठ. आर्थिक फंडा.कॉम के लोकप्रिय पोस्ट.

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अगस्त | 2025

21 Aug 2025 — मासिक आर्काइव: अगस्त, 2025 · शुरू हुआ निशुल्क AI प्रोग्राम, छात्रों का बढ़ेगा कौशल 21/08/2025 0 · kedar@arthikfunda.com 20/08/2025 0 · अपनी बिजनेस स्किल्स को कैसे डेवलप करें..? 20/ …

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श्रेणी: Technology – आर्थिकफंडा.कॉम

Technology•द्वारा Arthikfunda•पोस्ट किया गया 19/03/2025•0 टिप्पणियाँ … After gathering ourselves and our packs,… और अधिक जानें. आर्थिक फंडा.कॉम के लोकप्रिय पोस्ट.

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श्रेणी: Racing – आर्थिकफंडा.कॉम

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Video | आर्थिक फंडा

पासवर्ड मैनेज करने के 4 सबसे बेहतरीन और उपयोगी एप आजमाए..। 06/10/2025 · ओपन एआई (AI) ने लांच किया “सोरा-2”, वीडिओ जनरेशन फील्ड में होगी क्रांति। 06/10/2025 · आर्थिकफंडा arthikfunda.com. 05/10/2025 …

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Everyone Should Travel for Their Favorite Foods | आर्थिक फंडा

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Music | आर्थिक फंडा

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The 26 Min Season Review by Mike Mayers is Now Online! | आर्थिक फंडा

… भी काफी शौक है। मेरे दो ब्लॉग है जिनके लिए मैं आर्टिकल लिखता हूं और मैं फुल टाइम कंटेंट क्रिएटर हूं। मेरे ब्लॉग — 1. प्रेरणा डायरी ( ब्लॉग ) prernadayari.com (blogger ) 2. आर्थिक फंडा (ब्लॉग ) arthikfunda …

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10/06/2025 – आर्थिकफंडा.कॉम

10 Jun 2025 — … Arthikfunda•पोस्ट किया गया 10/06/2025•0 टिप्पणियाँ. आरबीआई ने पिछले हफ्ते एलटीवी रेशों बढ़ाने सहित गोल्ड लोन से जुड़े आठ नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों… और अधिक जानें. आर्थिक फंडा.कॉम के लोकप्रिय …

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Sport – आर्थिक फंडा

We were exhausted after a long day of travel, so we headed back to the hotel and crashed. I had low expectations about Sofia as a city, but after the walking …

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श्रेणी: Photography – आर्थिकफंडा.कॉम

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Architecture | आर्थिक फंडा

Radio Air Time Marketing: A New Strategy for the Economy · Architecture … Arthikfunda is your news, entertainment, music fashion website. We provide …

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Street Fashion | आर्थिक फंडा

6 माह से 1 वर्ष के अंदर कर्ज से बाहर निकालने की प्रभावी तरीके। 02/10/2025 · शुरू हुआ निशुल्क AI प्रोग्राम, छात्रों का बढ़ेगा कौशल. 21/08/2025 · kedar@arthikfunda.com. 20/08/2025 · अपनी बिजनेस स्किल्स को कैसे …

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Vogue | आर्थिक फंडा

Radio Air Time Marketing: A New Strategy for the Economy · Kedar Lal – 19 … Arthikfunda is your news, entertainment, music fashion website. We provide …

आर्थिक फंडा (ब्लॉग )

छोटी छोटी और बेहतरीन निवेश सलाह। पैसे बचाने और पैसे कमाने की उपयोगी उपाय। …

होम ब्लॉग पेज 20. Taina Blue Retreat is a Converted Tower on … आर्थिकफंडा arthikfunda.com. 05/10/2025. 05/10/2025. वैश्विक …

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Reviews – आर्थिकफंडा.कॉम

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Gadgets – आर्थिक फंडा

This was an easy city to navigate, and it was a beautiful city – despite its ugly, staunch and stolid communist-built surrounds. Sofia has a very average facade …

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We wandered the site with other tourists – आर्थिक फंडा

19 Mar 2025 — होम ब्लॉग पेज 14. Oven Baked Yummy Pulled Pork for … Arthikfunda is your news, entertainment, music fashion website. We …

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श्रेणी: Interiors – आर्थिकफंडा.कॉम

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Vajna Kalan, Hindaun, Rajasthan

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आज के दौर में हर छात्र को फाइनेंस की समझ होनी ही चाहिए..।

दोस्तों मेरी उम्र 45 साल है इससे कुछ महीने और ज्यादा ही होगी। यकीन मानिए जब तक मैं ग्रेजुएशन में था मुझे यह पता भी नहीं था कि फाइनेंस पद ऋण लेकर लेकर पढ़ाई भी की जाती है। यानी अगर आपके पास पैसे नहीं है तो आप बैंक से पैसा लेकर अपने अध्ययन पूर्ण कर सकते हैं।आप देश यहाँ तक की विदेश के किसी अच्छे नामी इंस्टिट्यूट या यूनिवर्सिटी में अध्ययन करना चाहते हैं, और आपके पास पैसे नहीं है तो आप फाइनेंस पर पैसे लेकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं। मैंने 1999 अपना ग्रेजुएशन कंप्लीट किया था। उसे जमाने में यह सुविधा थी ही नहीं और अगर थी तो हम जैसे स्टूडेंट को इसकी भनक तक नहीं थी। यह बात तो मैंने आपको बताएं मेरे जमाने की लेकिन अब आधुनिक दौर की बात कर लेते हैं बस से छात्र ने केवल देश बल्कि विदेशों में फाइनेंस के जरिए अपनी अध्ययन कर रहे। मैं अपनी बात को रिजर्व बैंक के एक आंकड़े द्वारा साबित करता हूं। ज्यादा पुरानी बात नहीं है हाल ही में जनवरी 2024 में खुद रिजर्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि एजुकेशन लोन 15 फ़ीसदी बढ़ गए हैं।. यह बात साबित करती है हमारे छात्र फाइनेंस फाइनेंस /वित्तीय/ आर्थिक सुविधाओं को समझ जाए। एक और आंकड़ा में आपके सामने पेश करना चाहता हूं जो यह बताता है कि विदेश में पढ़ने वाले छात्रों ने जो लोन ले रखे हैं उनका कुल बकाया 90000 करोड रुपए से ऊपर निकल गया है। यानी पैसे नहीं होने के बावजूद योग्य छात्र विदेश में जाकर अध्ययन कर रहे हैं और इसके लिए वह फाइनेंस की सुविधा का लाभ उठाते हैं।

आज के दौर में छात्रों को मिल रही फाइनेंस सुविधा का लाभ हमारे युवा पीढ़ी को मिला है।. मैं आपको बता दूं कि वित्त वर्ष वित्त वर्ष -2021 तक 4.07 लाख खातों के जरिए करीब 11448 करोड रुपए के एजुकेशन लोन दिए गए। हाल ही में एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2024 तक यह संख्या बढ़कर एक पॉइंट 17 लाख करोड रुपए हो गई। लगभग 20 लाख छात्रों ने बैंकों से कर्ज लेने की इस सुविधा का लाभ उठाया लेकिन यह सिक्के का सिर्फ एक पहलू है। आप सोच रहे होंगे कि मैं कहना क्या चाहता हूं..? दरअसल बात यह है कि एजुकेशन क्षेत्र के लोन सेगमेंट में जितनी बढ़ोतरी हुई है उतनी ही प्रतिशत में डिफॉल्टरों की संख्या बड़ी है। एजुकेशन लोन की डिफॉल्ट दर 7 से 8% तक पहुंच गई है अब यह बैंकों और गैर बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। बड़ी तादाद में एजुकेशन लोन अकाउंट एनपीए की श्रेणी में आ गए हैं यानी तेज समय पर उनकी वसूली नहीं हो पा रही है।.

इधर अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने बकाया स्टूडेंट लोन की वसूली प्रक्रिया सख्त कर दी है। अब यदि लोन का भुगतान नहीं किया जाता है तो उसकी योजना वेतन और टैक्स रिफंड जप्त कर किया जा सकते हैं। लगभग 53 लाख लोग जिन्होंने स्टूडेंट लोन की किस्त जमा करने में चूक कि, उन्हें इसका सामना करना पड़ सकता है। पहले से मुश्किल जॉब मार्केट और ऊंची महंगाई के बीच कॉरपोरेट जगत में कदम रखने वाले अमेरिकी युवा स्टूडेंट लोन चुकाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। नतीजा यह हुआ की पहली बार जैन जी लोन चुकाने में सफल रहे और अन्य के मुकाबले उनके क्रेडिट स्कूल में बड़ी गिरावट देखी गई है। क्रेडिट स्कोर एक गणितीय पैमाना है जो बैंकों और एनबीएफसी को यह तय करने में मदद करता है कि जो व्यक्ति लोन लेना चाह रहा है वह चुकाने में कितना सक्षम है। क्रेडिट स्कोर 300 से 850 तक होता है। याद रखें कि कम स्कोर कर लोन होम लोन और यहां तक की गाड़ियों का बीमा करना भी ज्यादा जटिल या महंगा बना देता है।

जरा सोचिए अगर कल भारत में भी चेक बैंक अमेरिका की तरह आपकी नियुक्ति से संपर्क करने का फैसला करें तो क्या होगा..? यह हमारे ऑफिस में हमारी प्रतिष्ठा को खतरे में डाल देगा जहां हम अच्छा रिकॉर्ड बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

मैनेजमेंट टिप्स

विदेश में पढ़ाई का सपना तभी सफल होता है जब आपकी फाइनेंस/ वित्तीय समझ मजबूत हो। नीचे मैं तुम्हें स्टेप-बाय-स्टेप तरीका बता रहा हूं जिससे तुम अपनी वित्तीय समझ (Financial Literacy) विकसित कर सकते हो —

पढ़ाई स्कॉलरशिप और खर्चों की बेहतर योजना बनाएं

पहला चरण: मूलभूत समझ बनाओ (Financial Basics)1. बजट बनाना सीखो —हर महीने की आय (pocket money / part-time earning) और खर्च (fees, food, transport, etc.) को लिखो।➤ App जैसे Walnut, Money Manager, or Notion templates का उपयोग करो।2. बचत और निवेश का फर्क समझो —बचत = सुरक्षित रखना,निवेश = बढ़ाना।दोनों ज़रूरी हैं।3. बैंकिंग और अकाउंट सिस्टम समझो —कैसे बैंक खाता, अंतरराष्ट्रीय ट्रांजेक्शन, क्रेडिट कार्ड, और मुद्रा विनिमय (Forex) काम करते हैं।—? दूसरा चरण: व्यावहारिक ज्ञान (Practical Knowledge)1. स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन के प्रकार जानो —– भारत सरकार की योजनाएँ: Vidya Lakshmi Portal, SBI Global Ed-Vantage– विदेश विश्वविद्यालयों की Merit/Need-based scholarships2. करेंसी कन्वर्जन और खर्च का अनुमान लगाना सीखो —कौन सा देश महंगा है, वहाँ रहना, खाना, बीमा, और ट्रांसपोर्ट का औसत खर्च कितना होता है — ये सब रिसर्च करो।3. छोटी इनकम के स्रोत समझो —Freelancing, online tutoring, या campus jobs से अतिरिक्त आमदनी कैसे बढ़ा सकते हो।—? तीसरा चरण: पढ़ाई और प्रैक्टिस1. किताबें पढ़ो:“Rich Dad Poor Dad” – Robert Kiyosaki“The Psychology of Money” – Morgan Housel“Let’s Talk Money” – Monika Halan (भारतीय दृष्टिकोण से)2. यूट्यूब चैनल्स:Pranjal Kamra, CA Rachana Ranade, Ankur Warikoo3. ऑनलाइन कोर्स (Free/Paid):Coursera या edX पर “Personal Finance for Students”Khan Academy के “Money & Finance” tutorials—? अंत में: एक आदत बना लोहर हफ्ते 15–20 मिनट अपने खर्चों और लक्ष्यों की समीक्षा करो।छोटे-छोटे वित्तीय फैसलों को खुद लेने की कोशिश करो।यही आदतें आगे चलकर तुम्हें स्वतंत्र और समझदार छात्र बनाती हैं।—अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारे लिए? एक “Student Finance Learning Plan” (30-दिन का रूटीन चार्ट) भी बना सकता हूं —जिससे तुम रोज थोड़ा-थोड़ा सीख सको।क्या मैं वो चार्ट तैयार कर दूं?

एजुकेशन लोन उच्च शिक्षा तक हमारी पहुंच बढ़ाते हैं और बेहतर नौकरी और ऊंची कमाई की संभावनाओं को भी बढ़ाते हैं लेकिन ठोस पेमेंट प्लेन ने होने पर क्रेडिट स्कोर खराब हो सकता है इससे घर खरीदने या परिवार शुरू करने जैसे जीवन के कई बड़े फैसले प्रभावित हो सकते हैं।इससे आपको तनाव भी उत्पन्न हो सकता है। इसलिए छात्र जीवन से ही फाइनेंस यानी खर्च, बचत, कर्ज, और निवेश की अच्छी समझ विकसित करें। आज हर स्टूडेंट को अपने घरेलू बचत के साथ अपना बजट बनाना खर्चों का हिसाब किताब रखना आर्थिक गतिविधियों तथा अर्थव्यवस्था से संबंधित मार्केट में आने वाली नई टेक्नालॉजियों पर नजर रखनी चाहिए। हमारे छात्रों के लिए आज के दौर में यह स्किल बहुत जरूरी है।

और घटेगी भारत में ब्याज दरें, आरबीआई ने दिए संकेत…

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महंगाई एक ऐसा आर्थिक वित्तीय और फाइनेंशियल कारक है जो हर इंसान को प्रभावित करता है। पिछले कुछ महीने पहले ही रिजर्व बैंक ने रेपो रेट एवं ब्याज दरों में कटौती की थी और एक बार फिर ऐसी ही कटौती की संभावना बन रही है। लेकिन हम चर्चा इस मुद्दे पर करेंगे की अगर रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कटौती की तो क्या होगा..? इसके क्या आर्थिक और वित्तीय प्रभाव पड़ेंगे..? आज का यह आर्टिकल आपके इन्हीं सवाल और उलझन को दूर करेगा और महंगाई के बारे में आपको मौजूदा स्थितियों से अवगत कराएगा। तो लिए बिना वक्त की बर्बादी किए हुए हम अपने आर्टिकल में आगे बढ़ते हैं, और इस चीज को समझते हैं।

1. महंगाई में बड़ी गिरावट दर्ज :

महंगाई से राहत मिल चुकी है, जारी हुए नये आंकड़ों को देखकर तो यही लगता है, कि महंगाई काफी निम्र्तर स्तर पर आ गई है। जून के महीने समेत पिछले कुछ महीनो में रिटेल महंगाई सिर्फ 2.1% प्रतिशत रही है. जब किसी एक वित्तीय क्षेत्र में बदलाव होता है तो उसके असर बाकी क्षेत्रों पर भी नजर आते हैं। अब लोन कि किस्ते और भी घट सकती हैं। कुशवाहा पूर्वी रिजर्व बैंक ने रेपो रेट और और ब्याज दरों में कमी की थी उसके बाद एक बार फिर रिजर्व बैंक में संकेत दिए हैं कि वह ब्याज दरों में और भी कटौती कर सकती है। यह आर्थिक, वित्तीय,औफाइनेंशियल,गतिविधियों के लिए खुशखबरी है। रिजर्व बैंक ने ऐसे संकेत दिए हैं कि अगस्त में एक बार फिर से रेपो रेट घटाई घटाई जा सकती है। R.B.I के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एक संवाददाता सम्मेलन में मंगलवार को कहा कि तटस्थ नीति का यह मतलब नहीं है कि नीतिगत दर नहीं घटाई जा सकती। हाल ही में रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी ) की बैठक हुई थी। एमपीसी जरूरत पड़ने पर इसमें और कटौती कर सकती है।

2 माह में 2 बार घटी रेपो रेट :

पिछले माह june मे ही रेपो रेट 0.50% से घटाकर 5.50% कर दी थी। फरवरी से अब तक इसमें एक प्रतिशत की कटौती हो चुकी है. रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट एवं ब्याज दरों में कटौती एक महत्वपूर्ण आर्थिक और फाइनेंशियल घटनाक्रम माना जाता है। क्योंकि इस फैसले के बाद इन बैंक अपने हिसाब किताब के फैसलों पर निर्णय लेती है। बैंक इसी रेट के हिसाब से लोन की दरें भी तय करते हैं।

रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने समझाया कि तटस्थ नीति का मतलब है की जरूरत पड़ने पर कोई भी निर्णय लिया जा सकता है। नीतिगत दरें बढ़ाई जा सकती हैं..। और घटाई भी जा सकती हैं..। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक अप्रैल जून तिमाही में महंगाई के आंकड़ों का विश्लेषण करेगी इसके बाद ही आगे के अनुमान और उसके हिसाब से रेट एडजस्टमेंट पर फैसला किया जाएगा।

रिजर्व बैंक के अनुमान से नीचे आई महंगाई :

महंगाई रिजर्व बैंक की अनुमान से से भी नीचे आई है और इसके और भी कम होने के आसार हैं.

1. केंद्रीय बैंक ने 2025 26 में रिटेल महंगाई और स्तन 3.7% रहने का अनुमान लगाया था लेकिन जून में यह 2 % प्रतिशत के करीब आ गई।

2. अप्रैल जून में औसत रिटेल महंगाई घटकर 2.7 प्रतिशत रह गई यह भी काम है आरबीआई का अंदाजा था कि इस दौरान महंगाई 2.9% रहेगी. यानी रिजर्व बैंक ने जो अनुमान लगाए थे महंगाई उनसे भी कम रही है।

जुलाई-अगस्त में 1% प्रतिशत तक रह सकती है रिटेल महंगाई :

महंगाई में गिरावट आना में केवल भारत देश बल्कि जनता के लिए भी काफी राहत भरी खबर है। पिछले कुछ वर्षों में लोग महंगाई से काफी परेशान रहे हैं। ऐसे में काफी राहत भरी एक गुड न्यूज़ है।

अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी सिटी ने कहा है कि भारत में हालात ऐसे हैं कि जुलाई-अगस्त के महीने में रिटेल महंगाई 1.1 % प्रतिशत के रिकार्ड निचले स्तर तक आ गई है। सिटी के मुताबिक 1 अप्रैल से शुरू वित्त वर्ष 2025 26 में औसत महंगाई दर घटकर 3.2 प्रतिशत तक रह सकती है। यह 1990 के बाद अब तक की सबसे कम रिटेल महंगाई दर होगी। अर्थशास्त्रियों को यह आंकड़े प्रेरित करने वाले हैं। लोगों के लिए भी एक मानसून के दिनों में राहत भरी खबर है।

रेपो रेट और ब्याज दर घटाने की जरूरत क्यों है..?

1. जून में कारों की बिक्री 18 महीना के निचले स्तर पर आ गई।

2. अप्रैल जून में टॉप सात शहरों में घरों की बिक्री 20% घट गई. अगर रेपो रेट एवं ब्याज दरें घटे, तो आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है।

3. जून में रत्न और गहनों का निर्यात 14 पॉइंट 25 प्रतिशत घट गया। और हीरो के आयात में भी 7% से ज्यादा की गिरावट आई। रत्न जड़ित आभूषणों का भारत बड़े पैमाने पर विदेश में निर्यात करता है।

ग्रोथ घटी तो रेपो रेट और घटेगा :

एमपीसी अगस्त की बैठक में नीतिगत ब्याज दरों पर फैसले से पहले दो तरफा विश्लेषण किया जाएगा। न सिर्फ भविष्य में महंगाई पर बल्कि देश की आर्थिक विकास दर पर भी गौर किया जाएगा यह अगर घटी, तो दरें भी घटाई जा सकती हैं।

भारत का विदेशी व्यापार,यानी आयात और निर्यात, देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत लगभग 190 देशों को 7,500 से अधिक वस्तुओं का निर्यात करता है और 140 देशों से लगभग 6,000 वस्तुओं का आयात करता है. वित्त वर्ष 2024-25 में, भारत का कुल निर्यात 820 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि आयात 915 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, Drishti IAS के अनुसार. 

भारत के विदेशी व्यापार की मुख्य बातें:

  • निर्यात:भारत के मुख्य निर्यात में पेट्रोलियम उत्पाद, रत्न और आभूषण, दवाएं, इंजीनियरिंग सामान, रसायन, और कृषि उत्पाद शामिल हैं. 
  • आयात:भारत के मुख्य आयात में पेट्रोलियम, कच्चा माल, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, और कीमती धातुएं शामिल हैं. 
  • व्यापार भागीदार:भारत के मुख्य व्यापारिक भागीदार चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, और सऊदी अरब हैं. 
  • व्यापार घाटा:भारत का व्यापार घाटा, यानी आयात और निर्यात के बीच का अंतर, 2024-25 में 94 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहने का अनुमान है Drishti IAS के अनुसार. 
  • सेवाओं में व्यापार:भारत सेवाओं के निर्यात में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसमें आईटी, पर्यटन, और वित्तीय सेवाएं शामिल हैं. 

भारत सरकार के प्रयास:

भारत सरकार निर्यात को बढ़ावा देने और व्यापार को सुगम बनाने के लिए कई उपाय कर रही है, जिनमें शामिल हैं: 

  • विदेश व्यापार नीति 2023-28:यह नीति निर्यात को बढ़ावा देने और व्यापारिक अवसरों को बढ़ाने के लिए बनाई गई है.
  • जिला-स्तरीय निर्यात केंद्र:सरकार जिलों में निर्यात क्षमता वाले उत्पादों की पहचान करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है.
  • प्रधानमंत्री गति शक्ति:यह एक एकीकृत बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रम है जो व्यापार को बढ़ावा देने में मदद करता है.
  • मेक इन इंडिया:यह पहल भारत में विनिर्माण को बढ़ावा देने और निर्यात को बढ़ाने पर केंद्रित है.

वैश्विक व्यापार में भारत की भूमिका:

भारत वैश्विक व्यापार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। 2023 तक, भारत का निर्यात वैश्विक बाजार का 10.85% था, जो 2014 में 5.89% से अधिक था PIB के अनुसार. भारत सरकार का लक्ष्य 2027-28 तक लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर के व्यापारिक निर्यात का है. 

निष्कर्ष:

भारत का विदेशी व्यापार एक गतिशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जिसमें सरकार और निजी क्षेत्र दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और निर्यात को बढ़ावा देने के प्रयासों के साथ, भारत वैश्विक व्यापार में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने की राह पर है. 

महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

क्वेश्चन 1. भारत का सर्वाधिक विदेशी व्यापार किस देश के साथ होता है..?

कर दाताओं की सुरक्षा की गारंटी कब लेगी सरकार..? क्या यह जरुरी नहीं..?

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विषय प्रवेश

हमारे देश के संविधान के अनुसार प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनके जान माल की हिफाजत करना हमारे देश के कानून और संविधान का कर्तव्य है, लेकिन जब सरकार सुरक्षा देने के नाम पर आम नागरिक को बिल थामने लगे तो क्या किया जाए..? उस पर भी यदि वह नागरिक नियमित रूप से इनकम टैक्स अदा करता आ रहा हो, जिसके लिए बार-बार कहा जाता है कि सरकार करदाताओं के टैक्स से चलती है। हाल ही में ऐसा एक वाक्य राजस्थान की राजधानी जयपुर में सामने आया जब एक बिजनेसमैन से एक गैंगस्टर ने दो करोड़ की रंगदारी मांगी और पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई।. बिजनेसमैन को जो सुरक्षा मिली उसके आवाज में क्षेत्र लख रुपए का बिल पुलिस द्वारा व्यापारी को थमा दिया गया। इसकी कोई जानकारी उसे व्यापारी को नहीं दी गई थी। अब बताइए कि क्या अपने मौलिक अधिकारों के लिए भी करदाताओं को बिल भरना होगा..? आखिर देश में करदाताओं को क्या सुविधा मिल रही है..? इस सवाल का जवाब कौन देगा.? शायद ही किसी के पास इस सवाल का जवाब हो। सरकार यह अपेक्षा तो प्रत्येक करता था से करती है कि वह ने केवल अपना टैक्स जमा कारण बल्कि पूरी ईमानदारी से टैक्स भी भारी और बदले में सरकार से किसी भी प्रकार की सुविधा की उम्मीद या अपेक्षा ने करें।

सरकार को करदाताओं से ताकत प्राप्त होती आजकल हम इस बात को लेकर पहले नहीं समा रहे हैं और अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं कि भारत पहले दुनिया की पांचवी बड़ी इकोनॉमी बना और अब जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है। हम जापान को पछाड़ कर दुनिया की सबसे तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाले हैं। देश को यह ताकत कहां से मिली..? मैं आपको बताता हूं कि हमारे देश और सरकारों को यह ताकत करदाताओं से प्राप्त होती है। करदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार दिन-रात प्रयासरत रहती है। देश में पैसा लगा रहे निवेदक और करदाता सरकार को आर्थिक शक्ति देते हैं। देश की कानून व्यवस्था अच्छी हो तभी बिजनेसमैन और निवेशक तथा व्यापारी अपने आप को सुरक्षित महसूस करते हैं लेकिन क्या समय पर इनकम टैक्स देने वालों को सुरक्षा की गारंटी सरकार की तरफ से मिल रही है..? इस सवाल का जवाब ढूंढना बड़ा मुश्किल है. 140 करोड़ से ऊपर की आबादी वाले भारत में 3 करोड लोग इनकम टैक्स अदा करते हैं। हालांकि गुड्स एंड सर्विस टैक्स जीएसटी लागू होने के बाद अप्रत्यक्ष रूप से प्रत्येक नागरिक टैक्स के दायरे में आ गया है। अर्थात में कह सकता हूं कि देश का हर नागरिक किसी न किसी रूप में सरकार को टैक्स अदा कर रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि कोई कम टैक्स दे रहा है..तो कोई ज्यादा।

सरकार को कितना टैक्स मिलता है इसका जवाब वित्त मंत्री से अच्छा और कौन दे सकता है.? भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मैं पिछले दिनों संसद में एक बयान दिया था उनके अनुसार वित्त वर्ष 2024 25 में कर के रूप में 24 लाख करोड रुपए प्राप्त हुए जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 2.5 लाख करोड रुपए अधिक हैं टैक्स रिवेन्यू लगातार बढ़ रहा है। सरकार और देश के अधिकतर खर्च इस टैक्स से ही चलते हैं। वित्त वर्ष 2024 25 के दौरान केंद्र सरकार ने जीएसटी से बहुत बड़ा राजस्व प्राप्त किया। वित्त मंत्री ने फरवरी 2025 में संसद में पीस अपने बजट भाषण में बताया था कि वित्त वर्ष 2023 24 में जीएसटी कलेक्शन 18 लाख करोड़ से अधिक रहा। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12% अधिक था।

सरकार लगातार एडवांस टैक्स और टैक्स भरने को लेकर एक अभियान चलाती है और टैक्स चोरी करने वालों को आपराधिक श्रेणी में रखा जाता है सरकार कि करदाताओं से हमेशा यही अपेक्षा होती है कि वह टैक्स लॉ का पालन करें, अपना रिकॉर्ड सही रखें और समय पर टैक्स अदा करें। लेकिन क्या सरकार की ऐसी सोच है कि इसके बदले में कार्ड था कुछ नहीं मांगे..? और अगर गैंगस्टर या गुंडे धमकी दे रहे हैं तो अपनी सुरक्षा के बदले में भुगतान के लिए तैयार रहें..?

कर दाताओं की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ने केवल उनके व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करती है बल्कि समग्र टैक्स प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता भी सुनिश्चित करती है। करदाताओं को डाटा चोरी या हैंगिंग धोखाधड़ी भ्रष्टाचार या अवैध तरीके से उत्पीड़न से बचाना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि कर डाटा को लगता है कि उसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अनुचित तरीके से परेशान कर रहा है तो उसे सशक्त शिकायत निवारण तंत्र का विकल्प मिलना चाहिए। करदाताओं को टैक्स फाइलिंग रिटर्न प्रोसेसिंग और टैक्स भुगतान से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता मिलनी चाहिए। जब यह सुविधा उसे प्राप्त नहीं होती हैं तो करदाताओं के अंदर एक असंतोष और अविश्वास उत्पन्न होता है। सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि करदाताओं की समस्याओं का समाधान समय पर और प्रभावित तरीके से हो। जब करदाताओं को यह विश्वास होता है कि उनकी व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित है और उनके साथ उचित व्यवहार किया जा रहा है तो वह अधिक तैयार रहते हैं और आत्मविश्वास के साथ अपनी टैक्स जिम्मेदारियां का पालन करते हैं। वैसे सरकार यह सुनिश्चित करती है कि करदाताओं के अधिकारों का सम्मान किया जाए और वह किसी भी प्रकार के अत्याचार या उत्पीड़न से सुरक्षित रहें।

करदाताओं की पैसों से सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन सुविधा मिलती हैं। सरकार के खर्चे चलते हैं, और विकास कार्यों को गति मिलती है। इसीलिए अधिकारियों को जनता के हित में कार्य करना चाहिए ने की सदैव वाह वाही लूटने के लिए अपनी पीठ थप थपानी चाहिए। संविधान में कानून एवं व्यवस्था को बनाए रखना पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी बताया गया है। प्रतीक नागरिक को सुरक्षा देना पुलिस की जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को अपराधियों से जान का खतरा है तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस का ही कर्तव्य है, न की सुरक्षा के नाम पर लाखों रुपए का बिल थमा देना। पुलिस प्रशासन के आल्हा अधिकारियों को ऐसे मामलों में स्वतह संज्ञान लेने की आवश्यकता है। आखिर सरकार ईमानदारी से टैक्स देने वालों के लिए कुछ विशेष सहूलियत क्यों नहीं निर्धारित करती है..? कम से कम जो बिजनेसमैन या व्यापारी गैंगस्टर या अपराधियों की नजर में हैं और जिन्हें रंगदारी के लिए धमकी मिल रही है उनकी सुरक्षा की गारंटी तो सरकार को लेनी ही चाहिए। सुरक्षा के नाम पर लंबा चौड़ा बिल नहीं थामना चाहिए। भले ही सरकार के पास टैक्स देने के बाद देश चलाने संबंधी कई बड़े काम होते हैं लेकिन सुरक्षा भी इन्हीं कामों में से एक बड़ा काम है। सरकार को चाहिए कि वह प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा का ख्याल रखें और करदाताओं पर विशेष ध्यान देते हुए सरकार एवं प्रशासन को उनके प्रति संवेदनशील भी होना चाहिए।

ब्लॉग – आर्थिक फंडा (ब्लॉग) arthikfunda.कॉम

चीफ एडिटर – केदार लाल ( K. L. Ligree / सिंह साब )

आर्थिक नीति – रेपो रेट में भारी कमी (50%), होम लोन और कार लोन होंगे सस्ते। विकास को मिलेगी गति।

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को अर्थव्यवस्था में वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए रेपो रेट में 50 आधार अंकों की बड़ी कटौती करके इसे 6% से 5.5% करने की घोषणा की है। 1 साल में लगातार तीसरी बार रेपो रेट में कटौती की गई है। रिजर्व बैंक की इस कदम से प्लाटिंग रेट पर कर्ज लेने वालों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस फैसले से एक करोड रुपए की लोन पर हर महा ब्याज के रूप में 3283 रुपए और सालाना 39396 की बचत होगी। दोस्तों रिजर्व बैंक द्वारा लिया गया यह एक ऐतिहासिक निर्णय है और आर्थिक जगत मैं इसके बड़े परिणाम देखने को मिल सकते हैं। इसीलिए आर्थिक फंडा ब्लॉग, arthikfunda.com कि आज के आर्टिकल में रिजर्व बैंक के इस बड़े आर्थिक फैसले की पूरी विवेचना करेंगे। और सबसे बड़ी बात यह समझने का प्रयास करेंगे कि आखिर आरबीआई के इस बड़े आर्थिक फैसले का देश के विभिन्न सेक्टरों पर क्या असर पड़ेगा..? इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए आज की पोस्टों को में कई भागों में विभाजित कर रहा हूं। ताकि यह आसानी से आपको समझ में आ सके। आज की इस आर्टिकल को हम निम्न बिंदुओं के तहत रीढ़ करेंगे —

आज के आर्टिकल में ( टेबल ऑफ़ कंटेंट )

  1. भूमिका।
  2. विकास दर 6.5% रहने का अनुमान।
  3. ब्याज दरों में डबल कटौती।
  4. सेंसेक्स में 747 अंक का उछाल।
  5. यह चार बातें आपकी जेब पर पूरा असर डालेंगी।
  6. किफायती घरों की बिक्री बढ़ेगी।
  7. लग्जरी घरों की बिक्री पीक पर।
  8. गोल्ड लोन शेयर चमके।
  9. 100000 के सोने पर 85000 का लोन मिलेगा।
  10. कंपनियों में तेजी।
  11. आरबीआई का फोकस जीडीपी बढ़ोतरी
  12. शेयर मार्केट के वह 5 सेक्टर जिन्हें सबसे ज्यादा लाभ होगा – – -रियल स्टेट – बैंकिंग – ऑटो सेक्टर -एफएमसी जी सेक्टर – -आईटी सेक्टर
  13. आगे क्या उम्मीद।
  14. क्या राय है एक्सपर्ट की।
  15. निष्कर्ष।
  16. संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

आरबीआई के गवर्नर ने सीआरआर मैं 100 आधार अंकों की कटौती की भी घोषणा की जो 6 सितंबर 4 अक्टूबर 1 नवंबर और 29 नवंबर से 25 आधार अंकों की चार बराबर किस्तों में प्रभावी होगी। जनसंख्यकि, डिजिटलीकारण और घरेलू मांग के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था निवेशकों के लिए अपार अवसर प्रदान कर रही है। रिजर्व बैंक की इस घोषणा का शेयर बाजार ने स्वागत किया है और सेंसेक्स में बड़ा उछाल देखा गया है। केंद्रीय बैंक के इस कदम से बैंकिंग सिस्टम में 2.5 लाख करोड रुपए आने की उम्मीद है। जिससे लिक्विडिटी बढ़ेगी और क्रेडिट फ्लो को सपोर्ट मिलेगा। काम नीति का डर से बैंक रेनू पर ब्याज दर में कमी आती है जिससे उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यवसायों के लिए भी उधार लेना आसान हो जाता है। जिसके परिणाम स्वरुप अर्थव्यवस्था में अधिक खपत एवं निवेश होता है और उच्च विकास सुनिश्चित होता है हालांकि कटौती का असर इस पर निर्भर करेगा कि बैंक किस हद तक ब्याज काम करता है।

विकास दर 6.5% रहने का अनुमान :

वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी विकास दर अनुमान को 6.5% पर स्थिर रखा गया है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक जीडीपी विकास दर वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में 6 पॉइंट 5% दूसरी तिमाही में 6.7 प्रतिशत तीसरी तिमाही में 6. 6% और चौथी तिमाही में 6.3% रह सकती है। आरबीआई के गवर्नर ने कहा कि इस साल फरवरी से अब तक रायपुर दर में लगातार 100 आधार अंकों की कटौती की गई है और इसलिए मौद्रिक नीति रुक को “अकोमोडेटिव” से बदलकर “न्यूट्रल” कर दिया गया है। इससे आरबीआई समग्र विकास मुद्रा स्पीति गतिशीलता पर कड़ी नजर रख सकेगा। कीमतों में हुई व्यापक आधार पर नरमी के बीच मुद्रा स्थिति दर अब घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई है। इसके साथ ही आरबीआई ने मुद्रा स्थिति डर के अपने अनुमान को भी 4% से घटकर 3.7% कर दिया है. वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी विकास दर इस अवसर पर 6.5%. पर स्थिर रखा गया है।

ब्याज दरों में डबल कटौती :

आरबीआई एमपीसी ने शुक्रवार को जहां रेपो रेट में उम्मीद से भी अधिक 0.5% की कटौतिकर इसे 6% से घटकर 5.5% कर दिया। आरबीआई ने मार्केट को सरप्राइज देते हुए क्रेडिट रिजर्व रेशों (CRR) वह भी 4% से घटकर 3% कर दिया। इससे बैंक सहित ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील सभी स्टॉक में जबरदस्त तेजी देखने को मिली।

सेंसेक्स 747 अंक उछला :

आरबीआई द्वारा की गई इन बाहरी रेट कट से होम लोन डिमांड बढ़ने के साथ मकान की बिक्री बढ़ सकती है इससे बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां के साथ रियल्टी स्टॉक 4% से अधिक उछाल गए वहीं लोन सस्ता होने से कर बाइक की बिक्री भी बढ़ाने की उम्मीद है। इससे ऑटो शेयर को भी बूस्ट मिलने की संभावना है।

ब्याज दरों में हुई इस डबल कटौती से निफ़्टी बैंक इंडेक्स अपने नए ऑल टाइम हाई ₹5695 के स्तर पहुंचने के बाद 1.47 प्रतिशत 56578 के स्तर पर बंद हुआ।

यह चार बातें आपकी जेब पर सीधा असर डालेंगी :

1. सीआरआर में 1% की कटौती यानी बैंक और छूट दे सकते हैं —

आरबीआई ने नगद आरक्षित अनुपात सीआरआर को 4% से घटकर 3% कर दिया है इससे बैंकों के पास 2.5 लाख करोड़ की अतिरिक्त नगदी एकत्रित होगी यह बैंक को होम लोन की ब्याज दरों को कम करने का विकल्प देता है।

2. रिटेल महंगाई आरबीआई के टायर से नीचे बनी रहेगी :

महंगाई आरबीआई के दायरे से नीचे आ चुकी है वित्त वर्ष 2025 26 के लिए रिटेल महंगाई 3.7% रहने का अनुमान है जो पहले 4% थी यह राहत खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नमी अंतर्राष्ट्रीय कमोडिटी प्राइस में गिरावट की वजह से आई है।

3. न्यूट्रल यानी रेट कट का चक्र थम सकता है :

आरबीआई ने अब नीति रोक अकोमोडेशन से बदलकर न्यूट्रल कर दिया है केंद्रीय बैंक के मुताबिक अब नीति के पास सीमित स्पेस है इसलिए हर कदम सोच समझ कर उठना होगा यानी रेपो रेट में कटौती का चक्र तेजी से समाप्त होने वाला है।

4. वैश्विक स्थिरता के बीच हमारी बैलेंस शीट बेहद मजबूत :

दुनिया में पूंजी फ्लोर को लेकर उतार चढ़ाव हैं लेकिन भारत में उजली तस्वीर है। इसकी वजह है संतुलंत बैलेंस शीट कॉर्पोरेट घरेलू बैंक सरकार और विदेशी क्षेत्र इन सभी मोचन पर स्थिरता बनी हुई है और निवेश के लिए एक नया माहौल तैयार हो रहा है।

किफायती घरों की बिक्री तेजी से बढ़ेगी :

रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में एक मस्त जीरो पॉइंट पांच प्रतिशत की कटौती कर इंडस्ट्री से लेकर आम कर्ज दाताओं को चौंका दिया है। रियल्टी और ऑटो सेक्टर को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है खास तौर पर के फायदे और मिड रेंज वाले घरों और कारों की बिक्री को ट्रिगर मिल सकता है। कोविद-19 के बाद से देश भर में महानगरों से लेकर टियर 2 शहरों में अफॉर्डेबल मकान की बिक्री में सुस्ती देखी गई है। अनार के आंकड़ों से पता चलता है कि बड़े शहरों में के फायदे आवास की बिक्री का हिस्सा 2019 में 38% से गिरकर 2024 में 18% ही रह गया था। इस दौरान सप्लाई में भी हिस्सेदारी 40% से घटकर 16% रह गई। हालांकि बिना बिके स्टॉक में 19% की गिरावट देखी गई जो अफॉर्डेबल घरों की बिक्री की मांग का संकेत है।

रेपो रेट में यह है 0.5% की कटौती ऐसे वक्त हुई है जब 40 लाख से कम कीमत वाले घरों की बिक्री में मांग दिख रही है। बीते 1 साल में 7 बड़े शहरों में इस सेगमेंट में इन्वेंटरी 19% कम हुई है जो 2024 की पहली तिमाही में 1.40 लाख से घटकर 2025 की पहली तिमाही में 1 पॉइंट 13 लख यूनिट्स ही रह गई थी।

लग्जरी घरों की बिक्री पीक पर पहुंची :

कुल बिक्री में लग्जरी घरों का हिस्सा 2019 में 7% था जो 2024 में बढ़कर 26% हो गया। नई सप्लाई में हिस्सा 11% से दुगना होकर 26% हो गया लग्जरी घरों ( 1.5 करोड़ से अधिक) मैं बिना विकी स्टॉक में 24% की बढ़ोतरी हुई है यह 2024 की पहली तिमाही में 91,125 से बढ़कर 2025 की समान अवधि में 1.13 लाख हो गई।

गोल्ड लोन शेयर चमके :

इन घोषणाओं के साथ ही आरबीआई ने 2.5 लख रुपए से कम को गोल्ड लोन पर लोन टू वैल्यू एलटीवी रेशों को 75% से बढ़कर 85 कर दिया है इससे लोगों को अब गोल्ड की कुल कीमत के 85% के बराबर लोन मिलेगा इस फैसले से गोल्ड लोन कंपनियों के शेयर में पांच से 7% तक की बढ़ोतरी हुई है। रेट कट से बूस्ट के कारण शुक्रवार को सेंसेक्स 747 अंक यानी 0.92 प्रतिशत चढ़कर 82189 पर बंद हुआ निफ्टी भी 252 अंक यानी 1.0 2% से चढ़कर 25,0003 पर बंद हुआ।

एक लाख के सोने पर 85000 का लोन मिलेगा :

केंद्रीय बैंक ने गोल्ड लोन के नियमों में भी बदलाव किया है अब 2.5 लख रुपए तक के गोल्ड लोन पर लोन टू वैल्यू रेशों 75 प्रतिशत से बढ़कर 85% कर दिया है। अर्थात इसका मतलब होता है कि अब ₹100000 की गोल्ड वैल्यू पर 85000 तक का लोन मिल सकेगा पहले यह सीमा 75000 थी। 2.5 लख रुपए तक के छोटे गोल्ड लोन पर क्रेडिट अप्रेजल की जरूरत नहीं होगी यानी कागजी कार्रवाई कम होगी और लोन जल्दी मिलेगा। इससे छोटे कर्जदार खासकर ग्रामीण और छोटे शहर वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए लोन लेना आसान हो जाएगा

कम्पनी तेजी

1. मुथूट फाइनेंस – 6.98%

2. मण्णपुरम फाइनेंस – 5.64%

3. आईआईएफएल फाई – 5.20%

4. चोलामंडलम फाइनेंस – 5.25%

आरबीआई का फोकस जीडीपी बढ़ोतरी पर :

रेपो रेट में इस साल एक प्रतिशत तक कटौती कर इसे 5 पॉइंट 5% पर लाने के बाद आरबीआई ने अपने नीतिगत रुख को एक अकमोडेटीव से न्यूट्रल यानी तटस्थ कर दिया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि अब नीतिगत धर्म को लेकर सीमित स्पेस बचा है इसलिए हर कदम सोच समझकर उठाना होगा। इससे भविष्य में दरों में कटौती की गुंजाइश सीमित हो गई है अब नीतिगत फैसले डाटा पर आधारित होंगे अब दरें तभी घटेगा जब महंगाई बढ़ने की दर काफी कम रह जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि आरबीआई के फैसलों से ग्रामीण और शहरी इलाकों में खपत बढ़ने की उम्मीद है। इन्वेस्टमेंट फॉर्म फाइबर सिरका के फाउंडर अभय अग्रवाल ने कुछ समाचार पत्रों से खास बातचीत में बताया कि दरों में कटौती से खपत बढ़ेगी खपत बढ़ने से प्राइवेट कैंपेक्स बढ़ेगा कैंपेक्स बढ़ेगा तो रोजगार बढ़ेगा।

क्या कहना है एक्सपर्ट का :

1. वी.के. विजय कुमार, नियोजित फाइनेंस।

आरबीआई के फैसले इकोनामिक ग्रोथ को बढ़ावा देने वाले हैं पर रेट कट से बैंकों का मार्जिन कम होने की आशंका है इससे बैंक फाइनेंशियल स्टॉक दबाव में आ सकते हैं हालांकि ओवरऑल शेयर बाजार को आरबीआई के इस कदम से बूस्ट मिल सकता है।

2. डी. के. जोशी, मुख्य अर्थशास्त्री।

शेयर बाजार में सिर्फ रेपो रेट में कटौती से खास फायदा नहीं दिखता लेकिन सीआरआर में कटौती करते हुए आरबीआई ने लिक्विडिटी पुश किया है इन दोनों से इकोनॉमी को बहुत फायदा मिलेगा शहरी क्षेत्र में खपत बढ़ सकती है जिससे कंजमप्शन शेयरों में तेजी की उम्मीद है।

3. साक्षी गुप्ता, प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट एचडीएफसी बैंक

आरबीआई अब निकट भविष्य के लिए विराम ले सकता है सेंट्रल बैंक द्वारा डाटा निर्भर पर टर्न लेने की संभावना है और भविष्य में कोई भी डर कटौती केवल तभी हो सकती है जब विकास में भौतिक रूप से गिरावट आए।

महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर ( Q & A )

Question 1. रेपो रेट क्या होती है..?

उत्तर -पुनर्खरीद दर (पुनर्खरीद दर) वह ब्याज दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक संस्थानों को धन उधार देता है जब धन की कमी होती है। सरल शब्दों में, यह वह दर है जिस पर बैंक कंसल्टेंसी के लिए सेंट्रल बैंक से धन उधार लिया जाता है, आमतौर पर सरकारी प्रतिभूतियों के बदले। यह तंत्र केंद्र को तरलता को विसर्जित करने और स्थिरता बनाए रखने की अनुमति देता है।

  • उधार लेने की प्रणाली: जब वाणिज्यिक बैंकों की कमी का सामना करना पड़ता है, तो वे पैसे उधार लेने के लिए केंद्रीय बैंक से संपर्क कर सकते हैं। बदले में, सेंट्रल ईस्ट बैंक स्थापित रेपो दर पर ये धन उपलब्ध कराता है।
  • संपार्श्विक के रूप में सरकारी स्वामित्व: ऋण लेने वाले बैंकों को संपार्श्विक के रूप में सरकारी स्वामित्व प्रदान करना चाहिए। ये प्रतिभूतियाँ केंद्रीय बैंक के लिए सुरक्षा जाल के रूप में कार्य करती हैं, यह सुनिश्चित करती हैं कि ऋण सुरक्षित है और भुगतान किया जाएगा।
  • पुनर्खरीद समझौता: “रेपो” शब्द पुनर्खरीद अभिनेता का रूप है। इस समझौते में यह निर्धारित किया गया है कि ऋण लेने वाले भविष्य के बैंक की किसी भी तारीख पर प्रतिभूतियों को पुनर्खरीद करना, आमतौर पर उच्च मूल्य पर, जिसमें रिपो दर पर गणना की गई ब्याज भी शामिल है।

Question 2. रेपो दर कैसे काम करती है.?

यह सुझाव देने के लिए कि रेपो दर कैसे संचालित होती है, इसकी तकनीक और इन टेक्नोलॉजी को शामिल करने की प्रक्रिया का पता लगाना आवश्यक है:

  • उधार लेने की शुरुआत: जब किसी वाणिज्यिक बैंक को धन की आवश्यकता होती है, तो वह केंद्रीय बैंक से संपर्क करता है, अपनी आवश्यकताएं और संपार्श्विक के रूप में सरकारी प्रतिभूतियां प्रदान करता है।
  • बैंक की भूमिका: केंद्रीय बैंक बैंक का आकलन करता है, संपार्श्विक को मंजूरी देता है, और असाधारण केंद्रीय रिज़र्व दर पर उपलब्ध कराता है।
  • ब्याज गणना: ब्याज दर (रेपो दर) ऋण ली गई राशि पर लागू होती है, और यह वाणिज्यिक बैंक के लिए ब्याज दर के रूप में अनिवार्य रूप से ऋण लेने की लागत है।
  • प्रतिभूतियों की पुनर्खरीद: स्वीकृत अवधि के बाद, ऋण लेने वाला बैंक सेंट्रल बैंक से प्रतिभूतियों को उस मूल्य पर पुनर्खरीद करता है जिसमें ऋण ली गई राशि और ब्याज शामिल होता है।

Question 3. रेपो दर का क्या महत्व है..?

रेपो दर इकोनोमिक जर्नल में काफी महत्वपूर्ण रचना है। यह एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग केंद्रीय बैंक कई व्यापक आर्थिक बैंकों को प्राप्त करने के लिए करता है:

तरलता प्रबंधन: तरलता प्रबंधन प्रणाली में तरलता के प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण है। इस दर को समाप्त करके, केंद्रीय बैंक बैंकों द्वारा उधार ली जाने वाली सलाहकार को नियंत्रित किया जा सकता है, 

निजीकरण नियंत्रण: स्वामित्व अधिकार का एक प्राथमिक उपयोग स्वामित्व है। जब बांड्ज़ अधिक होता है, तो सेंट्रल बैंक रेपो दर बढ़ाया जा सकता है। इससे ऋण लेना अधिक महंगा हो जाता है, जिससे उद्योग में मुद्रा आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे प्रतिभूतियों को कम करने में मदद मिल सकती है।

आर्थिक प्रोत्साहन: इसके विपरीत, कम आर्थिक विकास की अवधि के दौरान, केंद्रीय बैंक राजकोषीय दर को कम कर सकता है। इससे ऋण लेना सस्ता हो जाता है, जिससे व्यवसाय और उपभोक्ताओं को ऋण मुक्ति के लिए छूट मिल जाती है, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।

Question 4. क्रेडिट रिजर्व रेशों (CRR ) क्या होता है..?

उत्तर – नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) के तहत, वाणिज्यिक बैंकों को केंद्रीय बैंक के पास रिजर्व के रूप में एक निश्चित न्यूनतम राशि जमा करनी होती है। बैंक की कुल जमाराशि के मुकाबले रिजर्व में रखी जाने वाली नकदी का प्रतिशत, नकद आरक्षित अनुपात कहलाता है। नकद आरक्षित राशि या तो बैंक की तिजोरी में जमा होती है या आरबीआई को भेजी जाती है।