हमारे देश के संविधान के अनुसार प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनके जान माल की हिफाजत करना हमारे देश के कानून और संविधान का कर्तव्य है, लेकिन जब सरकार सुरक्षा देने के नाम पर आम नागरिक को बिल थामने लगे तो क्या किया जाए..? उस पर भी यदि वह नागरिक नियमित रूप से इनकम टैक्स अदा करता आ रहा हो, जिसके लिए बार-बार कहा जाता है कि सरकार करदाताओं के टैक्स से चलती है। हाल ही में ऐसा एक वाक्य राजस्थान की राजधानी जयपुर में सामने आया जब एक बिजनेसमैन से एक गैंगस्टर ने दो करोड़ की रंगदारी मांगी और पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई।. बिजनेसमैन को जो सुरक्षा मिली उसके आवाज में क्षेत्र लख रुपए का बिल पुलिस द्वारा व्यापारी को थमा दिया गया। इसकी कोई जानकारी उसे व्यापारी को नहीं दी गई थी। अब बताइए कि क्या अपने मौलिक अधिकारों के लिए भी करदाताओं को बिल भरना होगा..? आखिर देश में करदाताओं को क्या सुविधा मिल रही है..? इस सवाल का जवाब कौन देगा.? शायद ही किसी के पास इस सवाल का जवाब हो। सरकार यह अपेक्षा तो प्रत्येक करता था से करती है कि वह ने केवल अपना टैक्स जमा कारण बल्कि पूरी ईमानदारी से टैक्स भी भारी और बदले में सरकार से किसी भी प्रकार की सुविधा की उम्मीद या अपेक्षा ने करें।
आजकल हम इस बात को लेकर पहले नहीं समा रहे हैं और अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं कि भारत पहले दुनिया की पांचवी बड़ी इकोनॉमी बना और अब जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है। हम जापान को पछाड़ कर दुनिया की सबसे तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाले हैं। देश को यह ताकत कहां से मिली..? मैं आपको बताता हूं कि हमारे देश और सरकारों को यह ताकत करदाताओं से प्राप्त होती है। करदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार दिन-रात प्रयासरत रहती है। देश में पैसा लगा रहे निवेदक और करदाता सरकार को आर्थिक शक्ति देते हैं। देश की कानून व्यवस्था अच्छी हो तभी बिजनेसमैन और निवेशक तथा व्यापारी अपने आप को सुरक्षित महसूस करते हैं लेकिन क्या समय पर इनकम टैक्स देने वालों को सुरक्षा की गारंटी सरकार की तरफ से मिल रही है..? इस सवाल का जवाब ढूंढना बड़ा मुश्किल है. 140 करोड़ से ऊपर की आबादी वाले भारत में 3 करोड लोग इनकम टैक्स अदा करते हैं। हालांकि गुड्स एंड सर्विस टैक्स जीएसटी लागू होने के बाद अप्रत्यक्ष रूप से प्रत्येक नागरिक टैक्स के दायरे में आ गया है। अर्थात में कह सकता हूं कि देश का हर नागरिक किसी न किसी रूप में सरकार को टैक्स अदा कर रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि कोई कम टैक्स दे रहा है..तो कोई ज्यादा।
सरकार को कितना टैक्स मिलता है इसका जवाब वित्त मंत्री से अच्छा और कौन दे सकता है.? भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मैं पिछले दिनों संसद में एक बयान दिया था उनके अनुसार वित्त वर्ष 2024 25 में कर के रूप में 24 लाख करोड रुपए प्राप्त हुए जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 2.5 लाख करोड रुपए अधिक हैं टैक्स रिवेन्यू लगातार बढ़ रहा है। सरकार और देश के अधिकतर खर्च इस टैक्स से ही चलते हैं। वित्त वर्ष 2024 25 के दौरान केंद्र सरकार ने जीएसटी से बहुत बड़ा राजस्व प्राप्त किया। वित्त मंत्री ने फरवरी 2025 में संसद में पीस अपने बजट भाषण में बताया था कि वित्त वर्ष 2023 24 में जीएसटी कलेक्शन 18 लाख करोड़ से अधिक रहा। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12% अधिक था।
सरकार लगातार एडवांस टैक्स और टैक्स भरने को लेकर एक अभियान चलाती है और टैक्स चोरी करने वालों को आपराधिक श्रेणी में रखा जाता है सरकार कि करदाताओं से हमेशा यही अपेक्षा होती है कि वह टैक्स लॉ का पालन करें, अपना रिकॉर्ड सही रखें और समय पर टैक्स अदा करें। लेकिन क्या सरकार की ऐसी सोच है कि इसके बदले में कार्ड था कुछ नहीं मांगे..? और अगर गैंगस्टर या गुंडे धमकी दे रहे हैं तो अपनी सुरक्षा के बदले में भुगतान के लिए तैयार रहें..?
कर दाताओं की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ने केवल उनके व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करती है बल्कि समग्र टैक्स प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता भी सुनिश्चित करती है। करदाताओं को डाटा चोरी या हैंगिंग धोखाधड़ी भ्रष्टाचार या अवैध तरीके से उत्पीड़न से बचाना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि कर डाटा को लगता है कि उसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अनुचित तरीके से परेशान कर रहा है तो उसे सशक्त शिकायत निवारण तंत्र का विकल्प मिलना चाहिए। करदाताओं को टैक्स फाइलिंग रिटर्न प्रोसेसिंग और टैक्स भुगतान से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता मिलनी चाहिए। जब यह सुविधा उसे प्राप्त नहीं होती हैं तो करदाताओं के अंदर एक असंतोष और अविश्वास उत्पन्न होता है। सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि करदाताओं की समस्याओं का समाधान समय पर और प्रभावित तरीके से हो। जब करदाताओं को यह विश्वास होता है कि उनकी व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित है और उनके साथ उचित व्यवहार किया जा रहा है तो वह अधिक तैयार रहते हैं और आत्मविश्वास के साथ अपनी टैक्स जिम्मेदारियां का पालन करते हैं। वैसे सरकार यह सुनिश्चित करती है कि करदाताओं के अधिकारों का सम्मान किया जाए और वह किसी भी प्रकार के अत्याचार या उत्पीड़न से सुरक्षित रहें।
करदाताओं की पैसों से सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन सुविधा मिलती हैं। सरकार के खर्चे चलते हैं, और विकास कार्यों को गति मिलती है। इसीलिए अधिकारियों को जनता के हित में कार्य करना चाहिए ने की सदैव वाह वाही लूटने के लिए अपनी पीठ थप थपानी चाहिए। संविधान में कानून एवं व्यवस्था को बनाए रखना पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी बताया गया है। प्रतीक नागरिक को सुरक्षा देना पुलिस की जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को अपराधियों से जान का खतरा है तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस का ही कर्तव्य है, न की सुरक्षा के नाम पर लाखों रुपए का बिल थमा देना। पुलिस प्रशासन के आल्हा अधिकारियों को ऐसे मामलों में स्वतह संज्ञान लेने की आवश्यकता है। आखिर सरकार ईमानदारी से टैक्स देने वालों के लिए कुछ विशेष सहूलियत क्यों नहीं निर्धारित करती है..? कम से कम जो बिजनेसमैन या व्यापारी गैंगस्टर या अपराधियों की नजर में हैं और जिन्हें रंगदारी के लिए धमकी मिल रही है उनकी सुरक्षा की गारंटी तो सरकार को लेनी ही चाहिए। सुरक्षा के नाम पर लंबा चौड़ा बिल नहीं थामना चाहिए। भले ही सरकार के पास टैक्स देने के बाद देश चलाने संबंधी कई बड़े काम होते हैं लेकिन सुरक्षा भी इन्हीं कामों में से एक बड़ा काम है। सरकार को चाहिए कि वह प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा का ख्याल रखें और करदाताओं पर विशेष ध्यान देते हुए सरकार एवं प्रशासन को उनके प्रति संवेदनशील भी होना चाहिए।
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चीफ एडिटर – केदार लाल ( K. L. Ligree / सिंह साब )



