सोने की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने और शेयर मार्केट की स्वस्थ चलने भारतीय इन्वेस्टर्स को दुविधा में डाल दिया है। अब निवेदक यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि क्या शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करना चाहिए या फिर गोल्ड में..? आर्थिक फंडा ब्लॉग ( https://arthikfunda.com) की आज की पोस्ट इसी बात की जांच पड़ताल करेगी। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक शुक्रवार को देश भर में 24 कैरेट सोने की औसत कीमत 1.13 लख रुपए प्रति 10 ग्राम से ऊपर रही। अब दूसरी तरफ बात करते हैं शेयर मार्केट की। तो इसी दिन यानी सेम डे सेम सेक्स 80426 पर बंद हुआ। अब अगर दोनों की तुलना करें तो सोना और सेंसेक्स का अनुपात 1.41 पर पहुंच गया। यह पिछले 10 साल यानी जनवरी से मार्च 2014 के बाद का सबसे ऊंचा लेवल है। 2014 में इन दोनों की तुलना का लेवल 1.5 था। हां यह जरूर है कि 2019-20 में कोविद कल के दौरान इसमें थोड़ी अस्थाई रूप से गिरावट आई थी। हालांकि कोरोना की वजह से उसे वित्त विशेषज्ञों और आम लोगों ने नजरअंदाज कर दिया था। क्योंकि आप और हम सभी ने देखा कि कोरोना कल में भारत है ही नहीं पूरी दुनिया का बाजार अस्त व्यस्त था। ऐसी हालत में होने वाले मामूली उतार चढ़ाव पर ना तो आर्थिक विशेषज्ञ (इकोनॉमिक्स expart ) ही ज्यादा माथा पट्टी करते हैं और ना आप और मेरे जैसे आम लोग ध्यान देते हैं क्योंकि हर चीज में परिस्थितियों देखी जाती हैं। अगर हम सोने और शेयर मार्केट की ताज तुलना की बात करें तो पिछले साल दिसंबर में यह अनुपात 0.97 और सितंबर 2024 के आखिर में 0.89 था।
शेयर मार्केट और गोल्ड का यह रिशु बताता है कि इक्विटी यानी शेयर बाजार की तुलना में सोना किस पैमाने पर बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। यह बात मायने रखने वाली है, और नोट करने वाली बात है. कई आर्थिक और वित्त विशेषज्ञओ का कहना है कि “सेंसेक्स पर सोना भारी है“। जो मुझे भी फिलहाल सही लग रहा है। मैं भी इस मुद्दे की कई पत्र पत्रिकाओं पुराने आर्टिकल्स और वेबसाइटों की लिखी हुई सामग्री में रिसर्च की। यदि मैं कम शब्दों में कुछ बड़ी बात कहना चाहूं, तो यही कहूंगा की — “ सोने की चमक बरकरार, थी बरकरार है और आगे भी इसके कायम रहने की पूरी उम्मीद है।
जब हम गोल्ड और सेंसेक्स यानी शेयर मार्केट की बात करते हैं और दोनों की आर्थिक रूप से तुलना करते हैं तो यह बात निकलकर सामने आती है कि शेयर बाजार की तुलना में सोना किस पैमाने पर बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। पिछले 30 साल में सोना और सेंसेक्स का मीडियम रेशों 1.04 रहा है। और कुछ समय इससे भी कम रहा है। ‘केडिया एडवाइजरी’ के डायरेक्टर अजय केड़िया ने समझाया कि — “जाहिर है लंबे समय से सोना और इक्विटी एक दूसरे के साथ संतुलन बनाते रहे हैं. सोने की कीमत सेंसेक्स के लेवल के आसपास ही रहती है, उन्होंने बताया कि यह अनुपात ऊंचा होना इस बात का संकेत होता है कि सोना इक्विटी से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। और इक्विटी कमजोर हो रही है। लेकिन मौजूदा हालात अलग है यह अनुपात ऐतिहासिक औसत के ऊपर है जो वैश्विक अनिश्चितताओं और रिजर्व बैंक जैसे केंद्रीय बैंकों की सोने की ताबडतोड़ खरीददारी का नतीजा है।
सेंसेक्स की तुलना में सोने की 30 साल में सबसे ऊंची चालान
रिटर्न 4 साल में 148 प्रतिशत।
सितंबर 2021 से अब तक सोना 148 प्रतिशत रिटर्न दे चुका है इस बीच इसकी कीमत 45600 से बढ़कर 113262 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है। दूसरी तरफ इसी दौरान सेंसेक्स 36% ही चढ़कर 59126 से 80426 तक पहुंचा … यह पिछले 30 साल में सोने की सबसे लंबी विजय लकीर है बीते एक साल में सोने ने 50% से ज्यादा रिटर्न दिया है जबकि सेंसेक्स में करीब 6% की गिरावट आई है।
रिस्क घटा रहा गोल्ड
से वेल्थ स्ट्रीट की संस्थापक सुगंध सचदेवा के मुताबिक ऊंचे अनुपात का मतलब है हैज यानी जोखिम कम करने वाला। एसिड के तौर पर गोल्ड की स्थिति मजबूत हुई है दूसरी तरफ शेयर मार्केट में गिरावट जारी दे सकती है इसका मतलब यह नहीं की सोना सेंसेक्स अनुपात जल्द ही मीन रिवर्स करेगा क्योंकि शेरों के दाम अभी ऊंचे हैं मतलब सोने में गिरावट की आशंका कम है।
एक्सपर्ट व्यूज — अजय केडिया — डायरेक्टर केडिया एडवाइजरी
आर्थिक विशेषज्ञ डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि अगले दो से तीन महीना में सोने की कीमतों में गिरावट शुरू होने की कोई वजह नजर नहीं आ रही वहीं डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 89 की तरफ बढ़ रहा है दूसरी तरफ डॉलर इंडेक्स खुद गिरने लगा है ऐसे हालात में सोने के दाम बढ़ाने की संभावना है।
उनका मानना है कि किसी को नहीं पता कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आगे की नीतियां कैसी होगी ऐसे अनिश्चित माहौल में दुनिया भर के निवेशक सोने में पैसा लगा रहे हैं।
आगे कैसे रहेंगे हालत
अब तक यह होता रहा है कि जब सोना सेंसेक्स अनुपात ऊंचा होता है तो इक्विटी में खरीदारी का मौका होता है। मसलन फरवरी 2009 में जब यह अनुपात 1.73 तक पहुंच गया था तब से सेक्स का प्राइस टू अर्निंग (PE) रेशों 10 और प्राइस टू बुक अर्थात (PB) रेशों 2.5 के नीचे स्तर पर था… मतलब शेयर मार्केट उसे समय सक्सेस था जो निवेशकों को मौका दे रहा था 2012 के बाद सोना सेंसेक्स अनुपात बढ़ाने के साथ ही इसकी वैल्यूएशन में गिरावट आई
आर्टिकल का निष्कर्ष
सोना और सेंसेक्स दोनों ने ही निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है, लेकिन सोना सेंसेक्स से आगे चल रहा है। पिछले 20 वर्षों में सोने का रिटर्न सेंसेक्स से दोगुना रहा है। अगर किसी ने 2005 से सोने में निवेश किया होता, तो उसका रिटर्न 1,200% होता, जबकि सेंसेक्स का रिटर्न 815% होता।
कुछ महत्वपूर्ण बिंदु:
- सोने की स्थिरता: सोना संकट के समय में निवेशकों के लिए एक सुरक्षित विकल्प साबित हुआ है। 2008 और 2011 जैसे बड़े संकट के समय में सोने ने अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि सेंसेक्स में भारी गिरावट आई।
- रिटर्न की तुलना: 15 वर्षों में सोने का रिटर्न निफ्टी 50 से अधिक रहा है। अगर किसी ने 2010 से हर साल दिवाली पर सोने में 10,000 रुपये निवेश किए होते, तो उसका कुल निवेश 1.5 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 4.47 लाख रुपये हो गया होता।
- विशेषज्ञों की राय: गोल्डमैन सॉक्स और मोतीलाल ओसवाल जैसी ब्रोकरेज कंपनियों का मानना है कि सोने की कीमत अभी और बढ़ सकती है। अनिश्चितता के समय में निवेशक बार-बार सोने की ओर रुख करते हैं ¹ ²।
इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि सोना निवेशकों के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है, लेकिन निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करना हमेशा बेहतर होता है।
आर्थिक फंडा
Arthik funda.com
चीफ एडिटर — केदार लाल / सिंह साहब



