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महंगाई एक ऐसा आर्थिक वित्तीय और फाइनेंशियल कारक है जो हर इंसान को प्रभावित करता है। पिछले कुछ महीने पहले ही रिजर्व बैंक ने रेपो रेट एवं ब्याज दरों में कटौती की थी और एक बार फिर ऐसी ही कटौती की संभावना बन रही है। लेकिन हम चर्चा इस मुद्दे पर करेंगे की अगर रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कटौती की तो क्या होगा..? इसके क्या आर्थिक और वित्तीय प्रभाव पड़ेंगे..? आज का यह आर्टिकल आपके इन्हीं सवाल और उलझन को दूर करेगा और महंगाई के बारे में आपको मौजूदा स्थितियों से अवगत कराएगा। तो लिए बिना वक्त की बर्बादी किए हुए हम अपने आर्टिकल में आगे बढ़ते हैं, और इस चीज को समझते हैं।
1. महंगाई में बड़ी गिरावट दर्ज :

महंगाई से राहत मिल चुकी है, जारी हुए नये आंकड़ों को देखकर तो यही लगता है, कि महंगाई काफी निम्र्तर स्तर पर आ गई है। जून के महीने समेत पिछले कुछ महीनो में रिटेल महंगाई सिर्फ 2.1% प्रतिशत रही है. जब किसी एक वित्तीय क्षेत्र में बदलाव होता है तो उसके असर बाकी क्षेत्रों पर भी नजर आते हैं। अब लोन कि किस्ते और भी घट सकती हैं। कुशवाहा पूर्वी रिजर्व बैंक ने रेपो रेट और और ब्याज दरों में कमी की थी उसके बाद एक बार फिर रिजर्व बैंक में संकेत दिए हैं कि वह ब्याज दरों में और भी कटौती कर सकती है। यह आर्थिक, वित्तीय,औफाइनेंशियल,गतिविधियों के लिए खुशखबरी है। रिजर्व बैंक ने ऐसे संकेत दिए हैं कि अगस्त में एक बार फिर से रेपो रेट घटाई घटाई जा सकती है। R.B.I के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एक संवाददाता सम्मेलन में मंगलवार को कहा कि तटस्थ नीति का यह मतलब नहीं है कि नीतिगत दर नहीं घटाई जा सकती। हाल ही में रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी ) की बैठक हुई थी। एमपीसी जरूरत पड़ने पर इसमें और कटौती कर सकती है।
2 माह में 2 बार घटी रेपो रेट :
पिछले माह june मे ही रेपो रेट 0.50% से घटाकर 5.50% कर दी थी। फरवरी से अब तक इसमें एक प्रतिशत की कटौती हो चुकी है. रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट एवं ब्याज दरों में कटौती एक महत्वपूर्ण आर्थिक और फाइनेंशियल घटनाक्रम माना जाता है। क्योंकि इस फैसले के बाद इन बैंक अपने हिसाब किताब के फैसलों पर निर्णय लेती है। बैंक इसी रेट के हिसाब से लोन की दरें भी तय करते हैं।
रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने समझाया कि तटस्थ नीति का मतलब है की जरूरत पड़ने पर कोई भी निर्णय लिया जा सकता है। नीतिगत दरें बढ़ाई जा सकती हैं..। और घटाई भी जा सकती हैं..। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक अप्रैल जून तिमाही में महंगाई के आंकड़ों का विश्लेषण करेगी इसके बाद ही आगे के अनुमान और उसके हिसाब से रेट एडजस्टमेंट पर फैसला किया जाएगा।
रिजर्व बैंक के अनुमान से नीचे आई महंगाई :
महंगाई रिजर्व बैंक की अनुमान से से भी नीचे आई है और इसके और भी कम होने के आसार हैं.
1. केंद्रीय बैंक ने 2025 26 में रिटेल महंगाई और स्तन 3.7% रहने का अनुमान लगाया था लेकिन जून में यह 2 % प्रतिशत के करीब आ गई।
2. अप्रैल जून में औसत रिटेल महंगाई घटकर 2.7 प्रतिशत रह गई यह भी काम है आरबीआई का अंदाजा था कि इस दौरान महंगाई 2.9% रहेगी. यानी रिजर्व बैंक ने जो अनुमान लगाए थे महंगाई उनसे भी कम रही है।
जुलाई-अगस्त में 1% प्रतिशत तक रह सकती है रिटेल महंगाई :
महंगाई में गिरावट आना में केवल भारत देश बल्कि जनता के लिए भी काफी राहत भरी खबर है। पिछले कुछ वर्षों में लोग महंगाई से काफी परेशान रहे हैं। ऐसे में काफी राहत भरी एक गुड न्यूज़ है।
अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी सिटी ने कहा है कि भारत में हालात ऐसे हैं कि जुलाई-अगस्त के महीने में रिटेल महंगाई 1.1 % प्रतिशत के रिकार्ड निचले स्तर तक आ गई है। सिटी के मुताबिक 1 अप्रैल से शुरू वित्त वर्ष 2025 26 में औसत महंगाई दर घटकर 3.2 प्रतिशत तक रह सकती है। यह 1990 के बाद अब तक की सबसे कम रिटेल महंगाई दर होगी। अर्थशास्त्रियों को यह आंकड़े प्रेरित करने वाले हैं। लोगों के लिए भी एक मानसून के दिनों में राहत भरी खबर है।
रेपो रेट और ब्याज दर घटाने की जरूरत क्यों है..?
1. जून में कारों की बिक्री 18 महीना के निचले स्तर पर आ गई।
2. अप्रैल जून में टॉप सात शहरों में घरों की बिक्री 20% घट गई. अगर रेपो रेट एवं ब्याज दरें घटे, तो आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है।
3. जून में रत्न और गहनों का निर्यात 14 पॉइंट 25 प्रतिशत घट गया। और हीरो के आयात में भी 7% से ज्यादा की गिरावट आई। रत्न जड़ित आभूषणों का भारत बड़े पैमाने पर विदेश में निर्यात करता है।
ग्रोथ घटी तो रेपो रेट और घटेगा :
एमपीसी अगस्त की बैठक में नीतिगत ब्याज दरों पर फैसले से पहले दो तरफा विश्लेषण किया जाएगा। न सिर्फ भविष्य में महंगाई पर बल्कि देश की आर्थिक विकास दर पर भी गौर किया जाएगा यह अगर घटी, तो दरें भी घटाई जा सकती हैं।


