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Ai से नौकरियां जाने का संकट नहीं, बल्कि नई नौकरियां अस्तित्व में आई..।

Ai से नौकरी जाने का संकट नहीं, बल्कि नई नौकरियां अस्तित्व में आई..।

Ai (एआई) के आने से बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म होने की आशंका जताई जा रही है। मैं कई छात्रों और यहां तक की शिक्षकों से भी यह बात सुनता रहता हूं कि आई आने से इंटरनेट से संबंध अधिकतर नौकरियां धीरे-धीरे खत्म हो रही है। यह एक ऐसा विषय है जिस पर पूरी रिसर्च और आंकड़ों की आवश्यकता है। जहां तक मेरा मानना है ऐसी आशंकाएं बिना किसी डाटा के साबित करना फिलहाल इतना आसान नहीं है क्योंकि इस चीज के पर्याप्त आंकड़े अभी हमारे पास उपलब्ध नहीं है।

जहां तक मेरी अपनी राय है कि आई से नौकरियां जाने की जो संकट था फिलहाल में उसे नहीं मानता बल्कि मेरा मानना है कि आई ने कई नई नौकरियां को जन्म दिया है।

जैसे मैं एक उदाहरण आपको देना चाहता हूं। “एनोटेटर” यह एकदम नया और ऐसा जॉब है जो ए से जुड़ा हुआ है अन्नौटेटर वह डाटा एनालिसिस होता है जो डाटा को संदर्भ या अर्थ से जोड़ने का काम करता है। इस जॉब प्रोफाइल पर अगर आप गौर करेंगे तो पहले और अब एकदम तस्वीर उलट नजर आती है आज की तारीख में यह जॉब टेकिंग करने वाला कम वेतन का अस्थाई जॉब नहीं रहा बल्कि एक आधुनिक तरह के जब में तब्दील हो गया है अब यह अस्थाई कर्मी नहीं है ए मॉडल के अधिक आधुनिक होने से उन्हें ट्रेन करने के लिए फाइनेंस कानून और मेडिसिन जैसे विषयों की जरूरत पड़ती है।

इसी तरह आई बिट्स की मदद करने वाले साइंटिस्टों की जरूरत है। अगर ए के कारण कुछ नौकरियां गई भी है तो कुछ नए जब अस्तित्व में आ गए हैं इसी तरह का एक और मैं आपको उदाहरण बनाना चाहता हूं जो आई बिट्स की मदद करने वाले सीटों से जुड़ा हुआ है आज इन साइंटिस्टों की काफी जरूरत महसूस हो रही है। आई का कारोबार भी दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है आपको इसकी तरक्की का एक उदाहरण छोटा सा मैं आपको बताना चाहता हूं कि “इंजीनियर बाफिन्स” की सेवाएं मुखिया करने वाली कंपनी ‘मरकोर’ का मूल्य हाल ही में 90 हजार करोड रुपए अका गया है। इससे आप ए के कारोबार की तरक्की का अंदाजा लगा सकते हैं …

एआई द्वारा अस्तित्व में आई कुछ नई नौकरियां

1. फारवर्ड डेप्लॉय इंजीनियर ( एफडीडीइ )

टी द्वारा सृजित हो रहे इन नई जॉब्स की बाइट के ट्रेन होने के बाद उन्हें कंपनियों में शामिल करने के लिए फॉरवर्ड डेप्लॉय इंजीनियर की जरूरत पड़ती है सॉफ्टवेयर कंपनी ” फ़्लैन्तिर” इसके लिए उन्हें ट्रेन करती है और लर्निंग का कार्य करती है उनकी जब डेवलपर कंसलटेंट और सेल्स मांस का मेला जिला रूप है यह जब यह क्लाइंट के लिए आई टूल्स कस्टमाइज करने के लिए साइट पर जाकर उन्हें लगते हैं। ए के द्वारा यह नया सृजित जॉब है और तेजी से बढ़ रहा है।

2. एफडीई की संख्या बढ़ रही है

ए के आने के बाद एचडी का जब तेजी से बढ़ रहा है। एक कंपनी है जिसका नाम है भाई काम भी नेता जो नया स्टार्टअप लगाने में मदद करने वाली कंपनी है इसके बोसगिरी ट्रेन ने बताया कि उनकी कंपनी में एफडीआई के लिए नई प्रोफाइल के 63 जॉब है। जबकि पिछले साल इन जॉब में सिर्फ चार वर्कर्स की जरूरत थी यह आई के एजेंट का फैल होने से इनको निर्मित को उन क्षेत्रों को समझने की जरूरत है जहां उनका मनुष्य से सामना होता है उदाहरण के लिए कस्टमर सर्विस एजेंट बनने वाले प्रोग्रामर को मानवीय स्किल की जरूरत है उसे यह महसूस करने की जरूरत है कि कोई हताश कस्टमर क्यों किसी मानव इंजीनियरिंग पर चिल्लाने के लिए फोन लगता है

3. (ए आई ) सिस्टम अप्लायर

स्किल डेवलपमेंट कंपनी कॉर्नर स्टोन के के हिमांशु फलसूले की कई हुई एक बार मैं आपको बताना चाहता हूं उनका स्टेटमेंट था” की वायुमों की ड्राइवर लेस करें अगर रुक जाए और पैसेंजर भी भीतर बंद हो जाए तो क्या होगा..? ऐसी स्थिति में एक ऐसे इंसान की आवश्यकता होगी जो रिमोट से समस्या हल करने में एक्सपर्ट हो। ए के आने से इन चीजों का विस्तार हो रहा है।

4. चीफ Ai ऑफीसर

ए के बाद दुनिया भर के सॉफ्टवेयर की उत्पत्ति में एक इस तरह का जब भी डेवलप हुआ है जो इन सभी भूमिकाओं को एकजुट करने वाले का कार्य करता है और उसे कहते हैं की आई अफसर। इसकी डिमांड भी तेजी से बढ़ रही है इसके पास खास तकनीकी विशेषज्ञ होती है वह कॉर्पोरेट प्रक्रियाओं से भी वाकिफ होते हैं जब यह जॉब मामूली लोगों के लिए नहीं है ईवीएम के अनुसार सामान्य बड़ी कंपनी 11 जेनरेटिव एस मॉडल का इस्तेमाल कर रही है इसलिए कंपनियों के इंचार्ज हर काम करने वाले इंजीनियरिंग विशेषज्ञ व्हीकल स्विच की जरूरत महसूस करते हैं।

ए आई चीफ ऑफिसर

कल स्विच इंजीनियर यह सर्वर बंद करने का कार्य करते हैं

जोखिम को काबू करने वाले स्पेशलिस्ट

बाट्स को सिखाने वाले इंजीनियर

डाटा को संदर्भों से जोड़ने वाले एक्सपर्ट

5. एआई (Ai.) विशेषज्ञों के जब बड़े

ए के पूरे सिस्टम में काम करने वाले एजेंट को नियमों की अराजकता से रोकने के लिए नियम तय करने का भी काम काफी अहम वर्क है। इसीलिए कुछ रिपोर्ट बताती है कि एबीसी शगुन के जब बढ़ रहे हैं।

AI

आर्थिक फंडा – भविष्य कि टेक्नोलॉजी

अब मैं आपको इस बात को समझाने के लिए एक रिपोर्ट का हवाला देता हूं। एक नामी ग्रामीण नेटवर्किंग गियर कंपनी जिसका नाम सिस्को है उसकी अगवाई में आई वर्कफोर्स सोडियम ने अमीर देश के 50 आईटी जॉब्स पर नजर डाली और एक रिपोर्ट तैयार की गई इस रिपोर्ट के निष्कर्ष में यह पाया गया कि आई प्रोग्राम्स से भी अधिक तेजी से आई जोखिम पर काबू पाने वाले विशेषागों के जब बढ़ रहे हैं। इनका काम यह तय करना होता है कि वोट्स डेटा लीख ना कर पाए।

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  1. नई नौकरियों का उदय और अवसरों का विस्तार

  2. जहां AI ने कुछ पारंपरिक भूमिकाओं को कम किया, वहीं इसने कई नई नौकरियों को जन्म भी दिया।
  3. आज Data Scientist,
  4. AI Engineer,
  5. Machine Learning Specialist,
  6. Prompt Engineer,
  7. Cyber Security Expert,
  8. AI Ethics Officer, और
  9. Automation Consultant जैसे पद अस्तित्व में हैं, जिनकी कल्पना 10–15 साल पहले करना भी कठिन था।
  10. इसके अलावा, AI ने
  11. कंटेंट क्रिएशन,
  12. डिजिटल मार्केटिंग,
  13. डिजाइनिंग,
  14. हेल्थ टेक,
  15. एजुकेशन टेक और
  16. स्टार्टअप इकोसिस्टम में भी नए अवसर खोले हैं। छोटे व्यवसाय और युवा उद्यमी अब AI टूल्स की मदद से कम लागत में बड़े स्तर पर काम कर पा रहे हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि AI रोजगार का शत्रु नहीं, बल्कि रोजगार का परिवर्तक (Job Transformer) है।
  17. कौशल (Skills) का बदलता महत्व
    Ai के युग में सबसे बड़ा बदलाव “डिग्री” से ज्यादा “कौशल” के महत्व का बढ़ना है। पहले जहां एक ही कौशल से पूरी जिंदगी नौकरी चल जाती थी, वहीं अब निरंतर सीखना (Lifelong Learning) अनिवार्य हो गया है। AI ने यह सिखाया है कि जो व्यक्ति खुद को समय के साथ अपडेट नहीं करता, वही सबसे अधिक जोखिम में होता है।
    इसका अर्थ यह नहीं कि हर व्यक्ति को AI इंजीनियर बनना होगा, बल्कि यह कि हर क्षेत्र में AI के साथ काम करने की क्षमता विकसित करनी होगी। शिक्षक के लिए AI-सहायक टूल्स का उपयोग, डॉक्टर के लिए AI-डायग्नोसिस सिस्टम की समझ, और बिजनेसमैन के लिए AI-आधारित निर्णय प्रणाली – ये सभी नई कार्य-क्षमताओं के उदाहरण हैं।
  18. नौकरियां खत्म होना स्वाभाविक और आशिक प्रक्रिया है
    इतिहास गवाह है कि जब-जब नई तकनीक आई है, तब-तब कुछ पुराने काम खत्म हुए हैं। मशीनों के आने से हाथ से कपड़ा बुनने वालों की संख्या घटी, कंप्यूटर के आने से टाइपिस्ट और फाइल-क्लर्क की जरूरत कम हुई। इसी तरह AI ने भी डेटा एंट्री, बेसिक अकाउंटिंग, कॉल सेंटर की कुछ भूमिकाएं, और रूटीन एनालिसिस जैसे कार्यों को स्वचालित (Automated) कर दिया है।
    यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि AI ने मुख्यतः उन नौकरियों को प्रभावित किया है जिनमें रचनात्मकता, निर्णय क्षमता और मानवीय संवेदना की कमी थी। यानी जो कार्य नियम-आधारित और दोहराव वाले थे, वे AI के लिए आसान साबित हुए। इससे यह स्पष्ट होता है कि AI का प्रभाव “नौकरी” पर नहीं, बल्कि “काम के तरीके” पर पड़ा है।
  19. मानव और एआई प्रतियोगी नहीं, सहयोगी
    AI को मानव का विकल्प मानना एक बड़ी गलतफहमी है। वास्तव में AI मानव के लिए एक सहायक (Assistant) की भूमिका निभा रहा है। AI तेजी से डेटा का विश्लेषण कर सकता है, लेकिन नैतिक निर्णय, भावनात्मक समझ, सामाजिक जिम्मेदारी और रचनात्मक सोच अभी भी मानव की विशेषता है।
    जो संस्थान और व्यक्ति AI को प्रतिस्पर्धी के बजाय सहयोगी के रूप में अपना रहे हैं, वे अधिक उत्पादक और सफल हो रहे हैं। इस दृष्टि से देखा जाए तो भविष्य “Human + AI” का है, न कि “Human vs AI” का।
  20. सामाजिक और शैक्षिक जिम्मेदारी
    AI से उत्पन्न बदलावों का सही लाभ तभी मिल सकता है जब शिक्षा प्रणाली और सरकारी नीतियां समय के साथ बदलें। स्कूलों और कॉलेजों में केवल रटंत ज्ञान के बजाय विश्लेषणात्मक सोच, डिजिटल साक्षरता और समस्या-समाधान कौशल पर जोर देना होगा। साथ ही, उन लोगों के लिए पुनः-प्रशिक्षण (Reskilling) और कौशल-विकास (Upskilling) की व्यवस्था जरूरी है जिनकी नौकरियां तकनीकी बदलाव से प्रभावित हुई हैं।
  21. अंतिम मूल्यांकन
    समग्र रूप से मूल्यांकन किया जाए तो AI ने न तो पूरी तरह नौकरियां छीनी हैं और न ही केवल नई नौकरियां ही दी हैं। इसने कार्य की प्रकृति, अपेक्षाओं और आवश्यक कौशलों को बदल दिया है। जो लोग परिवर्तन को स्वीकार कर रहे हैं, सीखने के लिए तैयार हैं और तकनीक के साथ आगे बढ़ रहे हैं, उनके लिए AI एक वरदान साबित हो रहा है। वहीं जो बदलाव से डरते हैं और खुद को अपडेट नहीं करते, उनके लिए यह चुनौती बन सकता है।

    अंततः यह कहा जा सकता है कि AI से नौकरियां “गई” नहीं हैं, बल्कि “रूपांतरित” हुई हैं, और नई नौकरियां निश्चित रूप से अस्तित्व में आई हैं। AI मानव श्रम को समाप्त नहीं कर रहा, बल्कि उसे अधिक बुद्धिमान, प्रभावी और मूल्यवान बना रहा है। भविष्य उन्हीं का है जो AI को समझेंगे, अपनाएंगे और उसके साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे। इसलिए AI को भय की दृष्टि से नहीं, बल्कि अवसर और विकास के माध्यम के रूप में देखना ही आज के समय की सबसे व्यावहारिक और सकारात्मक सोच है।

निष्कर्ष: AI – नौकरियों का अंत नहीं, बल्कि कार्य-जगत का पुनर्गठनकृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) को लेकर समाज में सबसे बड़ा और आम सवाल यही है कि क्या इस तकनीक ने नौकरियों को खत्म कर दिया है या फिर इसने नई नौकरियों को जन्म दिया है। इस प्रश्न का उत्तर न तो पूरी तरह “हां” है और न ही पूरी तरह “नहीं”। वास्तविकता इन दोनों के बीच स्थित है। AI ने निश्चित रूप से पारंपरिक और दोहराव वाली कुछ नौकरियों को प्रभावित किया है, लेकिन साथ ही इसने नई तरह की नौकरियों, कौशलों और अवसरों का भी निर्माण किया है। इसलिए यह कहना अधिक उचित होगा कि AI ने नौकरियों को समाप्त नहीं किया, बल्कि कार्य-जगत का स्वरूप बदल दिया है।

Kedar Lal
Kedar Lalhttps://arthikfunda.com
मेरा नाम केदार लाल है ( K. L. Ligree)। मैं भारत देश के अंतर्गत राजस्थान राज्य के करौली जिले के टुड़ावली गांव का रहने वाला हूँ। मैंने राजस्थान विश्वविधालय - जयपुर,वर्धमान महावीर विश्वविद्यालय - कोटा एवं जम्मू कश्मीर विश्वविद्यालय से बीए, एमए, बीएड, एमबीए ( मास्टर ऑफ़ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन) एवं बीजेएमसी ( बेचलर ऑफ़ जर्नालिज्म, पत्रकारिता ) कि शिक्षा प्राप्त कि है। कुछ वर्षों तक मैं राजस्थान एवं देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका एवं दैनिक भास्कर में विपणन ( Marketing ) कार्य भी किया हैं. भारत तथा दुनिया में अपनी खास पहचान रखने वाले दो अंग्रेजी समाचार पत्रों "टाइम्स ऑफ़ इंडिया" एवं "हिंदुस्तान टाइम्स" मैं मार्केटिंग एवं प्रबंधन कार्यों में सन लगे रहा हूं। बचपन एवं युवावस्था में में शर्मिला एवं खूबसूरत व्यक्तित्व का धनी रहा हूं. मैं एक रोमांटिक एवं मजाकिया प्रवृत्ति का इंसान हूँ। एमबीए के बाद मैंने गोदरेज, टाटा AIG, आइडिया एवं वोडाफोन जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्य किया है। मैं करौली जिले के कई विद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में काफी समय तक शिक्षण कार्य से जुड़ा रहा हूं। रुचियाँ -- मुझे समाचार पत्र पढ़ने, न्यूज़ देखने, डिबेट देखने, घूमने का शोक है। मुझे पारिवारिक और मनोरंजक फिल्में देखने का भी काफी शौक है। मुझे घूमना और लॉन्ग ड्राइव पर जाना अच्छा लगता है। मैं पर्वतीय क्षेत्र में घूमने का शौकीन हूँ। मुझे पढ़ने और अपने ब्लॉग के लिए आर्टिकल लिखने का भी काफी शौक है। मेरे दो ब्लॉग है जिनके लिए मैं आर्टिकल लिखता हूं और मैं फुल टाइम कंटेंट क्रिएटर हूं। मेरे ब्लॉग -- 1. प्रेरणा डायरी ( ब्लॉग ) prernadayari.com (ब्लॉगर ) 2. आर्थिक फंडा (ब्लॉग ) arthikfunda.com ( वर्डप्रेस) 3. इश्क़बाज, ishkbaj.com 4. वित्तीय फंडा, vittiyfunda.com ( वर्डप्रेस ) 5. प्रेरित डायरी, preritdayri.wordpress.com मैं बचपन से ही लेखक, पत्रकार, और एक अच्छा शिक्षक बनना चाहता था। अगर अब तक कि मेरी जिंदगी का मूल्यांकन करें, तो मेरे कुछ सपने पूरे हुए हैं, जबकि कुछ अभी भी अधूरे हैं। फिलहाल में फुल टाइम कंटेंट क्रिएटर हूं। और गूगल, ब्लॉगर तथा वर्डप्रेस जैसे प्लेटफार्म पर लोकप्रिय कंटेंट क्रिएटर और आर्टिकल राइटर बनना चाहता हूं। इस क्षेत्र में मुझे काफी लोकप्रियता मिल रही है। आप सभी पाठकों का प्यार मेरी सबसे बड़ी ताकत है। अपने परिवार के साथ मै खुशहाल जिंदगी बिता रहा हूं।
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