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टेबल ऑफ़ कंटेंट / आज की पोस्ट में
- 1. अमेरिका मनाएगा 250 वीं सालगिरह।
- 2. रक्षाबंधन में बनेंगे नए गठबंधन
- 3. यूक्रेन जैसे देशों में रहेगी अशांति।
- 4. यूरोपीय देशों के लिए परीक्षा का समय।
- 5. ट्रंप की वजह से चीन को मिल रहा है बढ़ावा।
- 6. आर्टिकल का निष्कर्ष।
- 7. संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर
साल 2025 दुनिया भर के लिए कई तनाव हुए आसन दिशा भर रहा है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वैश्विक मामलों को प्रभावित करने वाले सबसे बड़ी शख्सियत के रूप में सामने आए हैं। उन्होंने भारत समेत फिलिस्तीन, वेनेजुएला, ईरान आदि देशों को प्रभावित किया है। लगता है जब तक भी व्हाइट हाउस में रहेंगे तब तक ऐसा ही चलता रहेगा। लेकिन उन्होंने गाजा में कूटनीतिक नतीजे भी दिए हैं 2026 की स्थिति क्या रहेगी..? दुनिया भर के देशों में और अलग-अलग क्षेत्र में क्या होने वाला है..? क्या 2026 में भी दुनिया की दूरी ट्रंप के इर्द-गिर्द ही घूमती रहेगी या कोई नया विकल्प सामने आने वाला है..? यह बातें बहुत मायने रखती।
Arthikfunda.com के आज के आर्टिकल में विश्व अर्थव्यवस्था और दुनिया की हलचल की इसी बातों को समझने का प्रयास करेंगे।
1. अमेरिका मनाएगा अपनी 250 वीं सालगिरह
इस साल अमेरिका की स्थापना की 285 वर्ष गांठ है रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स स्मोकी पर देश की अलग-अलग तरीकों से व्याख्या करेंगे अपने-अपने मटन का प्रचार प्रसार करेंगे। इसके बाद नवंबर में विद्यार्थी चुनाव में वाटर अमेरिका की भविष्य पर अपना फैसला देंगे यह चुनाव ट्रंप के लिए चुनौती हो सकते हैं लेकिन संसद में डेमोक्रेट्स का कब्जा हो जाएगा तब भी टर्म का शासन जोर जबरदस्ती टैरिफ और एग्जीक्यूटिव आदेशों से चलता रहेगा। हालांकि ट्रंप दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं पर उनका व्यक्तित्व अजीबोगरीब है। वह कब क्या फैसला लें इसका पता स्वयं उनके अधिकारियों को भी नहीं होता।
2. डिफेंस बिजनेस में नई गठबंधन बनेंगे
क्या दुनिया अमेरिका और चीन की अगुवाई में दो गुटों के बीच एक नए सीत yudh ( cold war) की ओर बढ़ेगी.? आज की दुनिया में डिफेंस और डिफेंस गठबंधन बहुत मायने रखने वाली चीज है। अपने युद्ध तक व्यापार और डिफेंस गठबंधन को लेकर दुनिया का हर देश सजग है। यह न केवल एक रणनीतिक साझेदारी रही बल्कि व्यापार का केंद्र बन गया है. दुनिया के अधिकतर देश इस बात में जुटे हुए हैं कि उनके डिफेंस व्यापार का अधिक से अधिक बढ़ावा हो। अमेरिका भी यही चाहता है कि उसकी डिफेंस मार्केट की अधिक से अधिक बिक्री हो और उसको अधिक से अधिक खरीददार मिले। हालांकि इस विषय पर विश्लेषकों की राय भिन्न-भिन्न हो सकती है लेकिन ट्रंप किसी बड़े भू राजनीतिक समीकरण के बजाय सहज या फोरी फसलों पर आधारित लेनदेन संबंधी रास्ता पसंद करेंगे। डिफेंस, व्यापार, और जलवायु जैसे क्षेत्रों में नए साझेदार बनेंगे ऐसे गठबंधन अभी हाल ही में यूरोपीय देशों के बीच में प्रचलन में आए हैं।
3. यूक्रेन समय दुनिया के कई देशों में रहेगी अशांति
इस साल गजा में एस्थिर शांति कायम रहने की उम्मीद है। लेकिन यूक्रेन सूडान, रवांडा, और म्यांमार जैसे देशों में टकराव के हालात जारी रहेंगे।उत्तरी यूरोप और दक्षिणी चीन सागर में रूस और चीन भड़काने वाली कार्यवाहियों में शामिल हो सकते हैं। दक्षिणी चीन सागर भारत चीन और अमेरिका के बीच लगातार विवाद का क्षेत्र बना हुआ है। आने वाले समय में यह अशांति का एक प्रतीक बन जाएगा। इसके जरिए वे अपने सहयोगियों के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता की परीक्षा लेंगे। जैसे-जैसे युद्ध और शांति के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है आर्कटिक, अंतरिक्ष, समुद्र तल और साइबेरिया स्पेस जैसे क्षेत्र में तनाव बढ़ता जाएगा।
4. यूरोपीय देशों के लिए अग्नि परीक्षा
एक जमाना था जब वैश्विक परिदृश्य में यूरोपीय देशों का दबदबा था। ब्रिटेन विश्व की सबसे बड़ी ताकत था। बदलते वैश्विक हालातो में इस साल खास तौर पर यूरोप की परीक्षा होने वाली है। उसे अपने सैनिक खर्च बढ़ाने होंगे साथ ही अमेरिका को भी अपने साथ-साथ कर रखना होगा ताकि अपने आर्थिक विकास में बढ़ोतरी हो सके और भारी बजट के घाटे से भी निपट सकें। हालांकि के फायदे बरतनी से कट्टर दक्षिणपंथी पार्टियों के लिए जन समर्थन बढ़ाने का खतरा बना रहेगा और रक्षा समर्थन बढ़ाने का खतरा भी बना रहेगा



