*आर्थिक शक्ति* = जिन बंदरगाहों से कभी ब्रिटिश साम्राज्य चलता था, उन्हें आज अदानी खरीदने की तैयारी में।

गौतम अडानी एवं अदानी ग्रुप कि बहुराष्ट्रीय कंपनी जिसका नाम है *अदानी पोर्ट्स*। यह आजकल सुर्खियों में है क्योंकि यह कंपनी ब्रिटेन की सबसे बड़ी ‘पोर्ट ऑपरेटर कंपनी एसोसिएटेड’ में पावरफुल हिस्सेदारी खरीद रही है। इसके बाद इस कंपनी का एक बहुत बड़ा मैनेजमेंट हिस्सा अदानी ग्रुप के कंट्रोल में आ जाएगा। एक जमाना था तब दुनिया भर की बहु राष्ट्रीय कंपनियां भारतीय कंपनियों का अधिग्रहण करती थी

लेकिन अब जमाना बदल गया है। मैं इस ताजा घटनाक्रम के मद्देनजर यह बात नहीं कह रहा हूं…बल्कि आपने खुद भी देखा, सुना और पढ़ा होगा कि दर्जनों भारतीय कंपनियां विदेशी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का सफलतापूर्वक अधिग्रहण कर रही है।

जहां तक ब्रिटेन और अडानी ग्रुप के बीच के समझौते की बात है, यह डील लगभग लगभग तय हो चुकी है। केवल वित्तीय /फाइनेंस/Finance पर कुछ पेच फंसा हुआ है, जिसके जल्द सुलझाने के आसार है। एचडी लगभग 10 अरब डॉलर के आसपास की होगी। इस संभावित डील के पूरा होने के साथ ही भारतीय कंपनी अधिग्रहण की क्षेत्र में यह एक ऐतिहासिक पल होगा और किसी भारतीय कंपनी के यह सबसे बड़े विदेशी अधिग्रहण में शामिल होगा. लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं कि इस सऊदी की अहमियत केवल मुनाफा तक सीमित नहीं है

यह अधिग्रहण भारत और ब्रिटेन की औपनिवेशिक इतिहास के संदर्भ में भी बेहद प्रतीकात्मक है। ABB ब्रिटेन के 21 बंदरगाहों का संचालन करती है और देश की लगभग 25 प्रतिशत समुद्री व्यापार को संभालती है कभी इन्हीं समुद्री मार्गों और बंदरगाहों के जरिए ब्रिटिश साम्राज्य ने भारत में दुनिया के कई देशों पर अपना व्यापारिक और राजनीतिक प्रभाव कायम किया था ऐसे में यदि अदानी ग्रुप इन बंदरगाहों का अधिग्रहण पूरा करता है तो इसे भारत की आर्थिक ताकत और वैश्विक प्रभाव के नए दौर के रूप में देखा जाएगा 25% समुद्री व्यापार पर नियंत्रण अब ब्रिटेन के 21 प्रमुख बंदरगाहों का संचालन करती है और देश के करीब एक चौथाई समुद्री व्यापार का प्रबंध करती है यह अधिग्रहण अदानी पोर्ट्स के वैश्विक नेटवर्क को नई मजबूती देगा और यूरोप में उसकी रणनीतिक मौजूदगी एवं वित्तीय ताकत ( Financeal power ) को बढ़ाएगा। साथ यह भारत की उन कंपनियों के उभार का प्रतीक भी है जो कभी ब्रिटिश साम्राज्य के नियंत्रण वाले हम आर्थिक ढांचे में अब निवेश और स्वामित्व हासिल करने की स्थिति में पहुंच चुकी है।

टाटा के बाद सबसे बड़ा विदेशी अधिग्रहण टाटा सुमो ने पहले तितली कोर्स और जगुआर लैंड रोवर जैसे प्रतिष्ठित ब्रिटिश ब्रांडों का अधिग्रहण कर वैश्विक पहचान बनाई थी हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि अडानी का एबीपी सौदा उसे भी अधिक प्रतीकात्मक हो सकता है क्योंकि यह किसी ब्रांड का नहीं बल्कि ब्रिटेन के रणनीतिक समुद्री बुनियादी ढांचे का अधिग्रहण होगा यह

भारतीय कंपनियों की बढ़ती वैश्विक क्षमता और पूंजी शक्ति का बड़ा संकेत माना जा रहा है जुलाई 2026 की उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार गौतम अदाणी का समूह Associated British Ports (ABP) में संभावित बोली पर विचार कर रहा है। ABP ब्रिटेन का सबसे बड़ा port operator है और इसकी संभावित valuation £10 billion से अधिक बताई गई है। अभी इसे $10 billion में निश्चित रूप से खरीद लिया गया है कहना सही नहीं होगा। वहीं Associated British Foods (ABF) एक अलग ब्रिटिश कंपनी है।

निष्कर्ष /कंक्लुजन /सारांश

भारतीय कॉरपोरेट जगत की बदलती तस्वीर केवल कंपनियों के विस्तार की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत की आर्थिक शक्ति और वैश्विक कारोबारी आत्मविश्वास के बढ़ने का संकेत है। कभी भारतीय बाजार में विदेशी कंपनियां भारतीय कारोबारों का अधिग्रहण करती थीं, लेकिन आज भारतीय कंपनियां स्वयं अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप और अन्य विकसित बाजारों में बड़ी कंपनियों और ब्रांडों को खरीदने या उनमें हिस्सेदारी हासिल करने की क्षमता रखती हैं।टाटा समूह द्वारा Tetley, Corus और Jaguar Land Rover जैसे प्रतिष्ठित कारोबारों का अधिग्रहण इस बदलाव का ऐतिहासिक उदाहरण रहा है। आज Sun Pharma का Organon अधिग्रहण, Tata Motors का Iveco सौदा और अन्य भारतीय कंपनियों की विदेशी acquisitions इस प्रवृत्ति को नई गति दे रहे हैं। 2026 की पहली तिमाही में भारतीय कंपनियों के outbound M&A सौदों में भी उल्लेखनीय गतिविधि दर्ज हुई।अदाणी समूह की Associated British Ports में संभावित दिलचस्पी भी इसी बदलते भारत की तस्वीर पेश करती है। यह केवल पूंजी की ताकत नहीं, बल्कि भारतीय कंपनियों की वैश्विक बाजार, technology, infrastructure, brands और strategic assets तक पहुंच बनाने की बढ़ती क्षमता का प्रतीक है।आज भारतीय कंपनियां केवल दुनिया से कारोबार करने वाली कंपनियां नहीं रह गई हैं; वे दुनिया के कारोबार में अपनी जगह बनाने वाली वैश्विक कंपनियां बन रही हैं।भारतीय कंपनियों के अधिग्रहण से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर 1. भारतीय कंपनियां विदेशों में अधिग्रहण क्यों कर रही हैं?भारतीय कंपनियां नए बाजारों में प्रवेश, technology हासिल करने, global brands प्राप्त करने, supply chain मजबूत करने और अपनी international presence बढ़ाने के लिए विदेशी कंपनियों का अधिग्रहण करती हैं।2. क्या भारतीय कंपनियों की विदेशी अधिग्रहण क्षमता पहले से बढ़ी है?हां। मजबूत balance sheets, बेहतर access to capital, international experience और भारतीय अर्थव्यवस्था के विस्तार ने बड़ी कंपनियों को वैश्विक acquisitions के लिए अधिक सक्षम बनाया है।3. टाटा समूह का कौन-सा अधिग्रहण ऐतिहासिक माना जाता है?Tata Tea ने 2000 में ब्रिटिश tea brand Tetley को खरीदा। इसके बाद Tata Steel ने Corus और Tata Motors ने Jaguar Land Rover का अधिग्रहण किया।4. Corus का अधिग्रहण कितना बड़ा था?2007 में Tata Steel ने लगभग $12 billion में Corus का अधिग्रहण किया था। यह भारतीय कंपनी द्वारा किया गया एक बड़ा global acquisition था।5. Jaguar Land Rover किस भारतीय कंपनी के पास है?Jaguar Land Rover का स्वामित्व Tata Motors के पास है। यह भारतीय कंपनी के global automobile expansion का प्रमुख उदाहरण है।6. भारतीय कंपनियों ने Banking और Financial Services में भी acquisitions किए हैं?हां। भारतीय financial sector में mergers और acquisitions लंबे समय से consolidation, scale और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने का माध्यम रहे हैं। Banking M&A पर शोध भी बताता है कि बैंकों ने competition और financial stability जैसी जरूरतों के कारण consolidation अपनाया है।7. क्या बैंकिंग क्षेत्र में हर merger को acquisition कहा जा सकता है?नहीं। Merger और acquisition अलग अवधारणाएं हैं। Merger में दो संस्थाएं मिलकर एक संयुक्त इकाई बना सकती हैं, जबकि acquisition में एक कंपनी दूसरी कंपनी पर नियंत्रण हासिल करती है।8. भारतीय कंपनियों ने Technology sector में क्या हासिल किया है?Technology और IT services में भारतीय कंपनियों ने विदेशी consulting, software और digital businesses को खरीदकर अपनी global capabilities बढ़ाई हैं। Wipro का UK-based Capco अधिग्रहण इसका प्रमुख उदाहरण है।9. Pharmaceutical sector में भारत की स्थिति कैसी है?भारतीय pharmaceutical companies ने विदेशों में बड़े acquisitions के जरिए global markets, medicines, brands और research capabilities तक अपनी पहुंच बढ़ाई है। Sun Pharma का Organon acquisition 2026 में इसका बड़ा उदाहरण है।10. Automobile sector में भारतीय कंपनियों की वैश्विक ताकत का उदाहरण क्या है?Tata Motors–Jaguar Land Rover और Tata Motors–Iveco जैसे सौदे दिखाते हैं कि भारतीय automobile companies अब global brands और manufacturing capabilities हासिल करने की क्षमता रखती हैं।11. भारतीय कंपनियां ब्रिटेन में इतनी सक्रिय क्यों हैं?ब्रिटेन में मजबूत financial ecosystem, global brands, advanced technology, established infrastructure और international markets से जुड़ाव भारतीय कंपनियों के लिए आकर्षक हैं। 2024 में ब्रिटेन में लगभग 971 Indian-owned companies होने की रिपोर्ट भी इस मजबूत कारोबारी संबंध को दर्शाती है।12. अदाणी समूह और Associated British Ports का मामला क्या है?रिपोर्टों के अनुसार Gautam Adani का समूह ब्रिटेन के सबसे बड़े port operator Associated British Ports (ABP) में संभावित bid पर विचार कर रहा है। इसकी valuation £10 billion से अधिक बताई गई है। अभी इसे पूरा हो चुका acquisition नहीं माना जाना चाहिए।13. क्या ABP और Associated British Foods एक ही कंपनी हैं?नहीं। Associated British Ports (ABP) ports और infrastructure business से जुड़ी कंपनी है, जबकि Associated British Foods (ABF) food, ingredients और Primark retail business वाला अलग समूह है।14. भारतीय कंपनियों के विदेशी अधिग्रहण से भारत को क्या फायदा होता है?इससे भारतीय कंपनियों को global brands, technology, international customers, skilled workforce और नए markets तक पहुंच मिल सकती है। इससे भारतीय corporate sector की global competitiveness भी बढ़ती है।15. क्या भारतीय कंपनियों का global acquisition भारत की आर्थिक ताकत का संकेत है?काफी हद तक हां। जब भारतीय कंपनियां अरबों डॉलर के विदेशी businesses खरीदने या उनमें बड़ी हिस्सेदारी लेने की क्षमता दिखाती हैं, तो यह भारतीय private sector की बढ़ती financial, managerial और strategic क्षमता को दर्शाता है। हालांकि हर acquisition सफल हो, यह जरूरी नहीं; सही valuation, financing और post-acquisition management भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।आपके लेख के लिए एक दमदार लाइन:**“कभी भारत में विदेशी कंपनियां भारतीय बाजार खरीदती थीं, आज भारतीय कंपनियां दुनिया के बाजार में अपनी हिस्सेदारी खरीद रही हैं—यही बदलती भारतीय आर्थिक शक्ति की सबसे बड़ी तस्वीर है।”*

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