आर्थिक फंडा ब्लॉग की आज की पोस्ट में भारत अमेरिकी द्विपक्षीय व्यापार में 25% टैरिफ की घोषणा एक बड़ी आर्थिक और वित्तीय घटना है। इसका असर ने केवल भारत बल्कि देश दुनिया पर होगा। डोनाल्ड ट्रंप के जी टैरिफ हमले की में पहले कई आर्टिकल में चर्चा कर चुका हूं और विश्व के कई देशों को डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ हमला झेलना पड़ा है अब अबाउट टैरिफ अटैक भारत पर हुआ है. इस वैश्विक आर्थिक घटना के इन दोनों देशों के साथ ही विश्व अर्थव्यवस्थाओं पर क्या असर पड़ेगा.
भारत और अमेरिका के मध्य एचडी इस ट्रंप के टैरिफ बार की पूरी व्याख्या करेंगे पूरा एनालिसिस करेंगे इसके परिणाम और असर को जानने की कोशिश करेंगे आज के इस आर्टिकल में। हम पूरी व्यापारिक और आर्थिक घटना को सरल और सहज अंदाज में समझ सके इसलिए मैंने इस पोस्ट को
- भूमिका विषय प्रवेश
- भारत को बताया आर्थिक बाधा उत्पन्न करने वाला और रूस का करीबी।
- ऐसा खेल पहले भी खेल चुके हैं ट्रंप।
- व्यापार को लेकर भारत का रवैया ठीक नहीं -‘ट्रम्प ने कहा’
- क्या होगा भारत को नुकसान..?
- कौन-कौन से व्यापारों पर पड़ेगा असर..?
- भारत का अमेरिका से व्यापार।
- आज दुनिया के प्रमुख देशों पर कितना रतिशत टैरिफ है ।
- भारतीय करेंसी पर क्या असर पड़ेगा।
- हम अपने हितों की रक्षा करना जानते हैं – ‘भारत’
- क्या असर पड़ेगा भारतीय मुद्रा पर..?
- ब्रिक्स देशौ पर असर..?
- निष्कर्ष
- संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर।

एक के बाद एक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एशिया तथा विश्व के अनेक देशों पर अपना “टैरिफ हमला लगातार जारी है। भारत और अमेरिका के मध्य विपक्षीय व्यापार वार्ता चल रही थी। आज उसका परिणाम निकला और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 फ़ीसदी टैरिफ की घोषणा कर दी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 1 अगस्त से 25 फ़ीसदी आया तो शुल्क
1. भारत को बताया बड़ा आर्थिक बाधा उत्पन्न करने वाला और रूस का करीबी :
मैं इस बात को एक अलग नजरिए से देखता हूं। भारत पर लगाए गए 25% टैरिफ के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो कारण गिन हैं वह मुझे बड़े हास्य पद लग रहे हैं। उनका कहना है कि भारत मैं आर्थिक अनुशासन नहीं है और रूस उसका करीबी है इसीलिए उन पर टैरिफ लगाना जरूरी है…? अब मैं आपसे ही पूछता हूं क्या किसी किसी की दोस्ती और गलत के कारण उसे पर आर्थिक जुर्माना लगाना क्या ठीक है..?
ट्रामफ़ ने ना केवल 25 फीस आयात शुल्क ( यह ट्रंप के टैरीफ वार के नाम से चर्चित है। मैंने भी इसे ट्रंप का “टैरिफ वार” नाम अपने एक पिछले आर्टिकल मै दिया है) और अतिरिक्त जुर्माना लगाने की घोषणा की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि -“भारत के व्यापार में बेहद सख्त और आपत्तिजनक आर्थिक बधाएं उत्पन्न करने वाला रवैया है “. डोनाल्ड ट्रंप का यह आप ठीक नहीं है। वह भी एक ऐसे राष्ट्रपति के लिए जो विश्व की महाशक्ति का नेतृत्व करता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यहां तक कहा कि भारत की रस से घनिष्ठ संबंध भी इस फैसले की वजह है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस फैसले से भारत अमेरिका के बीच पिछले कुछ समय से चल रहे व्यापार वार्ताओं को भी गहरा झटका दे दिया है।
आर्थिक फंडा ब्लॉग की आज की पोस्ट में भारत अमेरिकी द्विपक्षीय व्यापार में 25% टैरिफ की घोषणा एक बड़ी आर्थिक और वित्तीय घटना है। इसका असर ने केवल भारत बल्कि देश दुनिया पर होगा। डोनाल्ड ट्रंप के जी टैरिफ हमले की में पहले कई आर्टिकल में चर्चा कर चुका हूं और विश्व के कई देशों को डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ हमला झेलना पड़ा है अब अबाउट टैरिफ अटैक भारत पर हुआ है. इस वैश्विक आर्थिक घटना के इन दोनों देशों के साथ ही विश्व अर्थव्यवस्थाओं पर क्या असर पड़ेगा.भारत और अमेरिका के मध्य एचडी इस ट्रंप के टैरिफ बार की पूरी व्याख्या करेंगे पूरा एनालिसिस करेंगे इसके परिणाम और असर को जानने की कोशिश करेंगे आज के इस आर्टिकल में। हम पूरी व्यापारिक और आर्थिक घटना को सरल और सहज अंदाज में समझ सके इसलिए मैंने इस पोस्ट को
3. खेल पहले भी खेल चुके हैं ट्रमफ़ :
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उद्योग पक्षियों व्यापार समझौते में ‘शह’ और ‘मात’ का खेल खेल रहे हैं..? मुझे तो ऐसा ही लग रहा है। भारत पहला ऐसा देश नहीं है जिसके साथ ट्रंप ने इस तरह का खेल खेला है इससे पहले ट्रंप ने जापान पर भी 25 फीस दी टैरिफ लगाने की धमकी वाला लेटर जारी किया था और ट्रेड डील होने पर टैरिफ को घटकर 15 फ़ीसदी कर दिया। इसी तरह यूरोपीय संघ ( EU ) पर 30 फीस थे टेरिफ का लेटर जारी कर हाल ही में हुई ट्रेड डील में टैरिफ को घटकर 15 फ़ीसदी कर दिया। मेरे अनुसार ट्रंप यह चल अपनी व्यापार साझेदारों पर दबाव बनाने के लिए चलते हैं। इसी चाल के दम पर अमेरिका ने जापान और यूरोपीय यूनियन के साथ ताइवान इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ अमेरिकी उत्पादों के लिए जीरो टैरिफ की डील की है। साथी इन देशों से अमेरिका में बड़ा निवेश करने का वादा भी लिया है।
ट्रंप के टैरीफ के क्या है रणनीतिक संदेश..?
हम इस आर्टिकल में न केवल ट्रंप के टैरिफ हमले के आर्थिक कर्म को समझेंगे बल्कि इसके रणनीतिक संकेत को भी समझने और पढ़ने की कोशिश करेंगे। कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 फ़ीसदी आयात शुल्क लगाने की घोषणा करके द्विपक्षीय संबंधों को बड़ा झटका दे दिया है. वह भी ऐसे समय जब दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ताएं चल रही है, हालांकि बातचीत के रास्ते बंद नहीं हुए हैं लेकिन समझौते के बारे में जो उम्मीद की जा रही थी वह कमजोर पड़ती जरूर दिख रही है। ट्रंप प्रशासन का यह कदम भारत के लिए सिर्फ आर्थिक दबाव नहीं बल्कि कूटनीतिक चुनौती भी बनकर सामने आया है खासकर जब तब पाकिस्तान के साथ अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है और भारत रूस की दोस्ती का खुला विरोध करने लगा है। ट्रंप की नीति में इस तरह का यह परिवर्तन मुझे चौंकाने वाला लग रहा है। उन्होंने व्यापार समझौता में भारत की तुलना में पाकिस्तान को अधिक महत्व दिया है. अमेरिका ने जनरल विवादास वास जनरल मुनीर को बुलाकर काफी रियाते प्रदान की थी।
रणनीतिक दबाव की कोशिश
भारत पर टेररिस्ट के अतिरिक्त ऋषि साझेदारी के कारण जुर्माना लगाने का फैसला केवल व्यापारिक नहीं बल्कि रणनीतिक दबाव की एक कोशिश है। दूसरी ओर इसकी छिपी हुई मंशा अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों के लिए भारत का बड़ा बाजार खोलना है जो ने सिर्फ भारत के किसानों को तबाह करने वाला होगा बल्कि लंबे समय में यहां की लोगों के स्वास्थ्य को भी बड़ा नुकसान पहुंचाएगा जिसे अमेरिकी फारमा सिंडिकेट लाभ उठाएगा। ट्रंप प्रशासन की नीति में सबसे अधिक चिंता का विषय पाकिस्तान को लेकर उसका रोक है हाल ही अमेरिकी नेतृत्व ने पाकिस्तान के सेवा प्रमुख को विशेष अहमियत दी है कुछ व्यापारिक छूट भी फिर से बहस हो गई है इन कदमों से संकेत मिलते हैं कि अमेरिका पाकिस्तान को फिर से अपना सामरिक नीति में जगह दे रहा है। एशिया और दक्षिण एशिया में अमेरिका अपनी उपस्थिति बनाकर रखने के लिए पाकिस्तान को एक अहम भू सामरिक साझेदर मानता है। यह रुख भारत के लिए साफ चेतावनी है कि दक्षिण एशिया में अमेरिकी प्राथमिकताएं स्थाई नहीं है. भारत पाकिस्तान की आतंकी घटनाओं को लेकर लगातार सवाल उठता रहा है। अमेरिका खुद आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई की बात करता है लेकिन वह पाकिस्तान का समर्थन करता हुआ नजर आ रहा है। भारत की रस के साथ मजबूत रक्षा साझेदारी शीतकाल से ही अमेरिका की नजरों में लगातार खटकती रहती है क्योंकि इसी की बदौलत भारत हमेशा अपनी विदेश नीति को स्वतंत्र और संतुलित रखने में सफल रहा है।
अमेरिका का यह नया टैरिफ अल्पकालिक आर्थिक निर्णय भर नहीं बल्कि एक भू राजनीतिक संकट भी है। भारत भी यह भली भांति समझता है कि अमेरिका के साथ रिश्ते व्यापार तक सीमित नहीं है बल्कि रक्षा तकनीक विदेश और वैश्विक राजनीति में यह साझेदारी अहम है फिर भी अब भारत को अपनी वैकल्पिक रणनीतियों पर गंभीरता से काम करना होगा रूस यूरोप जापान ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के साथ संबंधों को सुदृढ़ करना आज की जरूरत बनती जा रही है भविष्य में वैश्विक मंच पर भारत तभी मजबूती से खड़ा हो सकता है जब वह स्पष्ट नीतियों और मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था के बल पर निर्णय लेने में सक्षम हो सकेगा दुनिया अब बहुत ध्रुवीय बन रही है और भारत को उसी के अनुरूप अपने फैसले खुद तय करने होंगे ने की किसी के दबाव में आकर।
.



