शुक्रवार, अप्रैल 17, 2026
Google search engine
होमBusinessक्या है म्युचुअल फंड..? म्युचुअल फंड निवेश के लिए धैर्य के साथ...

क्या है म्युचुअल फंड..? म्युचुअल फंड निवेश के लिए धैर्य के साथ सटीक रणनीति जरूरी है।

म्युचुअल फंड आज के समय में भारत में एक पसंदीदा निवेश साधन के रूप में उभरा है। Arthikfunda.com की आज की पोस्ट में हम म्युचुअल फंड से जुड़े हर पहलू पर चर्चा करेंगे। म्युचुअल फंड क्या होता है.? इसके निवेश में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए..? कब इन्वेस्टमेंट करना चाहिए..? म्युचुअल फंड में निवेश के तरीके क्या है..? सब के जरिए म्यूचुअल फंड निवेश लाभदायक है या नहीं..? आज की पोस्ट में इन सभी सवालों के जवानों को जानेंगे साथ ही म्युचुअल फंड इन्वेस्टमेंट से जुड़ी हर बात को जानने का प्रयास करेंगे। आज के इस आर्टिकल को हम निम्न बिंदुओं के अंतर्गत रीड करेंगे-

टेबल ऑफ़ कंटेंट

  1. क्या होता है मुचूअल फंड्स..?
  2. इस समय म्युचुअल फंड निवेश का फैसला..सही या गलत..?
  3. म्युचुअल फंड निवेश का सबसे अच्छा समय क्या है..?
  4. कैसे निर्धारित करें म्युचुअल फंड निवेश का सही समय..?
  5. म्युचुअल फंड में एसआईपी के जरिए निवेश की सही रणनीति।
  6. लक्ष्य के मुताबिक निवेश राशि तय करें
  7. आमदनी बढ़ाने पर शिप बढ़ाएं
  8. अपनी जोखिम के आधार पर स्कीम चुने
  9. बहुत ज्यादा डायवर्सिफिकेशन से बचें
  10. पोर्टफोलियो में बार-बार बदलाव नहीं करें
  11. कम निवेश में ज्यादा रिटर्न
  12. फ्लैक्सिबिलिटी
  13. कंपाउंडिंग का फायदा
  14. अनुशासित निवेश
  15. बाजार के उतार-चढ़ाव की एवरेज
  16. वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर निवेश करे
  17. म्युचुअल फंड में निवेश करने के दो अच्छे प्रकार
  18. निष्कर्ष।
  19. महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

पहले यह समझे कि, म्यूचुअल फंड क्या होता है..?

भारत में पहला म्युचुअल फंड यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (यू टी आई ) था जिसे 1964 में स्थापित किया गया था। वर्तमान में देश में 46 एसेट मैनेजमेंट कंपनियां एमसी है जो म्युचुअल फंड का संचालन करती हैं।ये कंपनियां म्युचुअल फंड एसोसिएशन ऑफ इंडिया (अम्फी) की सदस्य हैं। इसीलिए इन्हें म्युचुअल फंड हाउस भी कहा जाता है।

म्युचुअल फंड क्या है.? म्यूचुअल फंड आपको अन्य निवेशकों के साथ मिलकर “पारस्परिक रूप से” स्टॉक, बांड और अन्य निवेश खरीदने के लिए अपना पैसा जमा करने की सुविधा देते हैं।इनका संचालन पेशेवर धन प्रबंधकों द्वारा किया जाता है जो निर्णय लेते हैं कि कौन सी प्रतिभूतियां खरीदनी हैं (स्टॉक, बांड, आदि) और उन्हें कब बेचना है।आपको फंड में किए गए सभी निवेशों और उनसे होने वाली आय के बारे में जानकारी मिलती है।वे विविध प्रकार की निवेश रणनीतियों और शैलियों की पेशकश करते हैं।म्यूचुअल फंड में निवेश क्यों करें?विविधताम्यूचुअल फंड आपको घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्टॉक, बांड और कमोडिटीज सहित परिसंपत्ति वर्गों के व्यापक मिश्रण तक पहुंच प्रदान करते हैं। कम लागतचूंकि म्यूचुअल फंड एक समय में बड़ी मात्रा में प्रतिभूतियों को खरीदता और बेचता है, इसलिए इसकी लेनदेन लागत आमतौर पर एक व्यक्तिगत निवेशक के रूप में आपके द्वारा भुगतान की जाने वाली लागत से कम होती है

इस समय म्युचुअल फंड निवेश का फैसला.. सही है या गलत..?

म्युचुअल फंड में निवेदिता रहना एक अच्छा फैसला हो सकता है लेकिन यह आपकी वित्तीय लक्षण जोखिम उठाने की क्षमता और बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है अगर आपका निवेश लॉन्ग टर्म यानी लंबी अवधि के लिए है तो बाजार की छोटी-मोटी गिरावट से घबराने की जरूरत नहीं है। मैंने देखा है कि म्यूचुअल फंड में लॉन्ग टर्म निवेश अधिक फायदेमंद साबित होता है।

म्युचुअल फंड निवेश के लिए सबसे अच्छा समय कौन सा है..?

वित्त विशेषज्ञों के मुताबिक म्यूचुअल फंड में निवेश करने का हर वक्त सही वक्त होता है। आप अभी निवेश करने के लिए म्यूचुअल फंड का उपयोग कर सकते हैं और आज ही अपना फंड बनाना शुरू कर सकते हैं अपनी तरलता और लचीलेपन के कारण म्युचुअल फंड आपके पैसे को बढ़ाने का एक शानदार तरीका है। और जितनी जल्दी आप अपनी निवेश यात्रा शुरू करेंगे उतने ही बेहतर रिटर्न और वेल्थ क्रिएशन का आनंद लेने की संभावना बढ़ेगी। फिर भी म्युचुअल फंड में निवेश शुरू करने का आपका फैसला आपकी जोखिम से सिलता और वित्तीय लक्षण पर आधारित होना चाहिए लेकिन यहां कुछ कारक दिए गए हैं जो आपको अपना निवेश शुरू करने के लिए सही समय का अंदाजा लगाने में मदद करते हैं।

म्युचुअल फंड निवेश का सही समय कैसे निर्धारित करें –

  • निवेश पर रिटर्न
  • अगर आप लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न हासिल करना चाहते हैं तो इक्विटी फंड आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प है आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि अच्छे रिटर्न का आनंद लेने के लिए आपको कम से कम 3 साल तक निश्चित रहना होगा अपनी जरूरत के अनुसार आप इस अपने निवेश का समय तय कर सकते हैं
  • इन्वेस्टमेंट होराइजन
  • घर के डाउन पेमेंट वाहन खरीदने छुट्टी मनाने आदि जैसे अल्पकालिक लक्षण के लिए आप शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट है रोशन चुन सकते हैं इसके लिए डेट फंड में निवेश सही रहता है वैकल्पिक रूप से शादी शिक्षा रिटायरमेंट आदि जैसे लॉन्ग टर्म लक्षण के लिए आप इक्विटी फंड का विकल्प चुन सकते हैं।
  • मार्केट की स्थिति म्युचुअल फंड बाजार से जुड़े उत्पाद हैं इसलिए बाजार की रुझान को देखकर अपने निवेश के समय की गणना कर सकते हैं। यदि आप ज्यादा जोखिम लेने की क्षमता रखते हैं तो किसी भी समय बाजार में प्रवेश करें यदि आप जोखिम से बचना चाहते हैं तो बाजार में करेक्शन अरशद गिरावट होने पर ही प्रवेश करें।
  • जोखिम उठाने की क्षमता
  • अपने जोखिम प्रोफाइल का विश्लेषण करने के लिए आपको अपने निवेश की राशि अवधि फंड का प्रकार और निवेश करने के सबसे अच्छे समय इंद्र धारण में मदद मिलती है। जोखिम के प्रति अपनी सहनशीलता के आधार पर अपडेट इक्विटी और हाइब्रिड फंड में से चुन सकते हैं यदि आप जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं तो पूंजी में तेज बढ़ोतरी के लिए इक्विटी फंड का चुनाव कर सकते हैं। अब जितनी जल्दी म्युचुअल फंड में निवेश करना शुरू करेंगे आपको उतना ही ज्यादा रिटर्न मिलेगा।

मुझे मार्केट पर शुरू की गई एसआईपी से ज्यादा वेल्थ क्रिएशन होता है

हाल ही में की गई कुछ अध्ययनों के मुताबिक मार्केट के उच्चतम स्तर के दौरान शुरू किए गए सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट से लंबे समय में ज्यादा रकम जमा होती है। यानी मार्केट की गिरने का इंतजार करने के बजे बाजार में लंबे समय तक बना रहना ज्यादा महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक बाजार में बने रहना आपको फायदा देता है और आपको इन्वेस्टमेंट की नजरिया से मच्यायोर बनती है। अगर आप वाकई में लॉन्ग टर्म शिप से वेल्थ क्रिएट करना चाहते हैं तो आपको शुरुआत करते समय बाजार के उतार-चढ़ाव की चिंता करने की जरूरत नहीं है इसके बजाय आपको अपने वित्तीय लक्ष्य के करीब पहुंचने पर अपनी निकासी की रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। इस बात को एक उदाहरण के माध्यम से समझते हैं। उदाहरण – एक निवेशक ने जनवरी 2009 में बाजार में 76% गिरावट से ठीक पहले ₹10000 की मासिक एसआईपी शुरू की थी। मार्च 2025 तक उसने कुल 20 पॉइंट 7 लख रुपए का निवेश किया और 15.6% के औसत रिटर्न पर उसके पास कल 91.5 लख रुपए जमा होंगे वही दूसरा निवेदक जिसने मार्च 2010 में बाजार में गिरावट आने के बाद शिप शुरू की थी उसका कुल निवेश 19.2 लख रुपए हुआ और 15.9 प्रतिशत के थोड़े ज्यादा औसत रिटर्न के बावजूद उसकी कुल रकम 78.3 लख रुपए ही रही।

एसआईपी कभी भी शुरू करें, लॉन्ग टर्म में फायदा ही मिलेगा

म्युचुअल फंड में शिप कभी भी शुरू कर सकते हैं इसके लिए मार्केट के अनुकूल होने का इंतजार करना बेकार रहता है मार्केट को टाइम करने के बजाय जितना ज्यादा टाइम शिप के जरिए निवेदिता रहेंगे, उतना ही फायदे में रहेंगे खासकर लंबी अवधि में एसआईपी के माध्यम से नियमित निवेश करने से बाजार की सत्ता का जुखिम कम होता है और लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।

लक्ष्य के मुताबिक निवेश राशि तय करें

आपको कितने वर्ष में कितनी रकम की जरूरत है और उसके लिए हर मां याटेमाही में कितना निवेश करना सही होगा इसका आकलन करें। चाहे तो सिप कैलकुलेटर इस्तेमाल करें या वित्त विशेषज्ञ से सलाह लें।

यदि आमदनी बढ़ने लगे, तो एसआईपी भी बढ़ाये

हर साल यह जब भी आपकी सैलरी या आमदनी बढ़ती है तो शिप की रकम को भी उसी अनुपात में बढ़ाना चाहिए। यह आदत न केवल आपकी बचत की आदतों में सुधार करती है बल्कि आपको अच्छा प्रॉफिट भी देती है। आमतौर पर शिप की रकम में हर साल कम से कम 10% का इजाफा करने की सलाह दी जाती है आप शिप की रकम बढ़ाने के लिए स्टेप अप शिप का विकल्प चुन सकते हैं।

अपने जोखिम के आधार पर स्कीम चुने

कम जोखिम वाले लोग इंडेक्स फंड मल्टी ऐसेट फंड मल्टी कैप फंड हाइब्रिड फंड आदि में निवेश कर सकते हैं ज्यादा रिटर्न की कर रखने वाले और ज्यादा जोखिम ले सकने वाले लोगों को इक्विटी ग्रोथ प्लान चुनना चाहिए

बहुत ज्यादा डायवर्सिफिकेशन से बचें

अपने पोर्टफोलियो में बहुत ज्यादा स्कीम में रखने से उनके मेंटेनेंस करना कठिन हो जाता है। प्रचलित और अच्छी योजनाओं तक ही अपने इन्वेस्टमेंट को सीमित रखें। किसी वित्तीय सलाहकार की मदद लेकर कुछ अच्छी और अपने बजट जोखिम तथा लक्ष्य पर आधारित बेहतरीन स्कीम का चयन करें। अच्छी इसकी में हमारे पोर्टफोलियो को मजबूत बनाती हैं।

पोर्टफोलियो में बार-बार बदलाव न करें

सिप को जितना लंबे समय तक कायम रखेंगे रिटर्न भी उतना अच्छा मिलेगा इसलिए पोर्टफोलियो में बार-बार बदलाव ने करें एक स्कीम या फंड से दूसरे में स्विच करने के लिए शिप बंद करना कोई अच्छा विकल्प नहीं है।

एसआईपी के जरिए निवेश से मिलते हैं यह पांच बड़े फायदे

1.कम निवेश में ज्यादा रिटर्न

शिप में आप 250 रुपए जैसी छोटी राशि से हर महीने निवेश शुरू कर सकते हैं। लंबी अवधि में एसआईपी के जरिए छोटे निवेश से बड़ी रकम जुटा सकते हैं।

2. फ्लैक्सिबिलिटी

शिप में आर्थिक संकट के समय आपके पास निवेश को स्थाई रूप से रोकने का विकल्प भी होता है जो अच्छा रहता है शिप को सुविधा अनुसार मासिक तिमाही या छमाही किया जा सकता है। यह सुविधा ग्राहक को इच्छा के जरिए अपनी पॉकेट मनी के आधार पर इन्वेस्ट करने की सुविधा प्रदान करती है।

3. कंपाउंडिंग का फायदा

आपने केवल अपनी मूल रकम पर बल्कि समय के साथ उसे पर जुड़ने वाले रिटर्न पर भी रिटर्न कमाते हैं। ऐतिहासिक आंकड़ों को देखें तो शिप के जरिए किए गए निवेश पर सालाना 12% तक का रिटर्न मिल जाता है

4. अनुशासित निवेश

सीप के जरिए नियमित बचत और वित्तीय अनुशासन की आदत बनती है। नियमित बचत और सेविंग करने वाले व्यक्ति के पास हमेशा फंड उपस्थित रहता है। इसी आधार पर आप हर माह या हर तिमाही में एक निश्चित रकम शिप के जरिए निवेश कर सकते हैं जो आपके भविष्य सिक्योर क्नाएगी। यह आदतें धीरे-धीरे आपके अंदर एक वित्तीय अनुशासन पैदा करती है और आपके रकम बढ़ाने की आदत बनती है। हमारी वित्तीय मजबूती के लिए सेविंग करना बेहद जरूरी है।

5. बाजार की उतार-चढ़ाव की एवरेजिग

फंड्स की नाव बाजार के आधार पर घटती बढ़ती रहती है जो मार्केट गिरता है तो आप ज्यादा यूनिट खरीद पाते हैं और जब मार्केट ऊपर जाता है तो काम यूनिट खरीद पाते हैं पर उनकी कीमत ज्यादा होती है।

वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर निवेश करें

बाजार की अस्थिरता और अल्पकालिक उतार चढ़ाव को देखते हुए यह जरूरी है कि निवेशक अपने दीर्घकालिक लक्षणों पर ध्यान केंद्रित करें। यह ध्यान रखें कि बाजार में होने वाले उतार चढ़ाव नियमित हैं और इनसे बचने के लिए अपने दीर्घकालीन लक्ष्य पर निवेश करें। म्युचुअल फंड में निवेश का सही तरीका धैर्य और अनुशासन के साथ-साथ निवेश के लिए सटीक रणनीति अपनाना है। नियमित रूप से शिप यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के माध्यम से निवेश करने से बाजार के उतार चढ़ाव को संतुलित किया जा सकता है। ऐसा करके आप पावर आफ कंपाउंडिंग का लाभ उठा सकते हैं स्थिरता की तलाश करने वाले निवेशकों के लिए मल्टी कैप फंड्स और फ्लेक्सी कैप फंड्स जैसे डायवर्सिफाइड विकल्प उपलब्ध है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की भावनाओं के आधार पर निवेश के निर्णय ले। बाजार की दुनिया में भावनाओं को ध्यान में रखकर निवेश करने वाले को मूर्ख समझ जाता है। म्युचुअल फंड निवेश करते समय वित्तीय लक्ष्य और सही एसेट तथा एलोकेशन को ध्यान में रखकर योजना बंद निवेश करना चाहिए।

फाइनेंशियल मार्केट अनिश्चित होते हैं और अक्सर इन पर कई बातों का प्रभाव पड़ता है। इन ए निश्चित तौर से निपटने के लिए जरूरी है कि आप धैर्य रखें और अपने वित्तीय लक्ष्यो पर कायम रहे। इक्विटी मार्केट में निवेश के लिए सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान एक स्मार्ट और अनुशासित तरीका है इससे समय के साथ निवेश की लागत को एवरेज करने में मदद मिलती है। बाजार के उतार चढ़ाव के दौरान भी शिप जारी रखने से मार्केट को टाइम करने का लालच काम हो जाता है। मार्केट को टाइम करने की कोशिश में अच्छे मौके हाथ से निकाल सकते हैं वास्तव में जो लोग बार-बार निवेश से बाहर निकल जाते हैं वह कुछ अच्छे रिटर्न के मौके खुद देते हैं। और उनका मुनाफा घट सकता है लगातार लंबे समय तक निवेदिता रहने से ने केवल आपकी लॉन्ग टर्म ग्रंथ की संभावना है बढ़ती हैं बल्कि आपके भीतर एक नियमित बचत करने की अच्छी आदत भी पैदा होती है।

म्युचुअल फंड में निवेश करने के दो प्रमुख तरीके –

  1. सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एस आई पी )
  2. सिप या सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान आपको नियमित अंतराल पर आमतौर पर मासिक आधार पर एक निश्चित राशि निवेश करने की अनुमति देता है। इस तरीके से रूपी कास्ट एवरेज इन का फायदा मिलता है जहां आप कीमतें कम होने पर अधिक यूनिट खरीदने हैं और कीमतें अधिक होने पर काम यूनिट खरीदने हैं। जिस जिस समय के साथ औसत लागत कम हो जाती है। सिप लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आदर्श हैं क्योंकि वह अनुशासित निवेश और जोखिम प्रबंधन को बढ़ावा देते हैं। उदाहरण के लिए म्यूचुअल फंड स्कीम में हर महीने ₹1000 का निवेश करके आप चक्रवर्ती ब्याज की शक्ति के कारण कुछ ही वर्षों में काफी धन अर्जित कर सकते हैं
  3. एक मुस्त निवेश
  4. इस पद्धति में एक बार में बड़ी राशि का निवेश करना शामिल है यह तब उपयुक्त है जब आपके पास निवेश करने के लिए पर्याप्त राशि हो और आप इसे एक बार में ही लगाना चाहते हो। जब परिसंपत्ति की कीमतें कम होती है तो बाजार में गिरावट के दौरान एक मुफ्त निवेश अधिक फायदेमंद हो सकता है दोनों तरीकों के अपने फायदे हैं और इन्हें व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति और निवेश लक्षण के आधार पर चुना जा सकता है

निष्कर्ष –

म्युचुअल फंड आज के समय में एक पसंदीदा निवेश क्षेत्र के रूप में उभरा है। ऊटी के 1964 के दौर से लेकर आज तक के समय में म्युचुअल फंड ने एक लंबी यात्रा तय की है जो उतर चढ़ावों से भरी रही है। आज की दौड़ में म्युचुअल फंड इन्वेस्टमेंट का एक बेहतरीन तरीका है पर इसे समझने की आवश्यकता है। हर व्यक्ति को अपने पोर्टफोलियो और बैलेंस को मध्य नजर रखते हुए अपना निवेश करना चाहिए। म्युचुअल फंड में निवेश करते समय बाजार के उतार चढ़ाव धैर्य और वित्तीय अनुशासन को मध्य नजर रखते हुए अपने बैलेंस पर फोकस करना चाहिए। म्युचुअल फंड में इनवेस्टमेंट का फैसला आपके लिए अच्छा साबित हो सकता है। लेकिन आप इस उतार-चढ़ाव की दौड़ से भरे हुए मार्केट में इन्वेस्टमेंट करने से पहले पूरा ज्ञान प्राप्त कर ले। इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं उन स्कीम मौका बारीकी से अध्ययन करें उसके बाद ही निवेश का फैसला लें।

महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

क्वेश्चन 1. म्युचुअल फंड क्या होता है..?

उत्तर — म्यूचुअल फंड एक ऐसा निवेश साधन है, जहाँ कई निवेशक अपना पैसा एक साथ पूल करते हैं, जिसे फिर एक पेशेवर फंड मैनेजर द्वारा स्टॉक, बॉन्ड और अन्य प्रतिभूतियों में निवेश किया जाता है. यहाँ म्यूचुअल फंड के बारे में कुछ और बातें दी गई हैं:निवेश का तरीका:म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए, आप एक म्यूचुअल फंड कंपनी में शेयर खरीदते हैं, जो फंड के स्वामित्व का एक हिस्सा होता है.

क्वेश्चन नंबर 2… म्युचुअल फंड में निवेश कैसे करें..?

इसे जरूर पढ़े –

प्रेरणा डायरी ( ब्लॉग)

prernadayari.com

दोस्तों, नमस्कार, हमारे सभी के परिवारों में पढ़ने और प्रतियोगी परीक्षाओं कि तयारी करने वाले छात्र मिलते है, परीक्षा में सफलता के लिए उचित मार्गदरसं Or प्रेरणा कि महती भूमिका होती है, आप खुद भी “प्रेरणा डायरी ब्लॉग” को पढ़े और अपने बच्चों को भी इसे पड़ने के लिए प्रेरित करें, यह ब्लॉग छात्रों में उत्साह, ऊर्जा, और पढने में रुचि उत्पन्न करता है, यह ब्लॉग छात्रों में सकारत्मक सोच, लक्ष्य, सफलता, खुशी, प्रेरणा, कामयाबी, जैसी नायाब चीजें हासिल करने के रास्ते सुझाता है, आज ही इसे पढे – prernadayari.com , प्रेरणा डायरी ( ब्लॉग)

चीफ अडिटर -केदार लाल ( सिंह साब)

Kedar Lal
Kedar Lalhttps://arthikfunda.com
मेरा नाम केदार लाल है ( K. L. Ligree)। मैं भारत देश के अंतर्गत राजस्थान राज्य के करौली जिले के टुड़ावली गांव का रहने वाला हूँ। मैंने राजस्थान विश्वविधालय - जयपुर,वर्धमान महावीर विश्वविद्यालय - कोटा एवं जम्मू कश्मीर विश्वविद्यालय से बीए, एमए, बीएड, एमबीए ( मास्टर ऑफ़ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन) एवं बीजेएमसी ( बेचलर ऑफ़ जर्नालिज्म, पत्रकारिता ) कि शिक्षा प्राप्त कि है। कुछ वर्षों तक मैं राजस्थान एवं देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका एवं दैनिक भास्कर में विपणन ( Marketing ) कार्य भी किया हैं. भारत तथा दुनिया में अपनी खास पहचान रखने वाले दो अंग्रेजी समाचार पत्रों "टाइम्स ऑफ़ इंडिया" एवं "हिंदुस्तान टाइम्स" मैं मार्केटिंग एवं प्रबंधन कार्यों में सन लगे रहा हूं। बचपन एवं युवावस्था में में शर्मिला एवं खूबसूरत व्यक्तित्व का धनी रहा हूं. मैं एक रोमांटिक एवं मजाकिया प्रवृत्ति का इंसान हूँ। एमबीए के बाद मैंने गोदरेज, टाटा AIG, आइडिया एवं वोडाफोन जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्य किया है। मैं करौली जिले के कई विद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में काफी समय तक शिक्षण कार्य से जुड़ा रहा हूं। रुचियाँ -- मुझे समाचार पत्र पढ़ने, न्यूज़ देखने, डिबेट देखने, घूमने का शोक है। मुझे पारिवारिक और मनोरंजक फिल्में देखने का भी काफी शौक है। मुझे घूमना और लॉन्ग ड्राइव पर जाना अच्छा लगता है। मैं पर्वतीय क्षेत्र में घूमने का शौकीन हूँ। मुझे पढ़ने और अपने ब्लॉग के लिए आर्टिकल लिखने का भी काफी शौक है। मेरे दो ब्लॉग है जिनके लिए मैं आर्टिकल लिखता हूं और मैं फुल टाइम कंटेंट क्रिएटर हूं। मेरे ब्लॉग -- 1. प्रेरणा डायरी ( ब्लॉग ) prernadayari.com (ब्लॉगर ) 2. आर्थिक फंडा (ब्लॉग ) arthikfunda.com ( वर्डप्रेस) 3. इश्क़बाज, ishkbaj.com 4. वित्तीय फंडा, vittiyfunda.com ( वर्डप्रेस ) 5. प्रेरित डायरी, preritdayri.wordpress.com मैं बचपन से ही लेखक, पत्रकार, और एक अच्छा शिक्षक बनना चाहता था। अगर अब तक कि मेरी जिंदगी का मूल्यांकन करें, तो मेरे कुछ सपने पूरे हुए हैं, जबकि कुछ अभी भी अधूरे हैं। फिलहाल में फुल टाइम कंटेंट क्रिएटर हूं। और गूगल, ब्लॉगर तथा वर्डप्रेस जैसे प्लेटफार्म पर लोकप्रिय कंटेंट क्रिएटर और आर्टिकल राइटर बनना चाहता हूं। इस क्षेत्र में मुझे काफी लोकप्रियता मिल रही है। आप सभी पाठकों का प्यार मेरी सबसे बड़ी ताकत है। अपने परिवार के साथ मै खुशहाल जिंदगी बिता रहा हूं।
RELATED ARTICLES

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home2/arthikfunda/public_html/wp-includes/functions.php on line 5481