इसराइल-ईरान युद्ध (2025)- क्या प्रभाव पड़ेगा भारतीय अर्थव्यवस्था पर..?

इसराइल और ईरान के बीच भीषण जंग की शुरुआत हो चुकी है जिसमें अमेरिका सहित और भी कई देश शामिल हो सकते हैं।. दोस्तों, इतिहास गवाह है और हमने और आपने कई लड़ाइयां देखी है, इसलिए यह जानते है कि युद्ध के परिणाम गंभीर होते हैं। युद्ध में न केवल जान माल की हानि होती है। बल्कि कई बार मानवीयता भी तार तार हो जाती है। युद्ध से प्रभावित देशों की अर्थव्यवस्थाएं बर्बाद हो जाती है। वैसे तो इस युद्ध से जुड़ी खबरें दिन भर टीवी चैनलों पर प्रसारित हो रही है। हर बात पर चर्चा और हर स्थिति के आकलन हो रहे हैं। जॉन माल का भारी नुकसान भी हो रहा है। स्थिति बड़ी गंभीर है। पश्चिम एशिया भीषण युद्ध, अराजकता, अशांति, और खतरे की ओर बढ़ रहा है।

आर्थिक फंदा ब्लॉग (arthikfunda.com) आज के इस आर्टिकल में यह इजरायल ईरान युद्ध की राजनीतिक पक्ष को नजरअंदाज करते हुए इसके आर्थिक पहलू पर फोकस करेंगे … क्योंकि आर्थिक फंडा में अर्थव्यवस्था से जुड़े आर्टिकल प्रकाशित होते हैं। लेकिन आज की यह पोस्ट एक खास पोस्ट साबित होने वाली है इस संदर्भ में क्योंकि युद्ध के राजनीतिक और भू-समरिक और सेंड परिणाम की व्याख्या करने वाली वेबसाइट और आर्टिकल काफी संख्या में प्रकाशित होते हैं। पर युद्ध के अर्थव्यवस्था पर होने वाले प्रभावों की विवेचना करने वाले आर्टिकल कम प्रकाशित किए जाते हैं। यह पोस्ट ईरान इजरायल युद्ध के विश्व की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर की विवेचना करेगा..? इस बात पर फोकस रहेगा कि इस युद्ध से दुनिया में क्या आर्थिक बदलाव आएंगे..? अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर क्या असर पड़ने वाला है..? कीमतें बढ़ेगी..? तेल महंगा होगा ..? जब तेल महंगा होता है तो अन्य सब चीज भी महंगी हो जाती हैं। भारत पर इस युद्ध का क्या असर पड़ेगा इस बात को भी हम समझने का प्रयास करेंगे।

1. इस युद्ध से बदल सकती है अर्थव्यवस्थाओं की चाल :

इजरायल ईरान के बीच अक्सर तनाव की स्थिति बनी रहती है। दोनों देश दशकों से एक दूसरे को चुनौती देते आ रहे हैं।शुक्रवार (13 june2025) को इसराइल ने ऑपरेशन “राइजिंग लॉयन” लॉन्च किया और इससे टकराव की नई और खतरनाक स्थिति बन गई। इसराइल ने तेहरान और नतांज के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया। खास बात यह है कि यमन लेबनान और सीरिया जैसे देशों में ईरान समर्थित मलेशिया हिज्बुल्लाह और होती आतंकी समूह युद्ध को और भड़का सकते हैं। अमेरिका और ब्रिटेन के युद्ध में शामिल होने की आशंका बनी हुई है।

इस युद्ध से सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर नकारात्मक असर पड़ेंगे। विश्व की अर्थव्यवस्था में भारी उथल-पुथल होगी। इस संघर्ष का सबसे विपरीत असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा। ईरान और फारस की खाड़ी तथा लाल सागर आदि को जोड़ने वाली हार्मोन जल संधि को बंद करने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने को मजबूर हो रही है। हार्मोन जलसंधि एक बहुत बड़ी व्यापारिक वाटर स्ट्रेट है। इस जल संधि से होकर तेल का व्यापार करने वाले जहाज आते जाते हैं। पश्चिम एशिया के देस ही विश्व के अधिकांश क्षेत्रों में तेल की आपूर्ति करते हैं। तेल उत्पादक देशओ और तेल क्षेत्रों में पढ़ने वाले जलमार्गों के बन्द होने से तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हो गई।. भारत अपनी तेल जरूर का 85 फ़ीसदी सऊदी अरब इराक और यूएई से आयात करता है। तेल की पट्टी कीमतों के कारण विश्व में महंगाई बढ़ेगी।

इस युद्ध के कारण दुनिया की अर्थव्यवस्था को एक नुकसान यह होगा कि बेरोजगारी में इजाफा होगा।

1. महंगाई बढ़ाने वाला एक और युद्ध भड़का :

वैसे तो यह दुनिया बहुत बड़ी है इसमें कहीं ना कहीं संघर्ष और विवाद चलते ही रहते हैं। लेकिन एक और एक से अधिक देशों में जब सैंया युद्ध उत्पन्न होता है तो इसका प्रभाव पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है और इसका असर कुछ ही दिनों में दिखाई देने लगता है। पिछले कई वर्षों से लगातार रूस यूक्रेन युद्ध चल रहा है। इजराइल फिलिस्तीन के मध्य भी काफी समय से युद्ध की स्थिति चल रही है। अब एक और नया मोर्चा खुल गया। अब यहआग इसराइल और ईरान के बीच लग चुकी है। 2 दिन में तेल की कीमाते 9 फीसदी बढ़ गई.

विश्व इस समय वैसे ही आर्थिक संकट से गुजर रहा है. क्योंकि ईरान तेल का काफी बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है और वहां जंग छिड़ चुकी है। यदि आसपास के कुछ देश और इसमें शामिल हुए जैसे की संभावना है। अमेरिका भी युद्ध में कूदने की तैयारी कर रहा है। अगर ऐसा हुआ तो विश्व अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होना तय है।

इस युद्ध की शुरुआत दो दिनों में ही कच्चे तेल के दाम 9 फ़ीसदी चढ़ गए दुनिया भर के बाजारों में हड़कंप मच गया अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत पहली बार 1 साल के पार चली गई। दुनिया के शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई।

3. हवाई किराया 20% तक बढ़ा.

ईरान इजरायल तनाव के कारण भारत से यूरोप अमेरिका सहित पश्चिमी देशों की हवाई यात्रा पर बड़ा असर पड़ा है। पश्चिम एशिया के कई देशों ने अपने हवाई मार्ग बंद कर दिए हैं। इससे हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और मार्ग बदले गए हैं। मार्ग बदलने से किराए और परेशानियां बढ़ गई है। किराए में 20% तक की बढ़ोतरी हो गई। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान इजरायल के बीच संघर्ष और हवाई क्षेत्र बंद होने से उड़ानों का रास्ता लंबा हो गया है जिसका सीधा असर विमान के समय और किराए पर पढ रहा है। कुछ क्षेत्रों में पहले से ही 12 से 15% की वृद्धि देखी जा रही है। हवाई क्षेत्र में अस्थाई प्रतिबंध से विमान को आने-जाने में दो से चार घंटे का वक्त अधिक लग रहा है इससे विमान कंपनियों की परिचालन लागत में वृद्धि हो गई है मार्ग बदलने से कुछ मार्गों के किराए में 15 से 20 फ़ीसदी तक की वृद्धि हुई है हवाई क्षेत्र में जारी प्रतिबंध के कारण खाड़ी देशों से आने जाने वाली उड़ानों का मार्ग पर भारी भीड़ है।

समुद्री माल ढुलाई लागत 50% बड़ी :

ईरान इजरायल युद्ध से भारत में केवल हाईवे यात्रा महंगी नहीं हुई है बल्कि समुद्री माल ढुलाई दरों में भी 50% तक इजाफा हुआ है। इसके साथ ही बीमा शुल्क में भी बढ़ोतरी का जोखिम बना हुआ है। निर्यातकों का कहना है कि इस युद्ध के कारण यूरोप रूस और खादी के देशों को किया जाने वाला निर्यात प्रभावित होगा। अगर युद्ध लंबे समय तक चलता है तो ईरान और यूएई के बीच हार्मोन जलसंधि और लाल सागर जैसे


कैसे करें क्रेडिट कार्ड का सही उपयोग,ताकि वेल्थ क्रिएशन में भी मदद मिल सके।

आर्थिक फंडा ( arthikfunda.com)

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आर्थिक फंडा ब्लॉग —“छोटी-छोटी और बेहतरीन निवेश सलाह”

दोस्तों, आर्थिक फंडा (ब्लॉग) की एक और बेहतरीन यूनिक और मौलिक पोस्ट में आप सभी का स्वागत है। आज की पोस्ट में हम चर्चा करेंगे की ” कैसे क्रेडिट कार्ड का सही उपयोग करके हम अपना वेल्थ क्रिएशन भी बढ़ा सकते हैं।” आज की इस पोस्ट को आसान और अच्छी तरीके से समझ सकें इसलिए इसे हम निम्न बिंदुओं में विभाजित करके रीढ़ करेंगे।

क्रेडिट कार्ड एक भुगतान कार्ड है, जो आमतौर पर बैंक द्वारा जारी किया जाता है, जो अपने उपयोगकर्ताओं को सामान या सेवाएं खरीदने या क्रेडिट पर नकदी निकालने की अनुमति देता है। इस प्रकार कार्ड का उपयोग करने पर कर्ज़ चढ़ जाता है जिसे बाद में चुकाना पड़ता है। क्रेडिट कार्ड का अर्थ एक वित्तीय टूल से है जो बैंक द्वारा जारी किया जाता है। इसका उपयोग कर आप अपने पर्सनल खर्चों, ऑनलाइन खरीददारी, यात्रा आदि के लिए कहीं भी व कभी भी कर सकते हैं। क्रेडिट कार्ड क्या है, एक व्यक्ति की वित्तीय योजनाओं को मैनेज करने का माध्यम हो सकता है, जिसे आपको सावधानी और ज़िम्मेदारी के साथ उपयोग करना चाहिए।

आज के आर्टिकल में ( टेबल ऑफ़ कंटेंट )

  1. भूमिका।
  2. क्रेडिट कार्ड कैसे काम करता है.?
  3. क्रेडिट कार्ड लिमिट क्या है.?
  4. क्रेडिट कार्ड के प्रकार।
  5. अपनी खरीदारी को टाइम करें।
  6. विशिष्ट कार्ड इस्तेमाल करें।
  7. 5% से लेकर 36 परसेंट तक की बचत।
  8. बोनस/एक्सलरेटेड पॉइंट लें।
  9. छूट और कैशबैक का लाभ उठाएं।
  10. कार्ड से ट्रैवल बुकिंग करें।
  11. कंप्लीमेंट्री बेनिफिट्स का लाभ लें।
  12. ध्यान रखें..
  13. निष्कर्ष।
  14. संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर।

1. भूमिका (विषय प्रवेश) :

क्रेडिट कार्ड वैसे तो एक रिस्की प्लास्टिक मनी माने जाते हैं लेकिन यदि इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करें तो पैसे बचाने और बढ़ाने में मददगार भी साबित हो सकते हैं। हालांकि क्रेडिट कार्ड से वेल्थ क्रिएशन का मतलब यह नहीं है कि इससे कोई निश्चित आए या रिटर्न मिलता है, लेकिन क्रेडिट कार्ड कंपनियों और कंज्यूमर कंपनियों के बीच करार के चलते कई तरह की खरीदारी नगद के बजाय क्रेडिट कार्ड से करके पैसे बचाएं जा सकते हैं। जैसे – यदि आप किराना सामान पेट्रोल ऑनलाइन शॉपिंग मूवी और रेस्टोरेंट में खाने पर हर महीने ₹50000 खर्च करते हैं तो ढाई हजार से ₹5000 तक की बचत कर सकते हैं। इसमें शर्त यह होती है कि यह सारे खर्चे आप एक या दो तीन अलग-अलग क्रेडिट कार्ड से करें। क्रेडिट कार्ड से किए गए खर्च चुकाने के लिए आपके पास 50 दिनों तक का लंबा समय होता है। ऐसे में जो खरीददारी आप नगद करने वाले थे वह क्रेडिट कार्ड से करके उतना पैसा 50 दिनों के लिए कहीं निवेश कर सकते हैं। इस तरह यदि आप

2. क्रेडिट कार्ड कैसे काम करता है.?

क्रेडिट कार्ड का सही तरीके से उपयोग आपको आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करता है। आइए जानते है कि क्रेडिट कार्ड कैसे काम करता है:

  • क्रेडिट खाता : जब आपको क्रेडिट कार्ड मिलता है, तो बैंक में आपका एक क्रेडिट खाता खोला जाता है।
  • खरीदारी : जब आप क्रेडिट कार्ड का उपयोग खरीददारी करने के लिए करते हैं, तो यह खरीददारी की राशि को बैंक आपके क्रेडिट खाते में जोड़ता है।
  • लोन का रीपेमेंट : बैंक द्वारा आपके क्रेडिट कार्ड के रीपेमेंट के लिए एक अवधि तय की जाती है, उस तय तिथि पर आपको लोन ली गई राशि का भुगतान करना होता है।
  • क्रेडिट लिमिट : आपके क्रेडिट कार्ड पर एक निश्चित रकम तक की खरीददारी की अनुमति दी जाती है, जिसे क्रेडिट लिमिट कहा जाता है।
  • मासिक बिल : आपको क्रेडिट कार्ड के बिल का भुगतान हर महीने करना होता है, जिसमें आपकी पर्सनल खर्च की राशि और इंटरेस्ट शामिल होते हैं।

3. क्रेडिट कार्ड लिमिट क्या है.?

क्रेडिट कार्ड लिमिट एक न्यूनतम और अधिकतम राशि होती है, जो बैंक या वित्तीय संस्थान द्वारा कार्डधारक की आवश्यकताओं और वित्तीय स्थिति के आधार पर निर्धारित की जाती है। इस राशि को कार्डधारक क्रेडिट कार्ड के माध्यम से खर्च कर सकता है, और यह कार्डधारक को उपलब्ध क्रेडिट का प्रबंधन करने में मदद करता है।

4. क्रेडिट कार्ड के प्रकार :

आइए जानते है क्रेडिट कार्ड के निम्नलिखित प्रकार:

  • कोटक रॉयल सिग्नेचर क्रेडिट कार्ड
  • कोटक प्रिवी लीग सिग्नेचर क्रेडिट कार्ड
  • मिंत्रा कोटक क्रेडिट कार्ड
  • कोटक 811 क्रेडिट कार्ड
  • कोटक कॉर्पोरेट प्लैटिनम क्रेडिट कार्ड
  • कोटक कॉर्पोरेट गोल्ड क्रेडिट कार्ड
  • कोटक कॉर्पोरेट वेल्थ सिग्नेचर क्रेडिट कार्ड

5. अपने खरीदारी को टाइम करें :

हर क्रेडिट कार्ड का अपना बिलिंग साइकिल होता है खरीदारी को इसी हिसाब से टाइम करने पर ज्यादा फायदा होता है यानी जिस तारीख को आपका क्रेडिट कार्ड बिल जेनरेट होता है उसके फौरन बाद खरीदारी करने से 40 से 50 दोनों का इंटरेस्ट फ्री पीरियड मिलेगा।

6. विशिष्ट कार्ड का इस्तेमाल करें :

कार्ड कंपनियों के अलग-अलग वेंडर्स के साथ टाइप होते हैं। कुछ फ्यूल कंपनियों के साथ टाइप करके खास कार्ड जारी करती हैं। इसे पेट्रोल डीजल खरीदने पर ज्यादा बचत होती है। कुछ कार्ड के जरिए ग्रॉसरी खरीदने पर ज्यादा बचत होती है तो कुछ के जरिए ऑनलाइन शॉपिंग फायदेमंद होती है। जाहिर है, यदि आप अलग-अलग तरह की शॉपिंग के लिए खास कार्ड उसे करेंगे तो ज्यादा बचत होगी। खर्च करने की अपनी आदत पर गौर करें, और देखें कि ज्यादा खर्च कहां होता है। उसी के मुताबिक क्रेडिट कार्ड चुने। अगर आप ज्यादा ट्रैवल करते हैं तो ऐसा कार्ड चुने जिसमें टिकट होटल बुकिंग पर ज्यादा रीवार्ड्स मिलते हो। अगर आप ज्यादा शॉपिंग करते हैं तो ऐसे कार्ड को सेलेक्ट करें जिससे शॉपिंग पर अच्छी रीवार्ड्स प्राप्त होते हो। ऐसा करके आप अपना पैसाभी बचा सकते हैं और अपनी क्रेडिट वैल्यू को बढ़ा सकते हैं।

7. 5% से लेकर 36% तक की बचत :

कुछ फ्यूल कार्ड पार्टनर पेट्रोल पर खर्च का 7.5% तक रिवॉर्ड देते हैं। प्रीमियम कार्ड बैंक के पार्टनर पोर्टल से होटल बुकिंग पर पॉइंट के रूप में 36% तक रिटर्न देते हैं। कैशबैक कार्ड ऑनलाइन शॉपिंग पर स्टेटमेंट क्रेडिट के रूप में 5% रिटर्न देते हैं। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप अपने वेल्थ क्रिएशन को बढ़ा सकते हैं।

8. बोनस /एक्सलरेटेड पॉइंट ले :

मूवी टिकट जैसे खास तरह के खर्चे पर अधिकतम बोनस और एक्सीलरेटेड रीवार्ड्स प्वाइंट जमा कर सकते हैं इस तरह के खर्च सिर्फ रीवार्ड्स के लालच में न करें।

9. छूट या कैशबैक का लाभ उठाएं :

खरीदारी को इस तरह व्यवस्थित करें कि 15 अगस्त जैसे खास मौकों पर मिलने वाली छूट और कैशबैक का ज्यादा से ज्यादा लाभ ले सकें। विशेष पर्व जैसे होली,दिवाली, धनतेरस,पर विशेष छूट प्राप्त होती हैं। इनका लाभ उठाएं। जैसे — अगर आपको फ्रिज या टीवी जैसी कोई बड़ी वस्तु खरीदनी हो तो फेस्टिवल या सेल ऑफर्स का इंतजार कर सकते हैं।

10. कार्ड से ट्रैवल बुकिंग करें :

फ्लाइट होटल टूर एंड ट्रैवल पैकेज बुक करके यहां तक की गिफ्ट वाउचर खरीद कर भी आप एक्सीलरेटेड रीवार्ड्स प्वाइंट जमा कर सकते हैं। ध्यान रखें कि ऐसी विकल्पों के साथ अर्जित रिवॉर्ड पॉइंट का इस्तेमाल कर पाने में 90 दिन तक लगा सकते हैं। बैंक अक्सर 1 महीने में जमा किए जा सकने वाले रिवॉर्ड पॉइंट की अधिकतम मात्रा और प्रति म्हारे दमसन की ऊपरी सीमा रखते हैं।

11. कंप्लीमेंट्री बेनिफिट्स का लाभ लें :

आपको क्रेडिट कार्ड के साथ मिलने वाले कंप्लीमेंट्री बेनिफिट्स का पूरा इस्तेमाल करना चाहिए। इसमें एयरपोर्ट लाउंज में फ्री एक्सेस एक्सीडेंटल हेल्थ हॉस्पिटलाइजेशन कर ओटीटी प्लेटफॉर्म की मेंबरशिप क्लब मेंबरशिप आदि शामिल हैं। ध्यान रखें कि इन सभी बेनिफिट्स का कुल मूल्य कम से कम कार्ड के सालाना नवीकरण शुल्क से तो ज्यादा ही होगा।

12. ध्यान रखें..

प्लास्टिक मनी आखिरकार इंस्टेंट क्रेडिट कार्ड यानी फॉरेन मिल जाने वाला कर्ज ही है। अगर आप बार-बार आए और रीपेमेंट क्षमता से ज्यादा खर्च करेंगे तो कर्ज के जाल में फंस सकते हैं। क्रेडिट कार्ड की बकाया राशि पर सालाना 40% तक ब्याज लग सकता है। इसलिए इस बात का पूरा ध्यान रखें की जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी करें और समय पर अपना क्रेडिट कार्ड बिल चूकाते रहे।

निष्कर्ष :

क्रेडिट कार्ड एक वित्तीय साधन है जो आपको वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने के लिए ऋण लेने की अनुमति देता है, जिसे बाद में चुकाना होता है। यह एक प्लास्टिक कार्ड होता है जो बैंक या अन्य वित्तीय संस्थान द्वारा जारी किया जाता है। क्रेडिट कार्ड का उपयोग करके, आप बिना नकद के भी खरीदारी कर सकते हैं और अपने बिलों का भुगतान बाद में कर सकते हैं। 

संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर :

क्वेश्चन 1. क्रेडिट कार्ड क्या है.?

उत्तर – क्रेडिट कार्ड एक भुगतान कार्ड है जो आपको बैंक से उधार लेकर खरीदारी करने की सुविधा देता है। क्रेडिट कार्ड एक तरह से आपको ऋण देता है जिसे बाद में चुकाना पड़ता है आमतौर पर ब्याज के साथ ऐसी अदा करना होता है। क्रेडिट कार्ड का उपयोग करके आप बिना नगद पैसे के भी खरीदारी कर सकते हैं और बाद में भुगतान कर सकते हैं।

क्रेडिट कार्ड एक वित्तीय साधन है और एक तरह की प्लास्टिक मनी है जो आपको अपने सभी वित्तीय लेनदेन पर ऋण की अनुमति देता है। यह आपको अपनी जरूरत की सभी चीज खरीदने और उनके भुगतान करने की सुविधा प्रदान करता है।

क्वेश्चन 2. अगर मैं 6 महीने तक क्रेडिट कार्ड का उपयोग नहीं करता हूं तो क्या होगा..?

उत्तर — अगर आप 6 महीने तक क्रेडिट कार्ड का उपयोग नहीं करते हैं तो आपका कार्ड निष्क्रिय हो सकता है। कुछ क्रेडिट कार्ड कंपनियों 6 महीने या इससे अधिक समय तक उपयोग ने करने पर क्रेडिट कार्ड को निष्क्रिय कर सकती हैं और कुछ मामलों में आपका खाता बंद भी किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त आप पर निष्क्रियता शुल्क भी लग सकता है और आपके क्रेडिट स्कोर पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। कई क्रेडिट कार्ड कंपनियों 6 महीने या उससे अधिक समय तक आपके क्रेडिट कार्ड को निष्क्रिय कर देती हैं. यदि आपका खाता बंद हो जाता है या आप निष्क्रियता शुल्क का भुगतान करते हैं तो इससे आपके क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और आपको मिलने वाले बेनिफिट्स और रीवार्ड्स भी खत्म हो जाते हैं।

क्वेश्चन 3. एक अच्छा क्रेडिट इतिहास क्यों महत्वपूर्ण है..?

उत्तर — अच्छा क्रेडिट इतिहास काफी महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह ऋण प्राप्त करने कम ब्याज दरें प्राप्त करने और अन्य वित्तीय लेनदेन जैसे कि किराए या नौकरी के लिए स्वीकृति प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अच्छा क्रेडिट इतिहास क्यों महत्वपूर्ण है इसके कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं-

  1. अच्छी ऋण सुविधा प्राप्त करने के लिए।
  2. अच्छा क्रेडिट स्कोर कम ब्याज दरों में मदद करता है।
  3. अच्छा क्रेडिट स्कोर आपको खरीदारी की बेहतरीन सुविधाएं प्रदान करता है।
  4. अच्छा क्रेडिट इतिहास आपके पैसे के प्रबंधन की सक्रियता को प्रदर्शित करता है।
  5. एक अच्छा क्रेडिट इतिहास आपको वित्तीय स्वतंत्रता प्रदान करता है।
  6. अच्छा क्रेडिट इतिहास आपकी एक महत्वपूर्ण संपत्ति की भांति होता है जो आपको वित्तीय रूप से मजबूत स्थिति में रहने में मदद प्रदान करता है।

क्वेश्चन 4. क्रेडिट कार्ड के क्या फायदे हैं..?

उत्तर — क्रेडिट कार्ड के लाभ प्रदान करता है जैसे कि वित्तीय स्वतंत्रता, सुरक्षा, रीवार्ड्स, ऑनलाइन खरीदारी, लोन सुविधा आदि। क्रेडिट कार्ड के कुछ बेहतरीन फायदे इस प्रकार हैं–

  1. क्रेडिट कार्ड आपको तत्काल खरीदारी करने और भुगतान बाद में करने की सुविधा देता है।
  2. क्रेडिट कार्ड विभिन्न रीवार्ड्स कार्यक्रम, कैशबैक, शॉपिंग और कई महत्वपूर्ण सुविधा प्रदान करता है।
  3. क्रेडिट कार्ड ऑनलाइन खरीदारी के लिए एक सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प है, जिससे आप विभिन्न ऑफर और छोटो का लाभ उठा सकते हैं।
  4. क्रेडिट कार्ड का सही उपयोग करके आप अपने क्रेडिट स्कोर को बेहतर बनाकर भविष्य आसान ऋण प्राप्त कर सकतें है।
  5. क्रेडिट कार्ड से आप किसी भी चीज को तत्काल परचेस कर सकते हैं भले ही आपके पास नगदी न हो।
  6. अचानक वित्तीय आवश्यकताओं की स्थिति में क्रेडिट कार्ड एक उपयोगी विकल्प होता है।
  7. क्रेडिट कार्ड के उपयोग से आपकी क्रेडिट हिस्ट्री बनती है जो भविष्य में रन के लिए महत्वपूर्ण होती है।
  8. हवाई यात्राओं विदेश यात्राओं के समय आप क्रेडिट कार्ड से आसान भुगतान कर सकते हैं, आपको नगदी रखना जरूरी नहीं होता है।

क्वेश्चन 5. क्रेडिट कार्ड के नियम एवं शर्तें क्या है..?

उत्तर -= क्रेडिट कार्ड के नियम और शर्तें क्रेडिट कार्ड जारी करता और कार्ड उपयोग करता के बीच एक समझौता है जिसमें फीस ब्याज दरें और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल होती हैं। यह जानना आवश्यक है कि यह नियम और शर्तें कार्ड धारक को कैसे प्रभावित करती हैं ताकि वे अपने क्रेडिट कार्ड का जिम्मेदारी के साथ उपयोग कर सकें।

क्रेडिट कार्ड के नियम एवं शर्तें –

1. क्रेडिट सीमा

यह वह अधिकतम राशि है जो आप अपने क्रेडिट कार्ड से उधार ले सकते हैं

2. ब्याज दर

यदि आप क्रेडिट कार्ड बिल का पूरा भुगतान समय पर नहीं करते हैं तो आपको ब्याज का भुगतान करना होगा।

3. भुगतान तिथि

यह वह तिथि है जब आपको क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाना होता है

4. शुल्क

क्रेडिट कार्ड जारी करने वाले बैंक विभिन्न प्रकार के शुल्क लेते हैं जैसे कि वार्षिक शुल्क, लेट पेमेंट शुल्क, नगद अग्रिम शुल्क आदि

5. नियम और शर्तों का उल्लंघन

यदि आप क्रेडिट कार्ड के नियमों और शर्तों का उल्लंघन करते हैं तो बैंक आपके कार्ड को रद्द कर सकता है या अन्य प्रकार के दंड लगा सकता है।

6. क्रेडिट कार्ड से सीमा से अधिक राशि होने पर शुल्क लगाया जाएगा।

7. यदि आप भुगतान दी तिथि पर या उससे पहले न्यूनतम दे राशि का भुगतान करने में विफल रहते हैं तो बैंक को भुगतान किए जाने तक और कार्ड खाते को नियमित किए जाने तक कार्ड पर सुविधा को रोकने का पूर्ण अधिकार है।

8. यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि क्रेडिट कार्ड के नियम और शर्तें समय-समय पर बदल सकते हैं। इसीलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आप हमेशा नवीनतम नियम और शर्तों से अवगत रहे।

क्वेश्चन 6. एसबीआई क्रेडिट कार्ड क्या है..?

उत्तर – SBI क्रेडिट कार्ड भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) द्वारा जारी एक क्रेडिट कार्ड है जो आपको एक निश्चित सीमा तक पैसे खर्च करने की सुविधा देता है, जिसे बाद में चुकाना होता है। यह है एक प्रकार का उधार है जो आपके बिना नगदी के खरीदारी करने, बिलों का भुगतान करने, और अन्य वित्तीय लेनदेन करने की अनुमति देता है।

क्वेश्चन 7. क्रेडिट कार्ड के क्या नुकसान है..?

उत्तर — हर अच्छी सुविधा और तकनीकी के फायदे भी होते हैं तो नुकसान। ठीक वैसे ही क्रेडिट कार्ड के अनेक फायदे हैं तो इसके कई नुकसान भी है। क्रेडिट कार्ड के कुछ नुकसानौ में प्रमुख है — उच्च ब्याज दरें, अधिक खर्च करने की प्रवृत्ति, धोखाधड़ी का खतरा, कर्ज के जाल में फसना, अधिक शुल्क चुकाना, वार्षिक और विलंब शुल्क चुकाना, क्रेडिट खराब होना, बिना सोचे समझे खर्च करने की प्रवृत्ति बढ़ाना, भुगतान छूटने का डर बना रहना, आदि क्रेडिट कार्ड के प्रमुख नुकसान हैं।

कर दाताओं की सुरक्षा की गारंटी कब लेगी सरकार..? क्या यह जरुरी नहीं..?

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विषय प्रवेश

हमारे देश के संविधान के अनुसार प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनके जान माल की हिफाजत करना हमारे देश के कानून और संविधान का कर्तव्य है, लेकिन जब सरकार सुरक्षा देने के नाम पर आम नागरिक को बिल थामने लगे तो क्या किया जाए..? उस पर भी यदि वह नागरिक नियमित रूप से इनकम टैक्स अदा करता आ रहा हो, जिसके लिए बार-बार कहा जाता है कि सरकार करदाताओं के टैक्स से चलती है। हाल ही में ऐसा एक वाक्य राजस्थान की राजधानी जयपुर में सामने आया जब एक बिजनेसमैन से एक गैंगस्टर ने दो करोड़ की रंगदारी मांगी और पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई।. बिजनेसमैन को जो सुरक्षा मिली उसके आवाज में क्षेत्र लख रुपए का बिल पुलिस द्वारा व्यापारी को थमा दिया गया। इसकी कोई जानकारी उसे व्यापारी को नहीं दी गई थी। अब बताइए कि क्या अपने मौलिक अधिकारों के लिए भी करदाताओं को बिल भरना होगा..? आखिर देश में करदाताओं को क्या सुविधा मिल रही है..? इस सवाल का जवाब कौन देगा.? शायद ही किसी के पास इस सवाल का जवाब हो। सरकार यह अपेक्षा तो प्रत्येक करता था से करती है कि वह ने केवल अपना टैक्स जमा कारण बल्कि पूरी ईमानदारी से टैक्स भी भारी और बदले में सरकार से किसी भी प्रकार की सुविधा की उम्मीद या अपेक्षा ने करें।

सरकार को करदाताओं से ताकत प्राप्त होती आजकल हम इस बात को लेकर पहले नहीं समा रहे हैं और अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं कि भारत पहले दुनिया की पांचवी बड़ी इकोनॉमी बना और अब जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है। हम जापान को पछाड़ कर दुनिया की सबसे तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाले हैं। देश को यह ताकत कहां से मिली..? मैं आपको बताता हूं कि हमारे देश और सरकारों को यह ताकत करदाताओं से प्राप्त होती है। करदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार दिन-रात प्रयासरत रहती है। देश में पैसा लगा रहे निवेदक और करदाता सरकार को आर्थिक शक्ति देते हैं। देश की कानून व्यवस्था अच्छी हो तभी बिजनेसमैन और निवेशक तथा व्यापारी अपने आप को सुरक्षित महसूस करते हैं लेकिन क्या समय पर इनकम टैक्स देने वालों को सुरक्षा की गारंटी सरकार की तरफ से मिल रही है..? इस सवाल का जवाब ढूंढना बड़ा मुश्किल है. 140 करोड़ से ऊपर की आबादी वाले भारत में 3 करोड लोग इनकम टैक्स अदा करते हैं। हालांकि गुड्स एंड सर्विस टैक्स जीएसटी लागू होने के बाद अप्रत्यक्ष रूप से प्रत्येक नागरिक टैक्स के दायरे में आ गया है। अर्थात में कह सकता हूं कि देश का हर नागरिक किसी न किसी रूप में सरकार को टैक्स अदा कर रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि कोई कम टैक्स दे रहा है..तो कोई ज्यादा।

सरकार को कितना टैक्स मिलता है इसका जवाब वित्त मंत्री से अच्छा और कौन दे सकता है.? भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मैं पिछले दिनों संसद में एक बयान दिया था उनके अनुसार वित्त वर्ष 2024 25 में कर के रूप में 24 लाख करोड रुपए प्राप्त हुए जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 2.5 लाख करोड रुपए अधिक हैं टैक्स रिवेन्यू लगातार बढ़ रहा है। सरकार और देश के अधिकतर खर्च इस टैक्स से ही चलते हैं। वित्त वर्ष 2024 25 के दौरान केंद्र सरकार ने जीएसटी से बहुत बड़ा राजस्व प्राप्त किया। वित्त मंत्री ने फरवरी 2025 में संसद में पीस अपने बजट भाषण में बताया था कि वित्त वर्ष 2023 24 में जीएसटी कलेक्शन 18 लाख करोड़ से अधिक रहा। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12% अधिक था।

सरकार लगातार एडवांस टैक्स और टैक्स भरने को लेकर एक अभियान चलाती है और टैक्स चोरी करने वालों को आपराधिक श्रेणी में रखा जाता है सरकार कि करदाताओं से हमेशा यही अपेक्षा होती है कि वह टैक्स लॉ का पालन करें, अपना रिकॉर्ड सही रखें और समय पर टैक्स अदा करें। लेकिन क्या सरकार की ऐसी सोच है कि इसके बदले में कार्ड था कुछ नहीं मांगे..? और अगर गैंगस्टर या गुंडे धमकी दे रहे हैं तो अपनी सुरक्षा के बदले में भुगतान के लिए तैयार रहें..?

कर दाताओं की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ने केवल उनके व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करती है बल्कि समग्र टैक्स प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता भी सुनिश्चित करती है। करदाताओं को डाटा चोरी या हैंगिंग धोखाधड़ी भ्रष्टाचार या अवैध तरीके से उत्पीड़न से बचाना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि कर डाटा को लगता है कि उसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अनुचित तरीके से परेशान कर रहा है तो उसे सशक्त शिकायत निवारण तंत्र का विकल्प मिलना चाहिए। करदाताओं को टैक्स फाइलिंग रिटर्न प्रोसेसिंग और टैक्स भुगतान से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता मिलनी चाहिए। जब यह सुविधा उसे प्राप्त नहीं होती हैं तो करदाताओं के अंदर एक असंतोष और अविश्वास उत्पन्न होता है। सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि करदाताओं की समस्याओं का समाधान समय पर और प्रभावित तरीके से हो। जब करदाताओं को यह विश्वास होता है कि उनकी व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित है और उनके साथ उचित व्यवहार किया जा रहा है तो वह अधिक तैयार रहते हैं और आत्मविश्वास के साथ अपनी टैक्स जिम्मेदारियां का पालन करते हैं। वैसे सरकार यह सुनिश्चित करती है कि करदाताओं के अधिकारों का सम्मान किया जाए और वह किसी भी प्रकार के अत्याचार या उत्पीड़न से सुरक्षित रहें।

करदाताओं की पैसों से सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन सुविधा मिलती हैं। सरकार के खर्चे चलते हैं, और विकास कार्यों को गति मिलती है। इसीलिए अधिकारियों को जनता के हित में कार्य करना चाहिए ने की सदैव वाह वाही लूटने के लिए अपनी पीठ थप थपानी चाहिए। संविधान में कानून एवं व्यवस्था को बनाए रखना पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी बताया गया है। प्रतीक नागरिक को सुरक्षा देना पुलिस की जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को अपराधियों से जान का खतरा है तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस का ही कर्तव्य है, न की सुरक्षा के नाम पर लाखों रुपए का बिल थमा देना। पुलिस प्रशासन के आल्हा अधिकारियों को ऐसे मामलों में स्वतह संज्ञान लेने की आवश्यकता है। आखिर सरकार ईमानदारी से टैक्स देने वालों के लिए कुछ विशेष सहूलियत क्यों नहीं निर्धारित करती है..? कम से कम जो बिजनेसमैन या व्यापारी गैंगस्टर या अपराधियों की नजर में हैं और जिन्हें रंगदारी के लिए धमकी मिल रही है उनकी सुरक्षा की गारंटी तो सरकार को लेनी ही चाहिए। सुरक्षा के नाम पर लंबा चौड़ा बिल नहीं थामना चाहिए। भले ही सरकार के पास टैक्स देने के बाद देश चलाने संबंधी कई बड़े काम होते हैं लेकिन सुरक्षा भी इन्हीं कामों में से एक बड़ा काम है। सरकार को चाहिए कि वह प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा का ख्याल रखें और करदाताओं पर विशेष ध्यान देते हुए सरकार एवं प्रशासन को उनके प्रति संवेदनशील भी होना चाहिए।

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चीफ एडिटर – केदार लाल ( K. L. Ligree / सिंह साब )

खुदरा महंगाई दर में गिरावट,केवल 2.82% ही बढ़ी,राज्यों में कैसे है महंगाई के हाल.?

मई में खुदरा महंगाई 6 साल के सबसे निचले स्तर 2.82% पर रही, खाने-पीने की चीजें हुईं सस्ती

Retail Inflation In May 2025: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पिछले छह महीनों में मुद्रास्फीति में काफी कमी आई है, जो अक्टूबर 2024 में टोलरेंस बैंड से ऊपर थी और अब लक्ष्य से काफी नीचे आ गई है.

फोटो – आर्थिक फंडा ब्लॉग के चीफ एडिटर केदार लाल,अपनी पत्नी के साथ – जयपुर में।

Retail inflation in India May 2025:

मई में महंगाई दर में गिरावट का मुख्य कारण कई रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में कमी है.

नई दिल्ली:

भारत में खुदरा महंगाई दर यानी CPI (Consumer Price Index) मई 2025 में गिरकर 2.82 प्रतिशत पर आ गई है. यह फरवरी 2019 के बाद का सबसे निचला स्तर है. पिछले साल मई में यह दर 4.8 प्रतिशत थी. सरकार की ओर से 12 जून को जारी किए गए आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है.

खाद्य महंगाई में बड़ी राहत

खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी राहत मिली है. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी किए गए डेटा में बताया गया कि फूड इंफ्लेशन मई में घटकर 0.99 प्रतिशत पर आ गई, जो कि अक्टूबर 2021 के बाद सबसे कम है. खाद्य महंगाई दर बी लगातार सात महीने से कम हो रही है. एक्सपर्ट के मुताबिक, इसकी वजह कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी करना है.

किन चीजों के दाम गिरे?

मई में महंगाई दर में गिरावट का मुख्य कारण कई रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में कमी है. आधिकारिक बयान के अनुसार, मई के दौरान खुदरा महंगाई में बड़ी गिरावट मुख्य रूप से दालों, सब्जियों, फलों, अनाजों, घरेलू वस्तुओं एवं सेवाओं, चीनी और अंडों की कीमतों में गिरावट के कारण हुई है. ईंधन की कीमतों में नरमी के कारण भी महंगाई में कमी आई है.

आरबीआई ने घटाया महंगाई अनुमान

रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने बीते शुक्रवार को आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई के अपने पूर्वानुमान को भी 4 प्रतिशत से घटाकर 3.7 प्रतिशत कर दिया है.

उन्होंने कहा, “सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए और सामान्य मानसून को देखते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति अब 3.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है. महंगाई पहली तिमाही में 2.9 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 3.4 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 3.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है.”

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पिछले छह महीनों में मुद्रास्फीति में काफी कमी आई है, जो अक्टूबर 2024 में टोलरेंस बैंड से ऊपर थी और अब लक्ष्य से काफी नीचे आ गई है. इसमें  ब्रोड-बेस्ड सॉफ्टनिंग यानी व्यापक आधार पर नरमी के संकेत हैं.

उन्होंने बताया कि इस वर्ष मार्च-अप्रैल में सीपीआई हेडलाइन महंगाई में गिरावट जारी रही, जिसमें अप्रैल 2025 में यह लगभग सालाना आधार पर छह साल के निचले स्तर 3.2 प्रतिशत पर आ गई थी.

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क्या है सफलता..? सफलता हासिल करने के सरदार टिप्स.

तुडावली,टोड़ाभीम,राजस्थान – 321610 भारत

 कैसे हासिल करें सफलता….? सफलता हासिल करने के असरदार टिप्स।

आर्थिक फंडा (ब्लॉग ) के एक और बेहतरीन आर्टिकल में आपका स्वागत है। अपनी जिंदगी में हर इंसान सफल होना चाहता है। क्योंकि बिना सफलता हासिल किये बिना जिंदगी जीने का मजा नहीं आता। सफलता की कमी से सब कुछ अधूरा अधूरा लगता है। सफलता की कमी जीवन को सुनसान और वीरान बना देती है। बिना सफलता प्राप्त किये जीवन जीने का आनंद नहीं आता। वैसे तो सफलता की परिभाषा बहुत व्यापकता लिए हुए हैं, और हर व्यक्ति के सफलता को परिभाषित करने के अपने अलग -अलग मायने है, लेकिन अब सवाल उठता है की सफलता नाम की इस बहुमूल्य चीज को कैसे प्राप्त किया जाए..? आखिर वह कौन-कौन से तरीके हैं जिन्हें अपना कर हम जल्द एवं अच्छी सफलता हासिल कर सकते हैं..? आज के इस आर्टिकल में हम इसी बात को समझने का प्रयास करेंगे। और अच्छी सफलता हासिल करने का पूरा रोड मैप समझेंगे।इस आर्टिकल को आप निम्न पॉइंट में  रीढ़ करेंगे —

 आज कि पोस्ट में / टेबल ऑफ़ कंटेंट 

1. सफलता क्या है..? पहले ये समझें 

2. लक्ष्य बनाये।

3. निरंतर अभ्यास करें।

4. वही कार्य करें जो आपको अच्छे लगते हैं।

5. धैर्यवान बनें।

6. जिद और कड़ी मेहनत।

7. योजनाओं पर अमल करें।

8. खुश मिजाज बनें।

9. आशावादी बने।

10. हर काम को फौरन करने की आदत डालें।  

11. नकारात्मक असर से बचें।

12. असफलता का डर मन से निकले।

13. निष्कर्ष।

14. महत्वपूर्ण प्रश्न -उत्तर।

सफलता क्या है..?

” सदा मुस्कुराना,गमों को भूल जाना।

 सबका प्यार पाना, सबको हंसाना।

 यारों के साथ मिलकर, खुशियों में डूब जाना।

 बच्चों का साथ देना सबका दुख बांट लेना।

 उम्मीदें जगाकर, मस्ती में झूम जाना।

 खूबियां तलाशना, आलोचना सह जाना।

 गमों को पी जाना, तराने खूब गाना।

 दुख में भी मुस्कुराना, सुख में भी मुस्कुराना।

 अपनों का साथ पाकर फूले न समान।

 असफलता के दौर को धुएं में उड़ना।

 सफलता का राज मैंने ऐसे ही जाना।।

             —   केदार लाल ( K. S. Ligree )

दोस्तों सफलता अचानक से हासिल नहीं होती हैं। यह निरंतर किये जाने वाले प्रयासों का परिणाम होती है। सफलता एक सुहाने सफर की भांति है। हम एक लक्ष्य को पूरा करते हैं और दूसरे में जुट जाते हैं और यह सफर चलता रहता है। हर इंसान के लिए सफलता के मायने अलग-अलग होते हैं। जैसे — एक छात्र अच्छे अंक प्राप्त करके अपने आप को सफल मानता है। कोई नौकरी लगकर अपने को सफल समझता है। किसी के लिए दौलत,शोहरत कमाना सफलता है। एक किसान अच्छी फसल पैदा करके अपने को सफल मानता है। एक वैज्ञानिक नए अनुसंधान को अपनी सफलता के रूप में देखाता है. कोई अच्छी सेहत और खुशी को हासिल करना अपनी सफलता मानता है। कई लोग अपने परिवार और बीवी बच्चों की खुशहाली को अपनी सफलता मानते हैं। मैं एक राइटर हूं और अच्छा लिखने के प्रयासों को अपनी सफलता मानता हूं। इसका मतलब यह हुआ की सफलता एक निजी एहसास है, हर आदमी अपने हिसाब से अपनी सफलता के माप दंड  तय करता है, फिर भी सफलता को अच्छे ढंग से परिभाषित करना हो तो कुछ यूं कर सकते हैं–

    “मूल्यवान लक्ष्य की प्राप्ति का नाम ही सफलता है।”

 असली सफलता किसी काम को अच्छी तरह से करने और अपने लक्ष्य को हासिल करने के एहसास से मापी जाती है। सफलता इस बात से नहीं मापी जाती कि, हमने जिंदगी में कौन सा ओहदा या कौन सा पद प्राप्त किया है, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि हमने वह मुकाम कितनी रूकावटों को दरकिनार करके हासिल किया है।अर्थात सफलता संघर्षों की कहानी है। सफल लोग अपने आप से मुकाबला करते हैं वह अपना खुद का रिकॉर्ड बेहतर बनाने और उसमें लगातार सुधार लाते रहते हैं।

 सफलता इस बात से नहीं मापी जाती कि हमने जिंदगी में कितनी ऊंचाई हासिल की है, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि हम कितनी बार गिरकर उठे हैं। सफलता का आकलन गिरकर उठने की क्षमता से ही किया जाता है। आपको दुनिया की एक मशहूर हस्ती की कहानी सुनाता हूं–

“एक आदमी की जिंदगी की कहानी बड़ी मशहूर हैं। यह आदमी 21 साल की उम्र में व्यापार में नाकामयाब हो। गया 22 साल की उम्र में वह चुनाव हार गया। 24 साल की उम्र में उसे व्यापार में फिर असफलता मिली। 26 साल की उम्र में उसकी पत्नी मर गई।27 साल की उम्र में उसका मानसिक संतुलन बिगड़। गया 34 साल की उम्र में वह कांग्रेस का चुनाव हार गया। फिर 45 साल की आयु में उसने सीनेट के चुनाव में हर का सामना किया। 47 साल की उम्र में वह उपराष्ट्रपति बनने में सफल रहा। लेकिन 49 साल की आयु में वह फिर से  चुनाव हार गया और वही आदमी 52 साल की उम्र में अमेरिका का राष्ट्रपति चुना गया और वह इंसान था इब्राहिम लिंकन।”

 अब आप लिंकन को असफल मानेंगे..? अगर लिंकन चाहते तो सर झुका कर मैदान से हट सकते थे और अपना समय निकाल सकते थे लेकिन उन्होंने संघर्ष करके सफलता हासिल करने का रास्ता चुना। और यही सच्ची सफलता है।

 एक और शख्सियत का उदाहरण में आपके सामने रखना चाहता हूं

“वाल्ट डिजनी जब युवक थे तो कई अखबारों के संपादकों ने उन्हें यह कहकर भगा दिया कि उनमें टैलेंट है ही नहीं। एक दिन एक चर्च के पादरी ने उन्हें कुछ कार्टून बनाने का काम दिया डिज्नी चर्च में जिस शेड के नीचे काम कर रहे थे वहां चूहे उछल कूद मचा रहे थे, एक चूहे को देखकर उनके मन में एक कार्टून बनाने का ख्याल आया और वहीं से मिकी माउस का जन्म हुआ। दोस्तों इन उदाहरण के माध्यम से मैं आपको यह समझना चाहता हूं कि सफल लोग महान काम नहीं करते बल्कि वह छोटे-छोटे कामों को महान ढंग से करते हैं। जीतने वाले कोई अलग काम नहीं करते बल्कि वह हर काम अलग ढंग से करते हैं।और यही सच्ची सफलता का राज हैं।

आर्थिक फंडा ब्लॉग के इस प्रेरणा दायक आर्टिकल में, मैं आपको सफलता प्राप्त करने के कुछ सूत्र (टिप्स ) बताने जा रहा हूँ —

1. लक्ष्य बनाये —

 लक्ष्य हमें जीवन जीने की दिशा दिखाता है। हमारा लक्ष्य ही वह चीज होती है जो हमें सफलता तक लेकर जाता है। बिना लक्ष्य के इंसान सिर्फ अंधेरे में तीर चलता है। जीवन के रास्ते में चलते हुए नजरे हमेशा अपने लक्ष्य पर रहनी चाहिए। मैं आगे बढ़ने से पहले आपको एक छोटी सी कहानी सुनाता हूं —  “प्राचीन भारत में एक ऋषि अपने शिष्यों को तीरंदाजी की कला सीखा रहे थे। उन्होंने लक्ष्य के रूप में एक लकड़ी की चिड़िया रखी और अपने शिष्यों से उस चिड़िया की आंख पर निशाना लगाने को कहा। उन्होंने पहले शिष्य  से पूछा “तुम्हे क्या दिख रहा है…? शिष्य ने कहा, मैं पेड़, पेड़ की टहनिया, आकाश, चिड़िया और उसकी आंख देख रहा हूं।  ऋषि ने उसे शिष्य को इंतजार करने को कहा। तब उन्होंने दूसरे शिष्य से वही सवाल किया तो दूसरे से उसने जवाब दिया “मुझे सिर्फ चिड़िया की आंख दिखाई दे रही है।” तब ऋषि ने कहा,  “बहुत अच्छा अब तीर चलाओ।” और फिर तीर सीधा जाकर चिड़िया की आंख में लगा। मतलब साफ है कि शिष्य का लक्ष्य तय था “चिड़िया की आंख” इसीलिए तीन निशाने पर जाकर लगा और उसे सफलता प्राप्त हुई। अगर हम  अपना लक्ष्य तय नहीं करेंगे और अपने मकसद पर ध्यान नहीं लगाएंगे तो सफलता हासिल नहीं कर पाएंगे अपने मकसद पर ध्यान लगाना एक मुश्किल काम है,  मगर यह एक कला है जिसे सीखा जा सकता है।

 4 जुलाई 1952 को फ्लोरेंस चैडविक कैटरीना चैनल और इंग्लिश चैनल को तैरकर पार करने वाली पहली महिला बनने वाली थी। वह इंग्लिश चैनल को पहले ही पार कर चुकी थी। सारी दुनिया की निगाह उन पर टिकी हुई थी। चैड़वीक ने घने कोहरे और हड्डियों को कपाने  वाली ठंड तथा कई सार्क मछलियों का मुकाबला किया। वह किनारे पर पहुंचने का प्रयास कर रही थी, लेकिन उसने अपने चश्मे से जब  देखा उन्हें घना कोहरा दिखाई दिया। किनारा ना दिखाई देने की वजह से उन्होंने हार मान ली। चैडविक को सदमा तब लगा जब उन्हें पता चला कि वह किनारे से सिर्फ आधा मील दूर रह गई थी। उन्होंने हार इसलिए नहीं मानी थी कि बधाओं ने उनकी हिम्मत तोड़ दी,  बल्कि इसलिए हार मानी थी क्योंकि उन्हें अपना लक्ष्य कहीं नजर नहीं आ रहा था। वह किसी बाधा की वजह से नहीं रुकी। उन्होंने कहा “मैं बहाने नहीं बना रही हूँ , अगर मैने  किनारा देखा होता तो मैं जरूर कामयाब हो जाती।”  2 महीने बाद वह फिर वापस गई, और उन्होंने कैटलीना चैनल को पार कर लिया।  इस बार खराब मौसम के बावजूद उसने अपने लक्ष्य पर निगाह रखी और वह न केवल सफल रही बल्कि उसने पुरुषों के रिकॉर्ड को भी 2 घंटे के समय से तोड़ा।

 एक बार एक यात्री चौराहे पर रुका। उसने एक बुजुर्ग से पूछा “यह सड़क मुझे कहां ले जाएगी..? बुजुर्ग ने पलट कर पूछा आप कहां जाना चाहते हो..? उसे यात्री ने कहा “मैं नहीं जानता कि मुझे कहां जाना है। बुजुर्ग ने कहा – “तब कोई भी सड़क पकड़ लो, क्या फर्क पड़ता है।” जब तुम जानते ही नहीं हो कि तुम्हें कहां जाना है तो कोई भी सड़क तुम्हें वहां ले जाएगी। इन छोटे -छोटे उदाहरनो के माध्यम से आप भली भांति यह समझ गए होंगे की सफलता प्राप्त करने के लिए लक्ष्य की क्या अहमियत है। आता है पहली सीढ़ी यही है कि आप अपना एक मूल्यवान लक्ष्य निर्धारित करें। 

2.निरंतर अभ्यास —

निरंतर प्रयास व अभ्यास वह प्रक्रिया है जो बेहद महत्वपूर्ण है। आप और हम कई उदाहरण देखते हैं जिनमें कक्षा में साधारण और औसत दिखने वाले छात्र कठिन परीक्षाओं में अव्वल स्थान हासिल कर लेते हैं और क्लास में अव्वल रहने वाले स्टूडेंट असफल हो जाते हैं। कई साधारण व्यक्ति ऐसा धारण सफलता हासिल कर लेते हैं। यह सब निरंतर अभ्यास का ही परिणाम है। एक कहावत का उदाहरण देकर में इस बात को आपके सामने और अधिक स्पष्ट कर देना चाहता हूं हिंदी जगत में एक बेहद लोकप्रिय कहावत है जो अभ्यास की महिमा को उजागर करती है वह कहावत इस प्रकार है–

 करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।

 रस्सी आवत जात से सी पर परत निशान।।

 इस कहावत का अर्थ है कि बार-बार अभ्यास करने से जड़ बुद्धि अर्थात मूर्ख व्यक्ति भी चतुर और होशियार बन जाता है। निरंतर अभ्यास से एक मुलायम और धागों से बनी हुई रस्सी भी कठोर चट्टान पर निशाना बना देती है। अभ्यास वह गुण है जो हमें उपलब्धि दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। अंग्रेजी में भी एक लोकप्रिय कहावत है  “प्रेक्टिस मेक ए मैन परफेक्ट” अर्थात अभ्यास एक व्यक्ति में संपूर्णता लाता आता है। निरंतर प्रयास और अभ्यास की स्किल को डेवलप करके आप अचीवमेंट हासिल कर सकते हैं।

 एक और उदाहरण देकर मैं इस बात को स्पष्ट करता हूं — लेखक जॉन इरविन को प्रतिभाशाली लेखक माना जाता है लेकिन उन्हें डिस्लेक्सिया रोग हो गया था। उन्हें छोटी-मोटी चीज याद करने में भी बड़ी कठिनाई होती थी लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और उन्होंने अपने काम में अभ्यास का समय बढ़ा दिया। वह चीजों का बार-बार अभ्यास करते, लिखी हुई बातों को बार-बार रिवाइज करने लगे। धीरे-धीरे उन्होंने ने केवल डिस्लेक्सिया को पराजित किया बल्कि धैर्य और कड़ी मेहनत से सफलता अर्जित की।

 महान वायलिन वादक फ्रेतज क्रिसलर से किसी ने पूछा कि “आप इतनी अच्छी वायलिन कैसे बजाते हैं…? क्या यह भाग्य कि देन हैं…? उन्होंने जवाब दिया–” यह अभ्यास का नतीजा है।अगर मैं एक महीने तक अभ्यास ना करूं तो मेरे वायलिन बजाने में आए फर्क को मेरे श्रोता महसूस कर लेते हैं।  अगर मैं एक सप्ताह तक अभ्यास नहीं करूं तो मेरी पत्नी फर्क को बता देती है। और अगर मैं एक दिन अभ्यास ना करूं तो मैं खुद फर्क को महसूस कर लेता हूं। 

2.  वही कार्य करें जो आपको अच्छा लगता है —

 मां को अच्छा लगने वाला कार्य करने से शीघ्र सफलता मिलती है, यह कार्य करके आप बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकते हैं। एक ब्रिटिश पत्रकार ‘हेस्टर’ ने दुनिया भर के सैकड़ो सफल लोगों के साक्षात्कार लिए और उनका मूल्यांकन किया। इस मूल्यांकन में यह निष्कर्ष निकल के सामने आया कि अधिकांश सफल लोग वही कार्य कर रहे थे जो उन्हें अच्छा लगता था। अच्छा लगने वाला कार्य व्यक्ति दिल और मन से करता है। लगन और रुचि के साथ करता है। और मां और लगन से किया हुआ कार्य कभी निराश नहीं करता कभी असफलता नहीं दिलाता।

4. धैर्यवान बने —

 दुनिया के सभी सफल लोगों में एक बात समान होती है और वह है उनका धैर्यवान होना। धैर्य जुनून और दृढ़ता का संयोजन है यानी किसी कार्य में असफल होने पर वह उसे छोड़ने नहीं बल्कि धैर्य के साथ पुन प्रयास करते हैं और लक्ष्य प्राप्ति तक डटे रहते हैं।  धैर्यवान व्यक्ति को अपना लक्ष्य जरूर हमेशा याद रहता है और उन्हें पता होता है कि अंत में कहां पहुंचना है सफल लोग अपने जीवन को धैर्यवान बनाकर मैराथन दौड़ की तरह जीते हैं ने की 100 मीटर फर्राटा रेस की भांति।

5.  जिद और कड़ी मेहनत —

 सफलता हासिल करने में जीत और कड़ी मेहनत बड़ा एम फैक्टर है।

” जिद करो दुनिया बदलो “। अगर आप अपनी दुनिया बदलना चाहते हैं सफलता और उपलब्धि हासिल करना चाहते हैं तो आपको अपने अंदर एक जिद पालनी होगी – सफलता हासिल करने की ज़िद। प्रसिद्ध विद्वान चार्ल्स डार्विन लिखते हैं की बुद्धिमत्ता के लिहाज से लोगों के बीच ज्यादा अंतर नहीं होता, अंतर होता है केवल जिद और कठिन परिश्रम का। यह एक महत्वपूर्ण अंतर है जो लोगों को सफल या असफल बनाता हैं। दोस्तों मैं आपसे सवाल पूछता हूं कि क्या कोई इंसान किसी पहाड़ को तोड़ सकता है…? तो आपका जवाब होगा – नामुमकिन है। पर अनेक उदाहरण है जिसमें लोगों ने अपनी जिद की जरिए इस तरह के संभव कामों को भी संभव किया है जिनमें एक उदाहरण है दशरथ मांझी का। दशरथ मांझी नाम के एक साधारण आदमी ने केवल छेनी और हथौड़ी की मदद से एक बड़ा पहाड़ तोड़कर सड़क बना डाली जिन पर “माउंटेन मैन ” नामक सफल फिल्म भी बनी है। और वह खुद भी माउंटेन मैन के नाम से फेमस हूए। दशरथ मांझी ने अपनी जिद और कड़ी मेहनत से यह उपलब्धि हासिल की जो हर किसी को प्रेरणा देती है।

6.  योजनाओं पर अमल करें —

 योजना बनाना आसान है पर उन पर अमल करना अलग बात है। आपने सफलता हासिल करने के लिए जो प्लानिंग तैयार की है उस पर तुरंत एक्शन लें। क्योंकि समय निकालने के बाद सिर्फ पछतावा ही हाथ लगता है। आपका यह साल भी पिछले साल की भांति गुजर जाएगा क्योंकि वक्त का पहिया बड़ी तेजी से घूमता है इसलिए एक अच्छी प्लानिंग तैयार कर उस पर अमल करें। योजना बंद तरीके से आगे बढ़े। अच्छी योजना सफलता और उन्नति का रास्ता तैयार करते हैं प्लानिंग हमें आत्म अनुशासन के लिए तैयार करती है योजना आपके लक्ष्य को साधने में मदद देती है। अपनी मानसिक और शारीरिक ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देते हुए सारी शक्ति अपने जीवन को बेहतर बनाने में लगाए। बीच-बीच में अपनी योजनाओं को आंकते  रहें। और हर दिन का मोल समझे।  समय का सदुपयोग करते हुए अपनी योजना पर अमल करें। सफलता को तय करने वाला यह एक अहम फैक्टर है।

 7. खुशमिजाज बने —

 कुछ लोग खुशमिजाजी की किस्म के होते हैं। आप भी हंसने हंसाने की आदत डालिए इससे आप में अपनी कमियों पर भी हंसने की ताकत आ जाएगी। हंसने हंसाने की आदत इंसान को आकर्षक बना देती है। हंसी हमें गिरकर उठने की शक्ति प्रदान करती है। हंसी दुनिया में हर दर्द की कुदरतती दवा है। खुशमिजाजी और सफलता का गहरा संबंध है खुश मिसाज इंसान के सफल होने के चांस बढ़ जाते हैं।

8. आशावादी बनिए —

 आप आशावादी कैसे बन सकते हैं…? आईये मैं आपको बताता हूं–

” इतने मजबूत बनिए की आपके मन की शांति को कोई भंग नहीं कर सके हर मिलने वाले आदमी से सेहत खुशहाली और समृद्धि के बारे में बातें करे। अपने सभी दोस्तों को एहसास कराये कि आप उनकी खूबियों की कद्र करते हैं। हर चीज के केवल उजले पहलू को देखे। केवल अच्छी से अच्छी बातें सोचें और अच्छे से अच्छे नतीजे के लिए कम करें। बीते दिनों की गलतियों को भूल जाए और आने वाले दिनों में ज्यादा बड़ी कामयाबी हासिल करने के लिए आगे बढ़े। हर आदमी का मुस्कुरा कर स्वागत करें।  अपने को बेहतर बनाने में इतना वक्त लगाए कि दूसरों की आलोचना करने के लिए वक्त ही ना बचे इतने बड़े-बड़े की चिंता छू न सके, और इतने अच्छे बने की गुस्सा आए ही नहीं।

9. हर काम को फौरन करने की आदत डालें —

“वह चांदनी रातों मे सोया

उसने सुनहरी धूप का मजा उठाया

कुछ करने कि तैयारी में जिंदगी गुजारकऱ

वह गुजर गया कुछ न कर हारकर।।

                          —  जेम्स अल्बरी।

 हम सभी जिंदगी में कभी ना कभी ढीला डाला और तलम टोल वाला रवैया अपनाते हैं ऐसा मैंने भी किया है जिसके लिए मुझे बाद में बहुत पछताना पड़ा तलम टोल की आदत की वजह से हमारा नजरिया नकारात्मक बन जाता है किसी काम को करने से अधिक थकान उसे काम को ने करने के लिए की जाने वाली तलम टोल की वजह से होती है कोई भी काम पूरा होने पर खुशहाली आती है और हौसला बुलंद होता है जबकि आधा अधूरा काम हमारी हिम्मत को वैसे ही खत्म कर देता है जैसे पानी के टैंक में हुआ कोई छेद टैंक को खाली कर देता है। यह वैसी ही बात है जैसे कि एक छोटा बच्चा कहता है कि मैं बड़ा होने पर फला काम करूंगा जिससे मुझे खुशी और सफलता मिलेगी। जब वह बड़ा हो जाता है तो कहता है कि कॉलेज की पढ़ाई समाप्त होने के बाद में यह काम करूंगा तुम मुझे खुशी मिलेगी।  कॉलेज की पढ़ाई समाप्त होने के बाद वह कहता है कि  नौकरी लगने के बाद मुझे खुशी मिलेगी। नौकरी लगने के बाद वह कहता है कि उसे शादी के बाद खुशी मिलेगी। शादी के बाद वह कहने लगता है कि बच्चे स्कूल जाने के बाद उसे सच्ची खुशी मिलेगी। जब बच्चे स्कूल की पढ़ाई पूरी कर लेते हैं तो वह कहता है कि मुझे खुशियां रिटायर होने के बाद मिलेंगी, और रिटायर होने के बाद में   वह क्या देखा है…?  कि उसकी आंखों के सामने ही पूरी जिंदगी गुजर चुकी है। काम को टालते रहने कि आदत हमें असफल बनाती हैं। “बाद में कर लूंगा”– इस वाक्य को आज ही अपनी जिंदगी से निकाल कर बाहर कर दीजिये। वरना काम को टालने की आदत एक बीमारी बनाकर आपको जिंदगी भर सताएगी। आपने जो भी लक्ष्य निर्धारित किए हैं उन पर तुरंत एक्शन लीजिए, और हर काम को फौरन करने की आदत डालिए। यह सफलता का एक सूत्र है।

10. नकारात्मक असर से बचें —

 हमारे सामने मौजूद किसी भी तथ्य से ज्यादा महत्वपूर्ण उस तथ्य के बारे में हमारा नजरिया होता है क्योंकि हमारी सफलता या असफलता उसी से तय होती है। आप अच्छी चीजों की खोजकर्ता बनिए। अपनी जिंदगी के सकारात्मक पहलू पर ध्यान देना शुरू कीजिए किसी इंसान या किसी हालत के बुरे पहलू के बजाय उसके अच्छे पहलू पर गौर करना शुरू करें हम में से ज्यादातर लोगों को अपनी ही सोच का माहौल इस ढंग से डाल देता है कि हम गलतियों और कमियों को ढूंढने के आदी हो चुके होते हैं और इसीलिए तस्वीर का अच्छा पहलू हमसे अनदेखा रह जाता है।  ओलिवर बेंदहाल होम्स कहते हैं कि “हमारी जिंदगी का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि ज्यादातर लोग मन में कुछ करने की इच्छा लिए ही कब्र में चले जाते हैं। हम अपनी दूरदर्शिता की कमी की वजह से सफलता हासिल नहीं कर पाते।” नकारात्मक असर किस कदर हमारी जिंदगी को प्रभावित कर सकता है इसके लिए मैं आपको एक कहानी सुनाता हूं — एक चील का अंडा किसी तरह एक  मुर्गी के घोसले में गिर गया। और बाकी अंडों के साथ मिल गया। समय आने पर वह अंडा फूटा और चील का बच्चा यह सोचता हुआ बड़ा हुआ कि वह मुर्गी है। वह उन्हीं कामों को करता था जिन्हें मुर्गी करती थी। वह जमीन खोदकर अनाज के दाने चुगता और मुर्गी की तरह ही कुड़कुडाता था। वह कुछ फिट से अधिक उड़ान नहीं भर पता था क्योंकि मुर्गी भी ऐसा ही करती थी। एक दिन उसने आकाश में एक चील को बड़ी शान से उड़ते हुए देखा उसने मुर्गी से पूछा– “उस सुंदर चिड़िया का क्या नाम है…?  मुर्गी ने जवाब दिया वह चील है। वह एक शानदार चिड़िया है लेकिन तुम उसकी तरह उड़ान नहीं भर सकते क्योंकि तुम तो मुर्गी हो। चील के बच्चे ने बिना सोचे विचारे मुर्गी की बात को मान लिया। वह मुर्गी की जिंदगी जीता हुआ ही मर गया। सोचने की क्षमता न होने के कारण वह अपनी विरासत को खो बैठा। उसका कितना बड़ा नुकसान हुआ। वह जीतने के लिए पैदा हुआ था पर वह दिमागी तौर पर हार गया।

 अगर आप चील की तरह आकाश की बुलंदियों को छूना चाहते हैं तो आपको चील के तौर तरीकों को सिखाना होगा, अगर हम खुद को कामयाब लोगों के साथ जोड़ेंगे तो हम भी कामयाब हो जाएंगे, अगर हम नकारात्मक सोच वाले लोगों के साथ रहेंगे,  तो हम भी वैसे ही बन जाएंगे।

11. असफलता का डर मन से निकालें –

 हर इंसान में कोई ना कोई ऐसी आदत तो जरूर होती है जो उसकी तरक्की में बाधा पैदा कर सकती है। यह उसकी सफलता की राह में रोड़े अटका सकती है अगर समय रहते इन खराब आदतों पर ध्यान नहीं दिया जाता तो न केवल तरक्की में बल्कि प्रबंधन क्षमता पर भी असर पड़ता है। यदि आप अपने जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो उसके लिए बहुत जरूरी है कि आप अपनी कमियों को अच्छी तरह जाने और समय रहते उनमें सुधार करने का प्रयास करें। स्थिति कैसी भी हो आवज में आकर भावनात्मक रूप से कोई फैसला नाले अपनी पिछली असफलताओं को ध्यान में रखें और सोचें कि जल्दबाजी में क्या खोया है। असफलता का डर मन में है तो किसी भी काम में जोखिम लेने से डर लगेगा और फिर आप अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाएंगे। इस वजह से आप नकारात्मक सोच विकसित कर लेंगे और आत्मविश्वास की कमी महसूस करने लगेंगे यह सफलता से डरे नहीं, इस सफलता तक पहुंचाने की सीधी बनाएं।

निष्कर्ष —

 दोस्तों सफलता यूं ही नहीं मिलेगी.. सफलता के रास्ते में आपको कांटे भी मिलेंगे, तो ठोंकरें भी लगेंगी। लेकिन इन बातों से घबराना नहीं है बल्कि इन्हें अपनी  “प्रेरणा डायरी” ( मोटिवेशन डायरी )बनाना है। विनम्रता के साथ इन मुसीबत को स्वीकार करना है फिर आपको जो सफलता प्राप्त होगी वह सच्ची सफलता होगी वह उच्च किस्म की कामयाबी होगी।

— हेनरी फोड़ने जब पहली कर बनाई तब उसमें रिवर्स गियर डालना भूल गए थे।

— थॉमस एडिसन बिजली का बल्ब बनाने से पहले सैकड़ो बार

 असफल हुए थे।

— हेनरी फोर्ड अपनी 40 साल की उम्र में ही दिवालिया हो गए थे।

 हर ठोकर लगने के बाद, असफलता मिलने के बाद हम स्वयं से पूछे कि हमने इन तजुर्बा से क्या सीखा है तभी हम इन असफलताओं से पार पाके, सच्ची सफलता और सच्ची कामयाबी की सीढ़ी चढ़ पाएंगे।

महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

प्रश्न – सफलता क्या है..?

उत्तर — सफलता किसी मूल्यवान उद्देश्य की प्राप्ति होती है। आप अपने जीवन में जो लक्ष्य निर्धारित करते हैं, उन  लक्ष्यो को प्राप्त कर लेना ही सफलता है।  जिंदगी में खुशी और समृद्धि हासिल करना सफलता है। कठिनाई और बधाओं को पार करके जीत हासिल करना सफलता है। सफलता की सारी कहानी संघर्षों और दृढ़ संकल्पओं पर टिकी हुई होती है। जिंदगी में कठिन परिश्रम से चुनौतीयों को पार करके,खुशहाली और समृद्धि प्राप्त करना सफलता है। 

दोस्तों, सफलता अचानक से हासिल नहीं होती हैं। यह निरंतर किये जाने वाले प्रयासों का परिणाम होती है। सफलता एक सुहाने सफर की भांति है। हम एक लक्ष्य को पूरा करते हैं और दूसरे में जुट जाते हैं और यह सफर चलता रहता है। हर इंसान के लिए सफलता के मायने अलग-अलग होते हैं। जैसे — एक छात्र अच्छे अंक प्राप्त करके अपने आप को सफल मानता है। कोई नौकरी लगकर अपने को सफल समझता है। किसी के लिए दौलत,शोहरत कमाना सफलता है। एक किसान अच्छी फसल पैदा करके अपने को सफल मानता है। एक वैज्ञानिक नए अनुसंधान को अपनी सफलता के रूप में देखाता है. कोई अच्छी सेहत और खुशी को हासिल करना अपनी सफलता मानता है। कई लोग अपने परिवार और बीवी बच्चों की खुशहाली को अपनी सफलता मानते हैं। मैं एक राइटर हूं और अच्छा लिखने के प्रयासों को अपनी सफलता मानता हूं। इसका मतलब यह हुआ की सफलता एक निजी एहसास है, हर आदमी अपने हिसाब से अपनी सफलता के माप दंड तय करता है, फिर भी सफलता को अच्छे ढंग से परिभाषित करना हो तो कुछ यूं कर सकते हैं–

“जिंदगी में निर्धारित किये गये मूलवान उद्देश्यों को प्राप्त करना सफलता है।”

Question 2. किस व्यक्ति को सफल व्यक्ति माना जाता है…?

उत्तर — सफल व्यक्ति वह माना जाएगा जो अपने जीवन में पूर्व निर्धारित मूल्यवान लक्ष्यो को प्राप्त कर लेता है। एक सफल व्यक्ति का जीवन सुख, समृद्धि और खुशहाली से भरपूर होता है। सफल व्यक्ति अपने जीवन  को आनंद के साथ व्यतीत करता है। सफल लोग बेहद मेहंती, कठोर परिश्रमी, और जुनूनी होते हैं। सफल व्यक्ति संघर्षशील और दृढ़ संकल्प वान होते हैं।

Question 3. सफलता पाने के 7 नियम कौन-कौन से हैं..?

उत्तर – अपने जीवन में निर्धारित किए गए मूल्यवान उद्देश्यों की प्राप्ति, खुशी और समृद्धि, शोहरत और तनाव मुक्त जीवन कि प्राप्ति को ही सफलता माना जाता है। 

जीवन में सफलता पाने के लिए इन 7 नियमों का जरूर करें पालन

  1. आत्मनिर्भर बनें
  2. सही लोगों को चुनें
  3. अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें
  4. ज्यादातर लोग आपके लिए अच्छा नहीं चाहते
  5. अपना मूल्य कम ना होने दें
  6. गलतियां करने से ना डरें
  7. नया ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करें
  8. सही लक्ष्य का चुनाव करें
  9. कठिन परिश्रम करें।

Question 4.  सफलता हासिल करने के 10 नियम क्या है..?सफलता के लिए कई नियम हैं, जैसे कि लक्ष्य तय करना, समय का सही प्रबंधन करना, और आत्म-अनुशासन. सफलता पाने के लिए, इन नियमों का पालन किया जा सकता है:

       *लक्ष्य तय करे

    अपने छोटे और बड़े लक्ष्यों को साफ़ तौर पर तय करें.

      * समय का सही प्रबंधन करें

     समय सबसे कीमती संसाधन है. अपनी प्राथमिकताओं को तय करें और समय का सदुपयोग करें.

      *आत्म-अनुशासन में निपुणता हासिल करें

  • आत्म-अनुशासन लक्ष्यों और उपलब्धियों के बीच का पुल है. 
  • सीखते रहेंकिताबें पढ़ें, मेंटर से मार्गदर्शन लें, और नए अनुभव प्राप्त करें. 
  • सकारात्मक ऊर्जा को चुनेंकृतज्ञता, विनम्रता, धैर्य, साहस, खुशी, कड़ी मेहनत, दान, और दयालुता जैसी सकारात्मक ऊर्जा को चुनें. 
  • नकारात्मकता से बचेंक्रोध, लालच, आलस्य, ईर्ष्या, घृणा, बदला, अहंकार, अधिकार, या किसी भी अन्य प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा के आगे न झुकें. 
  • समय पाबंद रहेंसफलता रातों-रात नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए सालों लग जाते हैं. 
  • आत्मविश्वासी बनेंजीवन में सफल बनने के लिए खुद पर विश्वास करना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है. 
  • दूरदर्शिता रखेंदूर की सोचने या समझने के गुण को दूरदर्शिता कहते हैं. 

आर्थिक योजना रखें राइट, तो फ्यूचर होगा ब्राइट।

*आर्थिक फंडा = अब निवेश की चिंता से आजादी*

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by- लिग़री जी

आज का युग आर्थिक युग है। अर्थात जमाना पैसे का है। भली हमारी जिंदगी में बाकी चीजों का भी बहुत महत्व है लेकिन पैसा सबसे महत्वपूर्ण चीज बन चुका है। एक कहावत है कि ” पैसा भगवान तो नहीं लेकिन भगवान से कम भी नहीं है।” ठीक एक ऐसी ही देसी कहावत और है कि “बाप बढ़ा ना भैया, सबसे बड़ा रुपैया।” यह कहावतें आधुनिक जमाने में पैसे के महत्व को इंगित करती हैं। लेकिन अब हम सबके सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वह कौन से काम है, जिन्हें करके हम अपनी आर्थिक स्थिति को राइट और अपने फ्यूचर को ब्राइट कर सकते हैं.?

आप अपने नए वित्त वर्ष की शुरुआत में, अगर कुछ अच्छी फाइनेंशियल हैबिट्स डालने और निश्चय कर ले तो आपके लिए फायदेमंद होगा। क्योंकि आज के जमाने में “फाइनेंस फिट है तो लाइफ हिट है।”

तो दोस्तों, आप निश्चिंत रहिए आज की आर्थिक फंडा (ब्लॉग ) की इस बेहतरीन पोस्ट में मैं आपको बताने वाला हूं कि कैसे आप अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग को राइट रखें, और अपने फ्यूचर को ब्राइट करें। इसके लिए आपको बहुत ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है बल्कि मैं आपके छोटे-छोटे फाइनेंशियल टिप्स दे रहा हूं इन्हें अपना कर आप अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग और सिचुएशन को स्ट्रांग कर सकते हैं। तो आईए जानते हैं वह कौन-कौन से उपाय हैं, जिन्हें अपना कर हम अपने फाइनेंशियल फ्यूचर को ब्राइट रख सकते हैं।

आज की पोस्ट में

  1. भविष्य को ध्यान में रखें।
  2. अपने फाइनेंशियल लक्ष्य को लिखें।
  3. रिकरिंग डिपॉजिट शुरू करें।
  4. सोच समझ कर लोन ले
  5. बड़े खर्च सोच समझ कर करें।
  6. प्रॉपर्टी बनाने पर विचार करें।
  7. फाइनेंशियल स्किल्स और नॉलेज अपडेट करें।
  8. फालतू खर्च बंद करें।
  9. आय के नए स्रोत बनाएं।
  10. इन बातों पर भी ध्यान दें।
  11. निष्कर्ष।
  12. महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर।

1. भविष्य को ध्यान में रखें :

याद रखें युवावस्था में आपकी भीतर जो जूस ऊर्जा और मेहनत करने की क्षमता है, इस उम्र में आपके दिमाग की जो सक्रियता और मुस्तादी है वह प्रौढ़ अवस्था और वृद्ध अवस्था में नहीं रहेगी। कमाई भी हमेशा एक जैसी नहीं रहती इसलिए जब आप अच्छी कमाई कर रही हो तो सारा पैसा मौज मस्ती या कथित तौर पर स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग को हाय करने में ही ने उड़ा दे बल्कि अपने आधे वक्त के लिए या रिटायरमेंट के बाद की लाइफ के लिए संचय और निवेश भी करें। इसके लिए हर महीने कमाई का कुछ निश्चित हिस्सा अवश्य बचाये।

2. अपने फाइनेंशियल लक्ष्य को लिखें :

निकट भविष्य में या दीर्घ अवधि में आपको कौन-कौन सी जिम्मेदारियां पूरी करनी है, क्या चल अचल संपत्ति खरीदनी है, बच्चों की शिक्षा, उनका विवाह, उनके मेडिसिन आदि से संबंधित अनुमानित खर्च कितना आ सकता है इन सारी चीजों को अपनी एक डायरी में लिखकर रखें। अपने फाइनेंशियल लक्ष्य हमेशा नजरों के सामने रहेंगे तो बेहतर रहेगा। इस विवरण को नियमित अंतराल पर देखते रहें, ताकि स्मरण रहे और भूल नहीं। लक्ष को प्राप्त करने के लिए बचत करने फिजूल खर्ची रोकने और ज्यादा कमाई करने की प्रेरणा और ऊर्जा प्राप्त होती है।

आर्थिक फंडा ब्लॉग — निवेश की आजादी

3. रिकरिंग डिपॉजिट शुरू करें :

सबसे पहले आप यह समझे की रिकरिंग डिपॉजिट क्या होता है..?

रिकरिंग डिपॉजिट (RD) एक बचत योजना है जिसमें आपको हर महीने एक निश्चित राशि जमा करनी होती है और यह जमा राशि निश्चित अवधि के लिए होती है. यह फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का एक विकल्प है, जिसमें एक बार में एकमुश्त राशि जमा करनी होती है. आरडी में जमा राशि पर ब्याज भी मिलता है, जो आमतौर पर FD के समान ही होता है।

मेरा सुझाव है कि आप रिंग डिपॉजिट जरूर शुरू करें। आपके दीर्घ अवधि की रैकिंग डिपॉजिट बैंक या पोस्ट ऑफिस में खुला लेनी चाहिए। इससे आप हर महीने एक खास रकम इकट्ठा करते रहेंगे जिसकी वैधता रहेगी। साथी आज मौजूद ब्याज दर पर लंबे समय के लिए पैसा जमा करेंगे तो आगे चलकर ब्याज कम होने का नुकसान भी नहीं उठाना पड़ेगा आप चाहे तो दीर्घ अवधि की फिक्स डिपाजिट भी करवा सकते हैं। इसे हर महीने आपकी बचत होती रहेगी।

4. सोच समझ कर लोन ले :

किसी फर्जी या ठगी करने वाले फाइनेंस कंपनी की लुभानी बातों में जाकर वहां से लोन लेना आपको भारी पड़ सकता है। मार्केट में सैकड़ो कंपनियां लोन देती हैं। कम ब्याज, लोक लुभावन वादे, तुरंत पैसा आदि के झूठे वादे करके ग्राहकों को फंसा लिया जाता है। लोन लेने के बाद कुछ महीना या कुछ वर्ष के बाद पता चलता है कि हम फंस चुके हैं गलत जगह पर। लोन हमेशा ब्याज की दर मालूम करके ठोक बजाकर बारगेन और दूसरी जगह से तुलना करके ही लें अच्छी तरह सोच समझ ले कि आप जो रकम लोन ले रहे हैं उसे चुके समय वास्तविक ब्याज कितना देना पड़ रहा है। बैंक या प्रतिष्ठित गैर बैंकिंग वित्तीय संस्था से ही लोन ले यह भारत सरकार और रिजर्व बैंक के प्रति जवाब दे होते हैं, और फर्जी वाड़े की तथा ठगी की संभावना कम होती है।

5. बड़ा खर्च सोच समझकर करें :

कभी भी किसी के प्रभाव में आकर, किसी से बराबरी करने के लिए, दूसरों के सामने बड़ा बनने के लिए और अपनी अमीरी का प्रदर्शन करने के लिए पैसे नहीं उड़ाये। आजकल पड़ोसियों और दूसरों की देखा देखी करने की होड़ है, जैसे पड़ोसी के पास फोर व्हीलर है तो हमें भी फोर व्हीलर ले है चाहे उसकी आवश्यकता ही नहीं हो। इसीलिए मेरा मानना है कि अचानक कोई महंगा गैजेट कर बाइक या अन्य लग्जरी आइटम खरीदने का विचार मन में आए तो तुरंत फैसला ने लेकर इस निर्णय को हफ्ते दो हफ्ते के लिए डिले करें। और इस बीच कई बार इस बात पर विचार करें कि जो चीज आप खरीदने वाले हैं क्या वाकई में आपको उसकी जरूरत है..? या उसके बिना भी आपका काम चल सकता है। इस बात की बहुत संभावना है कि अगर यह है खरीददारी आपके लिए गैर जरूरी है तो ऐसी प्रक्रिया अपनाने से आपका विचार बदल जाए और आप अनावश्यक खर्चे से बच सकते हैं।

6. प्रॉपर्टी बनाने पर विचार करें :

कमाया, खाया पिया और उदय यह सोच बुढ़ापे में बहुत तकलीफ दे साबित होती है। बच्चे बड़े होकर दूर हो जाते हैं। बुढ़ापे में कमाई के स्रोत कम या खत्म होने लगते हैं। एक उम्र के बाद तन और मन में नाव ऊर्जा रहती है और ना ही चुस्ती और फुर्ती। इसीलिए समय रहते कुछ चल अचल संपत्ति का बंदोबस्त कर लेना चाहिए ताकि उसे आसानी हो सके। जैसे दुकान या मकान आदि खरीदना। छोटे काशन में भी बाजार में दुकान 15-20000 महीने का किराया दे देती है, इसी तरह शहर या किसी कस्बे में खरीदा गया मकान आपको हर महीने किराया देता रहता है साथ ही प्रॉपर्टी की कीमत भी बढ़ती रहती है। इसके अतिरिक्त आप अच्छी कंपनियों के शेर ब्लू चिप कंपनियों के शेयर्स म्युचुअल फंड गोल्ड सिल्वर आदि में निवेश कर सकते हैं इससे आपके हाथ मजबूत होंगे।

7. फाइनेंशियल स्किल और ज्ञान को अपडेट करें :

वित्तीय जगत में बहुत तेजी से परिवर्तन होते हैं। सरकार की नीतियों जनसंख्या बाजार में मांग और आपूर्ति के आधार पर कारोबार बदलते रहते हैं। कंपनियों की बैलेंस शीट सेवाओं और उत्पादों का ट्रेंड बदलता है रहता है। पैसा कमाते रहने के लिए आपको रेगुलर अखबार पढ़ना चाहिए बिज़नस न्यूज़ देखनी चाहिए टीवी चैनलों पर कारोबार से संबंधित खबरें देखनी चाहिए साथ ही व्यापार से जुड़े अनुभवी लोगों से बातचीत करते रहना चाहिए इससे आपका फाइनेंशियल नॉलेज अपडेट रहेगा। आपको आर्थिक गतिविधियों की जानकारी रहेगी। बदलती तकनीकी के अनुसार गैजेट्स एप्स सोशल मीडिया आदि ऑपरेट करना सीखें तकनीकी जानकारियां और कौशल हासिल करते रहें किसी भरोसेमंद और अनुभवी यूट्यूब पर को फॉलो कर सकते हैं और वित्तीय सलाहकारों से जानकारी ले सकते हैं साथ ही साथ वित्तीय जानकारी देने वाली अच्छी किताबें भी पड़े।

8. फालतू खर्च बंद करें :

अगर आपने कुछ नियमित फालतू खर्च बंद रखे हैं तो उन्हें तुरंत बंद कर दें चाहे वह अनाप-शनाप संख्या में क्रेडिट कार्ड की फीस के रूप में हो ओटीपी प्लेटफार्म सॉन्ग क्लाउड स्टोरेज की मेंबरशिप हो या विभिन्न क्लबोन की वार्षिक फीस हो बाहर ज्यादा खाने की आदत हो ब्रांडों के प्रति दीवानगी हो तो इसे तौबा करें एक-एक बचाया हुआ रुपया कमाए हुए रुपए के समान माना जाता है। पैसों की बर्बादी अपनी जिंदगी और भविष्य की बर्बादी है इसलिए फालतू खर्च अगर आपके द्वारा हो रहे हो तो उन्हें तुरंत बंद कर दें। यह भी आपकी एक बचत होगी।

9. आय के नए स्रोत बनाएं :

आपको अपनी आय के स्रोत एक से ज्यादा रखना चाहिए रेगुलर बिजनेस इनकम या सैलानी के अलावा कुछ फिक्स इनकम आ सके इसलिए किसी पार्ट टाइम जॉब फ्रीलांस राइटिंग कोचिंग यूट्यूब चैनल ब्लॉगिंग आदि पर विचार करना चाहिए। इनमें से किसी एक काम में अगर आपकी रुचि हो तो आप नियमित रूप से दो-तीन घंटे का समय निकालकर इन्हें कर सकते हैं और एक निश्चित अमाउंट आप नियमित इनकम के रूप में प्राप्त कर सकते हैं। इससे आपको अचानक आए हुए आर्थिक संकटों के समय परेशान नहीं होना पड़ेगा साथ ही आप एक्टिव और एनर्जेटिक भी रहेंगे

10. इन बातों पर भी ध्यान दे :

1. अगर आपके पास एक से ज्यादा बचत खाते हैं तो उनकी उपयोगिता पर विचार करें और उन बेकार खातों को बंद करवा दे।

2. क्रेडिट कार्ड डेबिट कार्ड की स्कोर को चेक करते रहें और जरूरी होने पर ही इनके इस्तेमाल करें। इनका दुरुपयोग हानिकारक होता है, आपको आर्थिक रूप से क्षति पहुंचा सकता है।

3. हमेशा अपने आए और खर्च का हिसाब एक डायरी में रखें। पैसों का हिसाब रखना एक अच्छी फाइनेंशियल हैबिट है। आप खर्च जैसे – किसे उधार दिया, किस से उधार लिया, घरेलू खर्च में कितना पैसा गया, दूध पेट्रोल सब्जी फीस दवाइयां हर खर्च को रोज रात को अपनी डायरी में लिखें इससे आपकी याददाश्त बनी रहेगी।

4. अपनी एचडी रिकरिंग डिपॉजिट म्युचुअल फंड इक्विटी आदि को एक नोटबुक में दर्ज करके रखें।

5. अपने घरेलू बिल जैसे बिजली पानी का बिल टेलीफोन का बिल आदि को समय पर जमा कारण क्योंकि डेट निकलने के बाद बेवजह पेनल्टी देनी पड़ती है।

महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर :

Question 1. अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग को कैसे ब्राइट रखें..?

उत्तर – अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग को ब्राइट रखने के लिए, सबसे पहले एक बजट बनाएं और उसका पालन करें, अपनी बचत और निवेश को व्यवस्थित करें, और वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने की योजना बनाएं। इसके अलावा, अपनी वित्तीय स्थिति को समय-समय पर जांचें और आवश्यकतानुसार समायोजन करें।

विस्तार से:

वित्तीय योजनाकार:यदि आप वित्तीय योजना बनाने में संघर्ष कर रहे हैं, तो एक वित्तीय योजनाकार से परामर्श लें. 

बजट बनाना और उसका पालन करना:अपने आय और व्यय को ट्रैक करें और एक बजट बनाएं। यह आपके खर्चों को नियंत्रित करने और भविष्य के लिए बचत करने में मदद करता है. 

बचत और निवेश:अपनी आय का कुछ हिस्सा बचत और निवेश के लिए अलग रखें। निवेश के लिए, विभिन्न प्रकार के निवेश विकल्पों पर विचार करें, जैसे कि शेयर, बॉन्ड और म्यूचुअल फंड. 

वित्तीय लक्ष्य बनाना:अपने वित्तीय लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें, जैसे कि घर खरीदना, कॉलेज जाना, या जल्द रिटायरमेंट। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक योजना बनाएं और समय-समय पर उसकी समीक्षा करें. 

वित्तीय स्थिति की समीक्षा:अपनी वित्तीय स्थिति को समय-समय पर जांचें और अपनी प्रगति को ट्रैक करें। यदि आप अपने लक्ष्यों से पीछे रह रहे हैं, तो अपनी योजना में बदलाव करें. 

विभिन्न वित्तीय विकल्पों पर विचार करना:अपने वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न वित्तीय विकल्पों पर विचार करें, जैसे कि ऋण, बीमा, और वित्तीय योजनाकार. 

आपातकालीन निधि:अप्रत्याशित खर्चों के लिए एक आपातकालीन निधि बनाएं. 

कर योजना:करों का प्रबंधन करें और अपने निवेश को अधिकतम करें. 

वित्तीय साक्षरता:अपने वित्तीय ज्ञान को बढ़ाएं और वित्तीय निर्णयों के बारे में बेहतर जानकारी प्राप्त करें. 

गोल्ड-सिल्वर लोन से जुड़े 8 नियम बदले, 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे

by – kedar lal, tudawali-parla, karauli, rajasthan. india

भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई समय-समय पर अपने वित्तीय नियमों में जो की, लेनदेन कर्ताओं से जुड़े होते हैं, उन्हें परिवर्तित करती रहती है आरबीआई ने पिछले हफ्ते एलटीवी रेशों बढ़ाने सहित गोल्ड लोन से जुड़े आठ नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों का मकसद है कि लोगों को आसानी से लोन मिले और बैंक एनबीएफसी पारदर्शी तरीके से काम करें। आरबीआई के संशोधित नियम सभी वाणिज्यिक बैंकों एनबीएफसी सहकारी बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों पर लागू होंगे। इन नए नियमों से सबसे बड़ा फायदा यह होने वाला है की कागजी कार्रवाई कम होगी और अगर लोन चुका दिया तो सोना भी जल्दी वापस मिलेगा यह नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। दोस्तों, arthikfunda.com (आर्थिक फंडा ब्लॉग ) कि आज की एक और बेहतरीन पोस्ट में आइये जानते हैं उन 8 महत्वपूर्ण नियमों को नियमों को जो हाल ही में आरबीआई ने बदले हैं और गोल्ड सिल्वर लोन से जुड़े हुए हैं। यह बदलाव हम सभी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि गोल्ड और सिल्वर ऐसी वस्तुएं हैं जो हमारे दैनिक जीवन में को प्रभावित करती हैं।

बदले हुए आठ नियम..ये रहे :

आज की पोस्ट में ( टेबल ऑफ कंटेंट )

  1. एलटीवी रेशों।
  2. क्रेडिट चेक।
  3. बुलेट रीपेमेंट।
  4. सोना चांदी गिरवी रखने की लिमिट।
  5. मुआवजा।
  6. चोरी होने पर।
  7. नीलामी।
  8. सरल भाषा।
  9. नए नियमों से कर्ज दाता को मिलेगा फायदा।
  10. संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर।

1. एलटीवी रेशों :

आरबीआई ने ढाई लाख रुपए से कम के होम लोन का एलटीवी रेशों 75% परसेंट से बढ़ाकर 85% कर दिया है। इससे ग्राहक को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वह सोने के प्राइस का 85% तक लोन ले सकता है। इससे पहले ऐसा नहीं था आरबीआई ने यह एक बड़ा बदलाव किया है। अर्थात अब आप ₹100000 के सोने पर 85000 तक का लोन ले सकते हैं।

जानें..क्या होता है एलटीवी रेशों..?

एलटीवी अनुपात (Loan to Value Ratio – LTV) का अर्थ है आपके द्वारा उधार ली गई राशि (लोन) और उस संपत्ति के मूल्य का अनुपात जिस पर आपने लोन लिया है। यह अनुपात बैंक या वित्तीय संस्थान को तय करने में मदद करता है कि वे आपको कितनी राशि उधार दे सकते हैं और इससे वे कितना जोखिम उठा सकते हैं. उदाहरण के लिए, अगर आप ₹1 करोड़ की संपत्ति खरीदने के लिए लोन लेते हैं और बैंक का LTV अनुपात 70% है, तो बैंक आपको अधिकतम ₹70 लाख तक लोन दे सकता है.

2. क्रेडिट चेक :

नए नियमों के मुताबिक ढाई लाख रुपए तक लोन के लिए इनकम प्रूफ नहीं मांगा जाएगा और क्रेडिट स्कोर चेक नहीं होगा। इससे पहले लोन देते वक्त इनकम प्रूफ मांगा जाता था और क्रेडिट स्कोर भी चेक किया जाता था कि जरूरतमंद ग्राहकों को इस कारण बड़ी परेशानी होती थी। अपनी इनकम प्रूफ नहीं कर पाने के कारण जरूरतमंद होते हुए भी उन्हें लोन नहीं मिल पाता था। लेकिन अब इनकम प्रूफ और क्रेडिट स्कोर दोनों की अनिवार्यता समाप्त होने से कम आय वाले लोगों को भी आसानी से गोल्ड सिल्वर लोन मिल सकेगा। आरबीआई ने यह दूसरा बड़ा बदलाव किया है।

3. बुलेट रीपेमेंट :

बुलेट रीपेमेंट से तात्पर्य है कि इसके तहत मूलधन और ब्याज अंत में एक साथ चुकाना पड़ता है, इस सिस्टम को बुलेट रीपेमेंट कहा जाता है। जो ग्राहक बुलेट रीपेमेंट लोन लेते हैं उनके लिए इसे चुकाने की समय सीमा तय की गई है। अब बुलेट रीपेमेंट को 12 महीना में चुकाना अनिवार्य होगा। यह आरबीआई द्वारा गोल्ड-सिल्वर लोन में किया गया तीसरा बड़ा बदलाव है।

4. सोना चांदी गिरवी रखने की लिमिट :

पदार्थ अधिकतम सीमा

1. सोने के गहने – 1 kg

2. सोने के सिक्के – 50 ग्राम

3. चांदी के गहने – 10 kg

4. चांदी के सिक्के – 500 gram

5. मुआवजा :

लोन बंद करने के बाद सोना या चांदी उसी दिन या अधिकतम साथ वर्किंग डेज में लौटना जरूरी होगा अगर देर होती है तो बैंक को हर दिन के लिए ग्राहक को ₹5000 मुआवजा देना होगा यह एक बड़ा बदलाव किया गया है जो ध्यान रखने योग्य है।

6. चोरी होने पर :

अगर गिरवी रखा गया सोना या चांदी बैंक की गलती से चोरी हो जाते हैं या गुम हो जाते हैं या खराब हो जाते हैं तो ग्राहक को पूरा मुआवजा दिया जाएगा यह आरबीआई द्वारा किया गया छठा बदलाव है।

7. नीलामी :

अगर ग्राहक लोन नहीं चुका पाता और बैंक सोने की नीलामी करता है तो नीलामी से पहले नोटिस देना होगा। ग्राहक को सूचित किया जाएगा की लोन नहीं चुकाने के कारण आपका सोना या चांदी नीलाम किया जा रहा है। रिजर्व प्राइस मार्केट प्राइस के 90% से कम नहीं होगा। बैंक नीलामी में बचा अमाउंट ग्राहक को 7 दिन में लौट आएगा।

8. सरल भाषा :

दोस्तों लोन लेते वक्त कई बार अंग्रेजी भाषा और बैंकिंग सेक्टर की कठिन भाषा का इस्तेमाल किया जाता था जो सामान्य ग्राहक समझने में सक्षम नहीं होता था। परंतु अब लोन की शर्तें और वैल्यूएशन की समस्त जानकारी ग्राहक को स्थानीय भाषा में दी जाएगी। अगर ग्राहक पढ़ना लिखना नहीं जानता है तो एक गवाह की उपस्थिति में जानकारी दी जाएगी जो इन बातों को अच्छी तरह से समझ सकता हो। यह अनपढ़ ग्राहकों के लिए एक बड़ा बदलाव माना जाएगा, क्योंकि लोन लेते समय उनसे सबसे बड़ी समस्या नियम, कानून और वैल्यूएशन को समझने में होती थी। वह बैंकिंग सेक्टर की कठिन भाषा को समझ नहीं पाते थे।

ध्यान देने योग्य बात :

आरबीआई ने नई संशोधित गाइडलाइंस में साफ कर दिया है कि ग्राहकों को गोल्ड बुलियन, गोल्ड बार, गोल्ड म्युचुअल फंड होल्डिंग, और गोल्ड सिल्वर ईटीएफ पर लोन नहीं मिलेगा। ग्राहकों को गोल्ड सिल्वर लोन केवल सोने चांदी के गहने और सिक्कों पर ही मिल सकेगा यह ध्यान देने योग्य बात है।

8. निष्कर्ष :

हम सभी को, चाहे गरीब हो या अमीर, चाहे व्यापारी हो या नौकरी पेशा कभी ना कभी किसी न किसी रूप में पैसों की आवश्यकता पड़ती रहती है लोन हमारे रुके हुई कामों को पूर्ण करने में सहायता प्रदान करता है। अधिकांश व्यक्ति जीवन में कभी ना कभी लोन लेते भी हैं। मेरा मानना है कि लोन लेने की प्रक्रिया सरल और ग्राहकों के लिए उपयोगी होनी चाहिए। इससे ने केवल ग्राहकों को बल्कि बैंकों को भी लाभ पहुंचता है।

मैंने रिसर्च करने के बाद यह महसूस किया है कि हाल ही में आरबीआई द्वारा किए गए यह आठ बड़े बदलाव जो गोल्ड सिल्वर लोन से जुड़े हुए हैं काफी महत्व पूर्ण भी हैं और ग्राहकों के लिए फायदेमंद भी हैं। Arthikfunda.com ब्लॉग बैबसाइट का चीफ एडिटर होने के नाते में इन बदलाव का स्वागत करता हूं, और आरबीआई को धन्यवाद प्रेषित करता हूं।

9. नए नियमों से कर्ज डाटा को मिलेगा फायदा :

भारतीय रिजर्व बैंक के नए दिशा निर्देश “गोल्ड लोन” क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाले हैं… जिन रन दाताओं के पास अपने बिजनेस मॉडल को तेजी से बदलने की क्षमता होगी वह इन नए नियमों से लाभान्वित होंगे। यह बात मैंने पहले भी बताई थी और एस&पी ग्लोबल रेटिंग की रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई है। इस रिपोर्ट का मानना है कि रन दाताओं के पास गोल्ड समर्थित उपभोग रेनू के लिए कम अवधि के ऋण देने की अधिक स्वतंत्रता होगी जिससे छोटे उद्धार करता अपनी गिरवी रखी गई सोने की संपत्तियों से अधिक मूल्य प्राप्त कर सकेंगे। रन दाताओं के पास बदलाव के लिए तैयार होने के लिए 1 अप्रैल 2026 का समय है। इस बदलाव से कम से कम मध्यम आय वाले उधर कर्ताओं को लाभ होगा। रिपोर्ट में आए उत्पादक ऋणों में वृद्धि की भी उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार भले ही ऋण दाता नए मॉडलों के साथ प्रयोग कर रहे हो लेकिन वास्तविक अंतर यह रहेगा कि वह रन को शीघ्रता से और निर्वाण रूप से वितरित करने में सक्षम होंगे।

रिपोर्ट में नए नियमों की दो तत्वों को लेकर जानकारी दी गई है पहला लोन टू वैल्यू (एलटीवी) रिशु की गणना में मैच्योरिटी तक ब्याज भुगतान को शामिल करना। यह प्रभावी रूप से वितरित किए जाने वाले अग्रिम राशि ऋण को सीमित कर सकता है जैसे ऋण दाता दूर करने का प्रयास करेंगे। दूसरा $3000 से अधिक के उपभोग केंद्रित ऋणों और सभी आए उत्पादक ऋणों के लिए उधर करता हूं के नगदी प्रभाव विश्लेषण के आधार पर रन मूल्यांकन अनुप्रयोग।

10. महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर ( Q & A )

Question 1. एलटीवी रेशों क्या होता है..?

उत्तर – एलटीवी अनुपात (Loan to Value Ratio – LTV) का अर्थ है आपके द्वारा उधार ली गई राशि (लोन) और उस संपत्ति के मूल्य का अनुपात जिस पर आपने लोन लिया है। यह अनुपात बैंक या वित्तीय संस्थान को तय करने में मदद करता है कि वे आपको कितनी राशि उधार दे सकते हैं और इससे वे कितना जोखिम उठा सकते हैं. 

उदाहरण के लिए, अगर आप ₹1 करोड़ की संपत्ति खरीदने के लिए लोन लेते हैं और बैंक का LTV अनुपात 70% है, तो बैंक आपको अधिकतम ₹70 लाख तक लोन दे सकता है. 

क्वेश्चन 2. आरबीआई द्वारा बदले गए गोल्ड नियम कब से लागू होंगे.?

उत्तर – हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने गोल्ड लोन से संबंधित नई दिशा निर्देश और नियम लागू किए हैं यह सभी नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।

आर्थिक फंडा ब्लॉग ( arthikfunda.com)

गिरावट से डरकर एसआईपी न रोकें,और भूल कर भी ना करें यह गलतियां, समझें SIP से जुड़ी हर बात को।

आज की पोस्ट में ( टेबल ऑफ़ कंटेंट )

  1. एस आई पी क्या है..?
  2. एस आई पी कैसे काम करता है।
  3. एस आई पी के फायदे क्या हैं..?
  4. SIP की गणना कैसे करें।
  5. एसआईपी निवेश योजनाओं की खास बातें/ विशेषताएं
  6. गिरावट से डरकर एसआईपी न रोकें।
  7. अत्यधिक रिटर्न की उम्मीद न पाले।
  8. गिरावट पर डिडेंप्शन नहीं करें।
  9. इमरजेंसी फंड बनाकर रखें।
  10. अलग-अलग लक्ष्यो के लिए अलग-अलग SIP बनाएं।
  11. अनियंत्रित उधारी से बचें।
  12. ध्यान दें…लॉन्ग टर्म निवेश में ही पैसा बनेगा।
  13. SIP के लिए 10 -7- 1 रूल अपनायें।
  14. निष्कर्ष।
  15. महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर।
  1. एस आई पी क्या है..?

व्यवस्थित निवेश योजना (Systematic Investment Plan)। यह एक निवेश का तरीका है जिसमें आप नियमित अंतराल पर एक निश्चित राशि का निवेश किसी म्यूचुअल फंड में करते हैं।

2. एस आई पी कैसे काम करता है.?

आप एक तय समय पर (जैसे कि हर महीने) एक निश्चित राशि का निवेश करते हैं। यह निवेश किसी म्यूचुअल फंड में किया जाता है।यह निवेश लगातार और नियमित रूप से किया जाता है।इससे आपको बाजार के उतार-चढ़ाव के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं होती है।समय के साथ यह निवेश बढ़ता जाता है और आपके लिए धन संचय करने में मदद करता है।

3. एस आई पी के क्या फायदे हैं.?

नियमित निवेश:एस आई पी आपको नियमित रूप से निवेश करने के लिए प्रेरित करता है। अनुशासन:यह आपको निवेश करने के अनुशासन में मदद करता है। रुपे लागत औसत:यह आपको बाजार के उतार-चढ़ाव के प्रभाव से बचाता है। लंबी अवधि में लाभ:एस आई पी लंबी अवधि में निवेश करने के लिए एक अच्छा विकल्प है। सुविधा:एस आई पी को ऑनलाइन शुरू करना और प्रबंधित करना आसान

4. SIP की गणना कैसे करें.?

SIP निवेश का उपयोग करके अपने SIP निवेश की गणना करना आसान है। यह ऑनलाइन टूल फ़्रैंचाइज़ी फंड में आपके नियमित निवेश पर रिटर्न का अनुमान लगाने में मदद करता है। आप अपने निवेश की राशि, अवधि और कुल वार्षिक रिटर्न दर जैसे विवरण दर्ज करें। कलाकार फिर आपका कुल निवेश, रिटर्न्स और भविष्य की संपत्ति बेचने वाला है। एसआईपी में नियमित अंतराल पर एक निश्चित राशि का निवेश शामिल होता है, जिससे लगातार संपत्ति बनाना आसान हो जाता है। जबकि निवेश गणना संभव है, एसआईपी स्टॉक समय बचाते हैं और निवेशक वित्तीय योजना के लिए तत्काल, निवेश अनुमान प्रदान करते हैं।

एसआईपी निवेश योजना की विशेषताएं

सहारा निवेश योजना (एस.ए.एस.पी.) एक लचीली निवेश रणनीति है जो लोगों को कई रियायती निधियों में निवेश करने की अनुमति देती है:

1. लघु निवेश योजना : एसआईपी उन लोगों के लिए एक आदर्श विकल्प है जो छोटे बच्चों के साथ निवेश शुरू करना चाहते हैं, बजाय एकमुश्त निवेश राशि के । एसआईपी आपको प्रति माह 500 रुपये प्रति माह की शुरुआत करने की मात्रा देता है और आपकी आय धीरे-धीरे बढ़ने के साथ-साथ बढ़ने की मात्रा भी देता है।

2. लगातार निवेश निवेश: एसआईपी आपको साप्ताहिक, मासिक या त्रैमासिक जैसे विभिन्न निवेश निवेशों में से एक निवेश के लिए एक अनुशासित दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है। यह नियमित निवेश निवेशकों की कीमत औसत करने में मदद करता है और एक निवेश निवेश आदत बनाने में सहायता करता है।

3. निश्चित निवेश राशि: जब आप एसआईपी शुरू करते हैं, तो निवेश राशि निश्चित होती है। हालाँकि आप पूर्ण योगदान करने के लिए ‘SIP टॉप-अप’ सुविधा का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि आप स्थिर योजना को बंद कर सकते हैं और नई योजना बना सकते हैं बिना SIP राशि को कम नहीं कर सकते।

4. निवेश निवेश विकल्प: एसआईपी फंड आपके निवेश को एक से तीन महीने के लिए अस्थायी रूप से निलंबित करने की सुविधा प्रदान करता है, जो वित्तीय निवेश के दौरान विशेष रूप से मूल्यांकित हो सकता है। युद्ध अवधि के समापन पर एसआईपी स्वचालित रूप से फिर से शुरू हो गया है। इस संग्रहालय की पुष्टि के लिए अपने मित्रवत समर्थकों से परामर्श लें।

5. कैनाल एसआईपी का अंतर: एसआईपी आपको साप्ताहिक, मासिक या त्रैमासिक एसआईपी के बीच अपने निवेश को शामिल करने की सुविधा देता है। आप ऑनलाइन फ़ोर्ट के माध्यम से या अपने संबंधित फ़्रैंक फ़ंड प्रदाताओं से इस बदलाव को शामिल कर सकते हैं।

6. कोई मुख्य निवेश सीमा नहीं: जबकि न्यूनतम एसआईपी निवेश 500 रुपये है, कोई सख्त ऊपरी सीमा मौजूद नहीं है। यह निवेशक को SIP के माध्यम से अपनी पसंद की कोई भी राशि निवेश करने की अनुमति देता है। योजना की अवधि के दौरान अपने एसआईपी निवेश की स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

7. रद्दीकरण प्रावधान: एसआईपी किसी भी समय योजना को समाप्त करने की सुविधा प्रदान करता है। रद्दीकरण ऑनलाइन किया जा सकता है या एसआईपी रद्दीकरण फॉर्म द्वारा संबंधित रेंटल फंड प्रदाताओं को ऑनलाइन प्रदान किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, आप एसआईपी भुगतान प्रतिबंध के लिए अपने बैंक से बिलर के रूप में एसेट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी (एएमसी) को हटा सकते हैं।

आर्थिक नीति – रेपो रेट में भारी कमी (50%), होम लोन और कार लोन होंगे सस्ते। विकास को मिलेगी गति।

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को अर्थव्यवस्था में वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए रेपो रेट में 50 आधार अंकों की बड़ी कटौती करके इसे 6% से 5.5% करने की घोषणा की है। 1 साल में लगातार तीसरी बार रेपो रेट में कटौती की गई है। रिजर्व बैंक की इस कदम से प्लाटिंग रेट पर कर्ज लेने वालों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस फैसले से एक करोड रुपए की लोन पर हर महा ब्याज के रूप में 3283 रुपए और सालाना 39396 की बचत होगी। दोस्तों रिजर्व बैंक द्वारा लिया गया यह एक ऐतिहासिक निर्णय है और आर्थिक जगत मैं इसके बड़े परिणाम देखने को मिल सकते हैं। इसीलिए आर्थिक फंडा ब्लॉग, arthikfunda.com कि आज के आर्टिकल में रिजर्व बैंक के इस बड़े आर्थिक फैसले की पूरी विवेचना करेंगे। और सबसे बड़ी बात यह समझने का प्रयास करेंगे कि आखिर आरबीआई के इस बड़े आर्थिक फैसले का देश के विभिन्न सेक्टरों पर क्या असर पड़ेगा..? इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए आज की पोस्टों को में कई भागों में विभाजित कर रहा हूं। ताकि यह आसानी से आपको समझ में आ सके। आज की इस आर्टिकल को हम निम्न बिंदुओं के तहत रीढ़ करेंगे —

आज के आर्टिकल में ( टेबल ऑफ़ कंटेंट )

  1. भूमिका।
  2. विकास दर 6.5% रहने का अनुमान।
  3. ब्याज दरों में डबल कटौती।
  4. सेंसेक्स में 747 अंक का उछाल।
  5. यह चार बातें आपकी जेब पर पूरा असर डालेंगी।
  6. किफायती घरों की बिक्री बढ़ेगी।
  7. लग्जरी घरों की बिक्री पीक पर।
  8. गोल्ड लोन शेयर चमके।
  9. 100000 के सोने पर 85000 का लोन मिलेगा।
  10. कंपनियों में तेजी।
  11. आरबीआई का फोकस जीडीपी बढ़ोतरी
  12. शेयर मार्केट के वह 5 सेक्टर जिन्हें सबसे ज्यादा लाभ होगा – – -रियल स्टेट – बैंकिंग – ऑटो सेक्टर -एफएमसी जी सेक्टर – -आईटी सेक्टर
  13. आगे क्या उम्मीद।
  14. क्या राय है एक्सपर्ट की।
  15. निष्कर्ष।
  16. संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

आरबीआई के गवर्नर ने सीआरआर मैं 100 आधार अंकों की कटौती की भी घोषणा की जो 6 सितंबर 4 अक्टूबर 1 नवंबर और 29 नवंबर से 25 आधार अंकों की चार बराबर किस्तों में प्रभावी होगी। जनसंख्यकि, डिजिटलीकारण और घरेलू मांग के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था निवेशकों के लिए अपार अवसर प्रदान कर रही है। रिजर्व बैंक की इस घोषणा का शेयर बाजार ने स्वागत किया है और सेंसेक्स में बड़ा उछाल देखा गया है। केंद्रीय बैंक के इस कदम से बैंकिंग सिस्टम में 2.5 लाख करोड रुपए आने की उम्मीद है। जिससे लिक्विडिटी बढ़ेगी और क्रेडिट फ्लो को सपोर्ट मिलेगा। काम नीति का डर से बैंक रेनू पर ब्याज दर में कमी आती है जिससे उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यवसायों के लिए भी उधार लेना आसान हो जाता है। जिसके परिणाम स्वरुप अर्थव्यवस्था में अधिक खपत एवं निवेश होता है और उच्च विकास सुनिश्चित होता है हालांकि कटौती का असर इस पर निर्भर करेगा कि बैंक किस हद तक ब्याज काम करता है।

विकास दर 6.5% रहने का अनुमान :

वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी विकास दर अनुमान को 6.5% पर स्थिर रखा गया है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक जीडीपी विकास दर वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में 6 पॉइंट 5% दूसरी तिमाही में 6.7 प्रतिशत तीसरी तिमाही में 6. 6% और चौथी तिमाही में 6.3% रह सकती है। आरबीआई के गवर्नर ने कहा कि इस साल फरवरी से अब तक रायपुर दर में लगातार 100 आधार अंकों की कटौती की गई है और इसलिए मौद्रिक नीति रुक को “अकोमोडेटिव” से बदलकर “न्यूट्रल” कर दिया गया है। इससे आरबीआई समग्र विकास मुद्रा स्पीति गतिशीलता पर कड़ी नजर रख सकेगा। कीमतों में हुई व्यापक आधार पर नरमी के बीच मुद्रा स्थिति दर अब घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई है। इसके साथ ही आरबीआई ने मुद्रा स्थिति डर के अपने अनुमान को भी 4% से घटकर 3.7% कर दिया है. वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी विकास दर इस अवसर पर 6.5%. पर स्थिर रखा गया है।

ब्याज दरों में डबल कटौती :

आरबीआई एमपीसी ने शुक्रवार को जहां रेपो रेट में उम्मीद से भी अधिक 0.5% की कटौतिकर इसे 6% से घटकर 5.5% कर दिया। आरबीआई ने मार्केट को सरप्राइज देते हुए क्रेडिट रिजर्व रेशों (CRR) वह भी 4% से घटकर 3% कर दिया। इससे बैंक सहित ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील सभी स्टॉक में जबरदस्त तेजी देखने को मिली।

सेंसेक्स 747 अंक उछला :

आरबीआई द्वारा की गई इन बाहरी रेट कट से होम लोन डिमांड बढ़ने के साथ मकान की बिक्री बढ़ सकती है इससे बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां के साथ रियल्टी स्टॉक 4% से अधिक उछाल गए वहीं लोन सस्ता होने से कर बाइक की बिक्री भी बढ़ाने की उम्मीद है। इससे ऑटो शेयर को भी बूस्ट मिलने की संभावना है।

ब्याज दरों में हुई इस डबल कटौती से निफ़्टी बैंक इंडेक्स अपने नए ऑल टाइम हाई ₹5695 के स्तर पहुंचने के बाद 1.47 प्रतिशत 56578 के स्तर पर बंद हुआ।

यह चार बातें आपकी जेब पर सीधा असर डालेंगी :

1. सीआरआर में 1% की कटौती यानी बैंक और छूट दे सकते हैं —

आरबीआई ने नगद आरक्षित अनुपात सीआरआर को 4% से घटकर 3% कर दिया है इससे बैंकों के पास 2.5 लाख करोड़ की अतिरिक्त नगदी एकत्रित होगी यह बैंक को होम लोन की ब्याज दरों को कम करने का विकल्प देता है।

2. रिटेल महंगाई आरबीआई के टायर से नीचे बनी रहेगी :

महंगाई आरबीआई के दायरे से नीचे आ चुकी है वित्त वर्ष 2025 26 के लिए रिटेल महंगाई 3.7% रहने का अनुमान है जो पहले 4% थी यह राहत खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नमी अंतर्राष्ट्रीय कमोडिटी प्राइस में गिरावट की वजह से आई है।

3. न्यूट्रल यानी रेट कट का चक्र थम सकता है :

आरबीआई ने अब नीति रोक अकोमोडेशन से बदलकर न्यूट्रल कर दिया है केंद्रीय बैंक के मुताबिक अब नीति के पास सीमित स्पेस है इसलिए हर कदम सोच समझ कर उठना होगा यानी रेपो रेट में कटौती का चक्र तेजी से समाप्त होने वाला है।

4. वैश्विक स्थिरता के बीच हमारी बैलेंस शीट बेहद मजबूत :

दुनिया में पूंजी फ्लोर को लेकर उतार चढ़ाव हैं लेकिन भारत में उजली तस्वीर है। इसकी वजह है संतुलंत बैलेंस शीट कॉर्पोरेट घरेलू बैंक सरकार और विदेशी क्षेत्र इन सभी मोचन पर स्थिरता बनी हुई है और निवेश के लिए एक नया माहौल तैयार हो रहा है।

किफायती घरों की बिक्री तेजी से बढ़ेगी :

रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में एक मस्त जीरो पॉइंट पांच प्रतिशत की कटौती कर इंडस्ट्री से लेकर आम कर्ज दाताओं को चौंका दिया है। रियल्टी और ऑटो सेक्टर को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है खास तौर पर के फायदे और मिड रेंज वाले घरों और कारों की बिक्री को ट्रिगर मिल सकता है। कोविद-19 के बाद से देश भर में महानगरों से लेकर टियर 2 शहरों में अफॉर्डेबल मकान की बिक्री में सुस्ती देखी गई है। अनार के आंकड़ों से पता चलता है कि बड़े शहरों में के फायदे आवास की बिक्री का हिस्सा 2019 में 38% से गिरकर 2024 में 18% ही रह गया था। इस दौरान सप्लाई में भी हिस्सेदारी 40% से घटकर 16% रह गई। हालांकि बिना बिके स्टॉक में 19% की गिरावट देखी गई जो अफॉर्डेबल घरों की बिक्री की मांग का संकेत है।

रेपो रेट में यह है 0.5% की कटौती ऐसे वक्त हुई है जब 40 लाख से कम कीमत वाले घरों की बिक्री में मांग दिख रही है। बीते 1 साल में 7 बड़े शहरों में इस सेगमेंट में इन्वेंटरी 19% कम हुई है जो 2024 की पहली तिमाही में 1.40 लाख से घटकर 2025 की पहली तिमाही में 1 पॉइंट 13 लख यूनिट्स ही रह गई थी।

लग्जरी घरों की बिक्री पीक पर पहुंची :

कुल बिक्री में लग्जरी घरों का हिस्सा 2019 में 7% था जो 2024 में बढ़कर 26% हो गया। नई सप्लाई में हिस्सा 11% से दुगना होकर 26% हो गया लग्जरी घरों ( 1.5 करोड़ से अधिक) मैं बिना विकी स्टॉक में 24% की बढ़ोतरी हुई है यह 2024 की पहली तिमाही में 91,125 से बढ़कर 2025 की समान अवधि में 1.13 लाख हो गई।

गोल्ड लोन शेयर चमके :

इन घोषणाओं के साथ ही आरबीआई ने 2.5 लख रुपए से कम को गोल्ड लोन पर लोन टू वैल्यू एलटीवी रेशों को 75% से बढ़कर 85 कर दिया है इससे लोगों को अब गोल्ड की कुल कीमत के 85% के बराबर लोन मिलेगा इस फैसले से गोल्ड लोन कंपनियों के शेयर में पांच से 7% तक की बढ़ोतरी हुई है। रेट कट से बूस्ट के कारण शुक्रवार को सेंसेक्स 747 अंक यानी 0.92 प्रतिशत चढ़कर 82189 पर बंद हुआ निफ्टी भी 252 अंक यानी 1.0 2% से चढ़कर 25,0003 पर बंद हुआ।

एक लाख के सोने पर 85000 का लोन मिलेगा :

केंद्रीय बैंक ने गोल्ड लोन के नियमों में भी बदलाव किया है अब 2.5 लख रुपए तक के गोल्ड लोन पर लोन टू वैल्यू रेशों 75 प्रतिशत से बढ़कर 85% कर दिया है। अर्थात इसका मतलब होता है कि अब ₹100000 की गोल्ड वैल्यू पर 85000 तक का लोन मिल सकेगा पहले यह सीमा 75000 थी। 2.5 लख रुपए तक के छोटे गोल्ड लोन पर क्रेडिट अप्रेजल की जरूरत नहीं होगी यानी कागजी कार्रवाई कम होगी और लोन जल्दी मिलेगा। इससे छोटे कर्जदार खासकर ग्रामीण और छोटे शहर वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए लोन लेना आसान हो जाएगा

कम्पनी तेजी

1. मुथूट फाइनेंस – 6.98%

2. मण्णपुरम फाइनेंस – 5.64%

3. आईआईएफएल फाई – 5.20%

4. चोलामंडलम फाइनेंस – 5.25%

आरबीआई का फोकस जीडीपी बढ़ोतरी पर :

रेपो रेट में इस साल एक प्रतिशत तक कटौती कर इसे 5 पॉइंट 5% पर लाने के बाद आरबीआई ने अपने नीतिगत रुख को एक अकमोडेटीव से न्यूट्रल यानी तटस्थ कर दिया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि अब नीतिगत धर्म को लेकर सीमित स्पेस बचा है इसलिए हर कदम सोच समझकर उठाना होगा। इससे भविष्य में दरों में कटौती की गुंजाइश सीमित हो गई है अब नीतिगत फैसले डाटा पर आधारित होंगे अब दरें तभी घटेगा जब महंगाई बढ़ने की दर काफी कम रह जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि आरबीआई के फैसलों से ग्रामीण और शहरी इलाकों में खपत बढ़ने की उम्मीद है। इन्वेस्टमेंट फॉर्म फाइबर सिरका के फाउंडर अभय अग्रवाल ने कुछ समाचार पत्रों से खास बातचीत में बताया कि दरों में कटौती से खपत बढ़ेगी खपत बढ़ने से प्राइवेट कैंपेक्स बढ़ेगा कैंपेक्स बढ़ेगा तो रोजगार बढ़ेगा।

क्या कहना है एक्सपर्ट का :

1. वी.के. विजय कुमार, नियोजित फाइनेंस।

आरबीआई के फैसले इकोनामिक ग्रोथ को बढ़ावा देने वाले हैं पर रेट कट से बैंकों का मार्जिन कम होने की आशंका है इससे बैंक फाइनेंशियल स्टॉक दबाव में आ सकते हैं हालांकि ओवरऑल शेयर बाजार को आरबीआई के इस कदम से बूस्ट मिल सकता है।

2. डी. के. जोशी, मुख्य अर्थशास्त्री।

शेयर बाजार में सिर्फ रेपो रेट में कटौती से खास फायदा नहीं दिखता लेकिन सीआरआर में कटौती करते हुए आरबीआई ने लिक्विडिटी पुश किया है इन दोनों से इकोनॉमी को बहुत फायदा मिलेगा शहरी क्षेत्र में खपत बढ़ सकती है जिससे कंजमप्शन शेयरों में तेजी की उम्मीद है।

3. साक्षी गुप्ता, प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट एचडीएफसी बैंक

आरबीआई अब निकट भविष्य के लिए विराम ले सकता है सेंट्रल बैंक द्वारा डाटा निर्भर पर टर्न लेने की संभावना है और भविष्य में कोई भी डर कटौती केवल तभी हो सकती है जब विकास में भौतिक रूप से गिरावट आए।

महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर ( Q & A )

Question 1. रेपो रेट क्या होती है..?

उत्तर -पुनर्खरीद दर (पुनर्खरीद दर) वह ब्याज दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक संस्थानों को धन उधार देता है जब धन की कमी होती है। सरल शब्दों में, यह वह दर है जिस पर बैंक कंसल्टेंसी के लिए सेंट्रल बैंक से धन उधार लिया जाता है, आमतौर पर सरकारी प्रतिभूतियों के बदले। यह तंत्र केंद्र को तरलता को विसर्जित करने और स्थिरता बनाए रखने की अनुमति देता है।

  • उधार लेने की प्रणाली: जब वाणिज्यिक बैंकों की कमी का सामना करना पड़ता है, तो वे पैसे उधार लेने के लिए केंद्रीय बैंक से संपर्क कर सकते हैं। बदले में, सेंट्रल ईस्ट बैंक स्थापित रेपो दर पर ये धन उपलब्ध कराता है।
  • संपार्श्विक के रूप में सरकारी स्वामित्व: ऋण लेने वाले बैंकों को संपार्श्विक के रूप में सरकारी स्वामित्व प्रदान करना चाहिए। ये प्रतिभूतियाँ केंद्रीय बैंक के लिए सुरक्षा जाल के रूप में कार्य करती हैं, यह सुनिश्चित करती हैं कि ऋण सुरक्षित है और भुगतान किया जाएगा।
  • पुनर्खरीद समझौता: “रेपो” शब्द पुनर्खरीद अभिनेता का रूप है। इस समझौते में यह निर्धारित किया गया है कि ऋण लेने वाले भविष्य के बैंक की किसी भी तारीख पर प्रतिभूतियों को पुनर्खरीद करना, आमतौर पर उच्च मूल्य पर, जिसमें रिपो दर पर गणना की गई ब्याज भी शामिल है।

Question 2. रेपो दर कैसे काम करती है.?

यह सुझाव देने के लिए कि रेपो दर कैसे संचालित होती है, इसकी तकनीक और इन टेक्नोलॉजी को शामिल करने की प्रक्रिया का पता लगाना आवश्यक है:

  • उधार लेने की शुरुआत: जब किसी वाणिज्यिक बैंक को धन की आवश्यकता होती है, तो वह केंद्रीय बैंक से संपर्क करता है, अपनी आवश्यकताएं और संपार्श्विक के रूप में सरकारी प्रतिभूतियां प्रदान करता है।
  • बैंक की भूमिका: केंद्रीय बैंक बैंक का आकलन करता है, संपार्श्विक को मंजूरी देता है, और असाधारण केंद्रीय रिज़र्व दर पर उपलब्ध कराता है।
  • ब्याज गणना: ब्याज दर (रेपो दर) ऋण ली गई राशि पर लागू होती है, और यह वाणिज्यिक बैंक के लिए ब्याज दर के रूप में अनिवार्य रूप से ऋण लेने की लागत है।
  • प्रतिभूतियों की पुनर्खरीद: स्वीकृत अवधि के बाद, ऋण लेने वाला बैंक सेंट्रल बैंक से प्रतिभूतियों को उस मूल्य पर पुनर्खरीद करता है जिसमें ऋण ली गई राशि और ब्याज शामिल होता है।

Question 3. रेपो दर का क्या महत्व है..?

रेपो दर इकोनोमिक जर्नल में काफी महत्वपूर्ण रचना है। यह एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग केंद्रीय बैंक कई व्यापक आर्थिक बैंकों को प्राप्त करने के लिए करता है:

तरलता प्रबंधन: तरलता प्रबंधन प्रणाली में तरलता के प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण है। इस दर को समाप्त करके, केंद्रीय बैंक बैंकों द्वारा उधार ली जाने वाली सलाहकार को नियंत्रित किया जा सकता है, 

निजीकरण नियंत्रण: स्वामित्व अधिकार का एक प्राथमिक उपयोग स्वामित्व है। जब बांड्ज़ अधिक होता है, तो सेंट्रल बैंक रेपो दर बढ़ाया जा सकता है। इससे ऋण लेना अधिक महंगा हो जाता है, जिससे उद्योग में मुद्रा आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे प्रतिभूतियों को कम करने में मदद मिल सकती है।

आर्थिक प्रोत्साहन: इसके विपरीत, कम आर्थिक विकास की अवधि के दौरान, केंद्रीय बैंक राजकोषीय दर को कम कर सकता है। इससे ऋण लेना सस्ता हो जाता है, जिससे व्यवसाय और उपभोक्ताओं को ऋण मुक्ति के लिए छूट मिल जाती है, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।

Question 4. क्रेडिट रिजर्व रेशों (CRR ) क्या होता है..?

उत्तर – नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) के तहत, वाणिज्यिक बैंकों को केंद्रीय बैंक के पास रिजर्व के रूप में एक निश्चित न्यूनतम राशि जमा करनी होती है। बैंक की कुल जमाराशि के मुकाबले रिजर्व में रखी जाने वाली नकदी का प्रतिशत, नकद आरक्षित अनुपात कहलाता है। नकद आरक्षित राशि या तो बैंक की तिजोरी में जमा होती है या आरबीआई को भेजी जाती है।

बहुत महंगा पड़ने वाला है दुनिया को ट्रंप का “ट्रेड वार”

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बहुत महंगा पड़ने वाला है दुनिया को ट्रंप का “ट्रेड वार” मजबूती के साथ रखनी होगी भारत को अपनी बात।

विश्व अर्थव्यवस्था

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सिंह साब

द्वारा Kedar लाल

पोस्ट किया गया 10/05/20251 टिप्पणियाँ

बहुत महंगा पड़ने वाला है दुनिया को ट्रंप का ट्रेड-वार। मजबूती के साथ रखनी होगी भारत को अपनी बात।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टेरीफ घोषणाओं के कारण ट्रेड वॉर की आशंकाओं के बीच सोमवार सुबह भारत सहित दुनिया भर के शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव दिखा। कई देशों के शेयर बाजार धडाम हो गए। यूरोप तथा एशिया के शेयर बाजार में काफी नुकसान हुआ है। एक तरह के आर्थिक युद्ध का माहौल दुनियाँ मे नज़र आने लगा है। आर्थिक फंडा (ब्लॉग ) कि आज की पोस्ट में हम इसी अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर चर्चा करने वाले है। आज किस आर्टिकल को हम निम्न बिंदुओं के तहत रीढ़ करेंगे।

टेबल ऑफ़ कंटेंट

  1. इंट्रोडक्शन। ट्रेड वॉर की शुरुआत।
  2. ट्रंप के ट्रेड वॉर के साइड इफेक्ट क्या होंगे।
  3. किस देश पर कितना टैरिफ
  4. मंदी की आहट शुरू
  5. एलपीजी गैस और पेट्रोल महंगा
  6. क्या कदम उठाने चाहिए भारत को।
  7. नया टैरिफ भारत के लिए चुनौती भी, तो अवसर भी।
  8. अगर दुनिया के देश एकजुट हुए तो अमेरिका को नुकसान संभव
  9. ट्रंप के टैरिफ वार के उद्देश्य क्या है।
  10. क्या कदम उठाएगा भारत
  11. निष्कर्ष।

क्या दुनिया के देश ट्रंप के टैरिफ युद्ध के विरुद्ध एकजुट होकर लड़ेंगे..? विश्लेषकों की दलील तो यही है कि ट्रंप की दोस्त के आगे झुकने के बजाय दुनिया को उनसे लड़ने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाना चाहिए। उनका मत है कि ट्रंप के दबाव में आना समस्या का समाधान नहीं है। पंप को तो यह देखना अच्छा ही लगेगा कि दुनिया के नेता उन्हें खुश करने के लिए उनके घुटनों पर गिरे। तब वह धमकाने के दूसरे दूसरे तरीके खोजने लगेंगे। लेकिन यह देखना वाकई शानदार होगा कि दुनिया के बाकी देश मिलकर जवाबी कार्रवाई करें अमेरिका के चारों ओर टैरिफ की दीवार बनाएं और दुनिया की इस महाशक्ति को वैश्विक रूप से बहिष्कृत कर दें इससे अमेरिका के बाहर वैश्विक कारोबार बढ़ेगा।

साथ यह उन तमाम राजनेताओं के लिए भी एक जरूरी सबक होगा जो विश्व व्यापार व्यवस्था को कुचलना की आशंका रखते हैं और जो अपने बेटू के सिद्धांतों को अमल में लाने के लिए दुनिया को मंदी में झाेकने से भी नहीं कतराते। यूं तो अमेरिका के बाहर की दुनिया बहुत बड़ी है लेकिन क्या यूरोप ट्रंप का मुकाबला करने के लिए एशियाई देशों के साथ हाथ मिला सकता है..? या यूरोप ट्रंप को सबक सिखाने के लिए अमेरिका के दो संकटग्रस्त पड़ोसियों मेक्सिको और कनाडा का साथ देगा..? या फिर यूरोपीय संघ के 27 अमीर देश आखिरकार अपनी नींद से जागेंगे और अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर में शामिल होंगे..? लेकिन अफसोस की बात है कि ऐसा नहीं होने वाला हाल फिलहाल तो ऐसी संभावना नजर नहीं आती। पिछले हफ्ते ट्रंप द्वारा अपने आयात पर 20% टैरिफ की घोषणा करने के बाद आई यू ने सबसे पहले अमेरिका के खिलाफ जवाई अभी कार्रवाई करने के बजाय इस पर विचार किया कि चीन को यूरोप में अपना माल डंप करने से कैसे रोके। नतीजा तन ब्राज़ील ने चीनी टीवी पर 35% टैरिफ लगा दिया और वह दूसरे चीनी उत्पादों पर भी बहुत अधिक टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है। चीन पर ट्रंप के टैरिफ की बौछार ने यूरोप को भी चीनी माल पर टैरिफ लगाने के लिए प्रेरित किया है यानी ट्रंप का सामना करने के बजाय यूरोप में उलटे चीन के साथ ट्रेड बार छेड़ दिया है। जब बात अमेरिका की आती है तो यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के बीच जवाबी कार्रवाई के लिए आम सहमति नहीं बन पाती। फ्रांस जर्मनी स्पेन और बेल्जियम ए सी आई का उपयोग करने के पक्ष में हैं। लेकिन अन्य देश विशेष रूप से इटली रोमानिया ग्रीस और हंगरी इसके खिलाफ हैं। वे अमेरिका से बातचीत करना पसंद करते हैं। यूरोपीय संघ की नौकरशाही के भीतर नीति निर्माण की गति इतनी धीमी है कि अगर कोई आम सहमति बन जाती है तो भी यूरोपीय संघ ट्रंप के टैरिफ युद्ध का मुकाबला नहीं कर पाएगा। लेकिन कम से कम इस तरह की कार्रवाई ट्रंप को अपने तेरे फोन पर पुनर्विचार करने के लिए जरूर मजबूर कर सकती है। 2023 में यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच 818 अरब डॉलर का सर्विसेज ट्रेड था, जिसमें अमेरिका का ट्रेड सरप्लस 119 अरब डॉलर का था।

लेकिन एशियाई देशों के बारे में क्या..? परचेसिंग पावर के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। उसने अमेरिकी माल पर 35 परसेंट टैरिफ लगाकर जवाबी कार्रवाई की है लेकिन क्या एशियाई देश ट्रेड वॉर लड़ने के लिए चीन का साथ देंगे..? जापान दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया तो एशिया में चीन के प्रभाव को नियंत्रित रखने के लिए मिशन में अमेरिका के साझेदार रहे हैं। विक्रम को विश्व व्यापार व्यवस्था को नष्ट करने से रोकने के लिए चीन का साथ कैसे दे सकते हैं..? और क्या भारत चीन के सुरक्षा जोखिमों को नजरअंदाज करेगा। और क्या भारत चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए एशियाई देशों के साथ गठबंधन बनाएगा..? कई देशों ने चीन पर एंटी डंपिंग शुल्क लगाया है क्या वह इन मतभेदों को अलग रख पाएंगे और अमेरिका का सामना करने के लिए एक साथ आ पाएंगे।

ट्रम्प के टैरीफ वार के साइड इफेक्ट शुरू 

ट्रंप की टैरिफ से सोमवार को दुनिया भर के शेयर बाजारों में हड़कंप मच गया। दुनिया के शेयर बाजार में तीन से लेकर 13% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी शेयर बाजार भी खुलते ही 4% तक लुढ़क गए। इसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का एक बयान सामने आया है उन्होंने कहा है कि–” कभी-कभी किसी चीज को ठीक करने के लिए दवा लेनी ही पड़ती है मार्केट में यह गिरावट सिर्फ मेडिसिन की तरह है जो लॉन्ग टर्म में फायदा पहुंचाएगी लेकिन फिलहाल निवेशकों को सिर्फ नुकसान ही दिख रहा है।” दरअसल ट्रंप के टैरिफ एक्शन के बाद अमेरिकी कंपनियों की मार्केट कैप करीब 6 लाख करोड डालर तक घट चुकी है रविवार को टर्म ने कहा था कि वह जानबूझकर शेयर बाजार में गिरावट नहीं ला रहे हैं उन्होंने मार्केट रिएक्शन का अंदाजा नहीं था और जब तक दूसरे देशों के साथ व्यापार घाटे का समाधान नहीं होता तब तक वह कोई डील नहीं करेंगे। उधर डॉलर के मुकाबले रुपए में 26 महीने की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है यह 60 पैसे कमजोर होकर 85 पॉइंट 84 प्रति डॉलर पर आ गया।

किस देश पर कितना टेरीफ —

भारत – 26%

चीन – 34%

वियतनाम – 54%

टाइवान – 34%

यूरोपीय यूनियन – 20%

दक्षिण कोरिया – 25%

जापान – 24%

दुनियाँ में मंदी कि आहट —

अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 0.3% रहने का अनुमान है। गोल्डमैन शेख के अनुसार 12 माह में यहां मंदिर की आशंका 35% से बढ़कर 45% हो गई है। मंडी की आशंका और मांग घटने की आशंकाओं से कमोडिटी की कीमतें घट रही हैं। कच्चा तेल 6.5% सोना 2.4% और चांदी में 7.3% की गिरावट दर्ज हुई है। कॉपर 6.5% जिंक 2% की गिरावट दर्ज करवा रहे हैं। अमेरिका में 10 साल के उस ट्रेजरी बॉन्ड का रिटर्न घट गया है अब अमेरिका में ब्याज दरें घट सकती हैं वहीं ट्रेड वॉर के दर से हमारे ऑटोमोबाइल आईटी मेंटल फार्मा और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में औसतन 7% की गिरावट दर्ज हुई है। शेयर मार्केट में सुनामी के बीच सोमवार को 24 कैरेट सोना 1929 रुपए गिरकर 890 85 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया 22 कैरेट सोना 1767 रुपए सस्ता होकर 81602 रुपए हो गया। चांदी प्रति किलो 2518 रुपए सस्ती होकर 90 392 रुपए हो गई।

एलपीजी सिलेंडर 50 रुपए महगा —

गैस सिलेंडर ₹50 महंगा हो गया है जयपुर में मंगलवार से 14 पॉइंट 2 किलो का घरेलू गैस सिलेंडर 808 रुपए की जगह 860 रुपए में बुक होगा। यह बढ़ोतरी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के 10 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों पर भी लागू होगी। उन्हें अब यह 14 पॉइंट 2 किलो का सिलेंडर 508 रुपए की जगह 558 रुपए का पड़ेगा।

पेट्रोल -डीजल पर 2 रुपए का उत्पाद शुल्क बढ़ा —

पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी ₹2 प्रति लीटर बढ़ा दी गई है हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के चलते खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मतलब यह कि उपभोक्ताओं पर बड़ी हुई कीमतों का कोई असर नहीं पड़ेगा सरकार ने यह कदम सार्वजनिक तिल कंपनियों को हुए घाटे की भरपाई के लिए उठाया है। पेट्रोल पर अब कल केंद्रीय टैक्स 21.9 रुपए और डीजल पर 17.8 रुपए प्रति लीटर हो गया है।

मजबूती के साथ रखनी होगी भारत को अपनी बात

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पारंपरिक टैरिफ आयात शुल्क योजना की घोषणा कर दी है। यह पारंपरिक टैरिफ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में काफी अनिश्चित और उत्तल-पुथल पैदा कर सकता है। भारत के लिए 27% टैरिफ का यह भुज ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका के साथ एक बहुत क्षेत्रीय द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर गहन वार्ता कर रहा है। यह उल्लेखनीय है कि फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान दोनों देशों ने संयुक्त रूप से इन वार्ताओं पर सहमति जताई थी ऐसे में सवाल यह है कि भारत इन वार्ताओं में पारस्परिक टैरिफ के संदर्भ में किस प्रकार का रूख अपनाएगा..?

भारत को केवल अमेरिका के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाने के लिए कोई रियायत नहीं देनी चाहिए पिछले दो महीना में अमेरिका को दी गई कई रियासतों से स्पष्ट है कि ऐसी एक तरफ छूट अमेरिका की मांगों को बढ़ाने की भूख को और बढ़ाएगी। बी टी ए वार्ता केवल पारस्परिक शुल्क हटाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। भारत को अमेरिका को दी जाने वाली हर रियायत के बदले अतिरिक्त बाजार पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए। कपड़ा परिधान और चमड़ा उद्योग जैसे श्रम प्रधान क्षेत्र में शुल्क क्रियाएं होते हैं हासिल करना भारत के लिए महत्वपूर्ण होगा। भारत की रियायतें इस शर्त पर होनी चाहिए कि अमेरिका भविष्य में पारस्परिक शुल्क जैसी उपाय नहीं करने का वचन दे। बता में ऐसा प्रावधान शामिल होना चाहिए कि यदि अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं करता है तो भारत भी अमेरिका के प्रति अपनी किसी भी प्रतिबद्धता को निभाने के लिए बाध्य नहीं होगा। भारत को बता का दायरा यथासंभव सीमित रखना चाहिए इसे केवल वास्तु व्यापार तक ही सीमित रखा जाए अन्यथा बौद्धिक संपदा अधिकार सरकारी खरीद डिजिटल जैसे मुद्दों वाले कई जटिल क्षेत्र में अमेरिका को रियायत देनी पड़ सकती है। विशेष रूप से पेटेंट के क्षेत्र में अमेरिका की लंबित मांगों पर सावधानी से आगे बढ़ना होगा क्योंकि इससे जेनेरिक दावों के बाजार में प्रवेश में बढ़ाएं उत्पन्न हो सकती हैं। इस क्षेत्र में अमेरिका की मांगों को स्वीकार करने से दावों की कीमतें लगातार बढ़ सकती हैं जिससे सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता एक सपना बंद कर रह जाएगी इससे जन औषधि केंद्र और आयुष्मान भारत जैसी प्रमुख पहलुओं को गंभीर धक्का लगा सकता है। हाल ही में संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि द्वारा जारी 2025 की नेशनल ट्रेड एस्टीमेट रिपोर्ट में भारत की अत्यधिक कृषि सब्सिडी को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की बाजार मूल्य समर्थन योजना घरेलू खाद्य सुरक्षा से कहीं आगे जा चुकी है और इसे भारत को चावल का शीर्ष वैश्विक निर्यातक बना दिया है। ऐसे में आसन का है कि अमेरिका के कृषि व्यवसाय के दबाव में ट्रंप प्रशासन भारत की न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना को खत्म करने की मांग कर सकता है। क्योंकि एसपी योजना खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है इसलिए भारत के लिए इस मांग को मनाना लगभग असंभव होगा अतः भारत को वार्ता में इस मुद्दे को शामिल करने का विरोध करना चाहिए।

क्योंकि भारत में करोड़ों लोगों की आजीविका कृषि पर निर्भर है इसलिए वार्ता में अनाज चिकन अधिकांश डेयरी उत्पाद ताजा फल और सब्जियां तथा सूखे मेवे जैसे कृषि उत्पादों को पारस्परिक शुल्क कटौती से बाहर रखा जाना चाहिए। भारत का अमेरिका के साथ कई अलग-अलग क्षेत्र में जुड़ाव है हालांकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्र में जुड़ाव का प्रभाव किसी भी अन्य क्षेत्र के परिणाम की तुलना में अधिक व्यापक और अर्थव्यवस्थव्यापी प्रभाव डालने वाला हो सकता है। इसलिए यह आवश्यक है कि BTA वार्ताओं का परिणाम संतुलित हो साथ ही बाजार के घरेलू हितों की रक्षा और संवर्धन हो। अमेरिका के साथ अन्य क्षेत्रों में लाभ हासिल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत के हितों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। पारस्परिक आयात शुल्क विश्व व्यापार संगठन में अमेरिका की प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करते हैं इसलिए यह अवैध हैं। भारत को वित्तीय वार्ता सहित विभिन्न मंचों पर अमेरिका को यह बात कहने में संकोच नहीं करना चाहिए कि वित्तीय वार्ता में इस बात पर बार-बार जोर देना चाहिए कि एक आर्थिक रूप से मजबूत और सशक्त भारत अमेरिका के हित में होगा। खासकर चीन के खिलाफ एक संतुलन के रूप में। ऐसा न्याय संगत और संतुलित द्विपक्षीय व्यापार समझौता जो भारत के किसानों और श्रमिकों को कमजोर न करें और ने ही सस्ती दावों तक पहुंच को प्रभावित करें भारत और अमेरिका दोनों के हित में होगा।

प्रभावित देश एकजुट हुए तो अमेरिका को नुकसान संभव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापारिक भागीदारों पर व्यापक टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है उन्होंने 170 से अधिक देशों के लिए नई टैरिफ दलों की घोषणा की है। कंपनी भारत पर 27 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ लगाया है इस प्रकार चीन पर 34% वियतनाम पर 46% दक्षिण कोरिया पर 25% यूरोपीय संघ पर 20% और अन्य देशों को भी उच्च टैरिफ की व्यापार बढ़ाओ का सामना करना पड़ेगा।

वित्तीय वर्ष 2025 26 के बजट में भारत सरकार ने टेरिफ वार को भागते हुए कई वस्तुओं पर सीमा शुल्क में कटौती की थी। बजट के दौरान 6 फीस दी डिजिटल सर्विस टैक्स जो गूगल टैक्स के रूप में भी जाना जाता है को भी वापस लिया था। इन सब प्रयासों के बावजूद बी निशिता के बादल बने हुए हैं जनवरी के महीने से शेयर बाजार भी तारीफ बार की चपेट में आ गया है राष्ट्रपति ट्रंप के अप्रत्याशित निर्णय लेने की आदत के कारण एवं विश्वास और अस्तित्व की स्थिति बनी हुई है।

आयात एवं निर्यात कर लगाने के कई कारण होते हैं इनमें घरेलू उद्योगों को संरक्षण देना प्रमुख कारण है। उदाहरण के तौर पर भारत कई बार केमिकल स्टील सोलर पैनल आदि की डंपिंग को रोकने के लिए भारी आयात शुल्क लगता है। कई बार राष्ट्रीय सुरक्षा पर्यावरण की रक्षा और हानिकारक वस्तुओं को रोकने के लिए भी अधिक शुल्क लगाया जाता है। देश की आर्थिक स्थिति प्रोडक्ट उत्पादन और टेक्नोलॉजी का स्तर अलग-अलग होने से आयात शुल्क में अंतर होना लाजमी है। अमेरिका के द्वारा आयात शुल्क बधाई जाने पर भारत के निर्यात पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा इस आसन का से इनकार नहीं किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रभाव निर्यात के 10 से 12 फ़ीसदी तक हो सकता है जो लगभग 8 से 10 बिलियन डॉलर होगा। इस व्यापार व्यवधान के कारण भारत की अर्थव्यवस्था पर जो प्रभाव पड़ेगा वह जीडीपी का 0.1 फ़ीसदी से भी काम होगा यह प्रभाव भी कुछ समय तक ही रहने की संभावना है हालांकि भारत ने इस प्रभाव को कम करने के लिए ब्रिटेन ऑस्ट्रेलिया यूरोपीय यूनियन मिडल ईस्ट आदि देशों के साथ सक्रियता से व्यापार समझौते पर रणनीतिक रूप से काम करना शुरू कर दिया है। अमेरिका ने कई देशों पर उच्च टैरिफ लगाया है कई देशों पर यह भारत से भी अधिक है जिससे भारत को तुलनात्मक तौर पर हानि होने की संभावना खत्म सी हो जाती है बल्कि अनुकूल प्रतिस्पर्धा से फायदा भी हो सकता है। भारत के लिए तारीफ वार की परिस्थितियों आपदा में अवसर के सामान भी हो सकती हैं और वह परस्पर सहयोग से ट्रेड में अपनी भागीदारी बढ़ा सकता है। 2023 में वैश्विक माल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 1.8 फ़ीसदी थी इसे बनाने का यह एक मौका है।

दूसरी ओर टैरिफ बार से अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लग सकता है। अमेरिका फेडरल रिजर्व के पूर्वानुमानों के अनुसार इस वर्ष अमरी की अर्थव्यवस्था की सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 1.7 फ़ीसदी रहेगी जो दिसंबर के अनुमान 2.3 फिसदी से काफी कम है। आया तो शुल्क लगने से अमेरिका में आने वाला सामान महंगा हो जाएगा इस संबंध में फेड अध्यक्ष जेरोम पावेल का मानना है कि तेरे फुहार मुद्रा स्पीति के दृष्टिकोण से अमेरिका के लिए घातक होगा। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मौद्रिक अथवा वित्तीय नीति व्यापार युद्ध के विपरीत प्रभावों की भरपाई नहीं कर सकती। जेपी मॉर्गन के अनुसार हाल ही की व्यापार नीतियों के कारण अमेरिका में मंडी की संभावना 40 फ़ीसदी तक बढ़ गई है। वरिष्ठ अर्थशास्त्री केल्विन ने तो यहां तक कह दिया है कि टैरिफ के कारण आर्थिक मंदी के साथ-साथ मुद्रास्फीति और ढीले जो मार्केट के कारण अर्थव्यवस्था की विकास दर अगली 3 सालों में 0.32 फ़ीसदी तक जा सकती है।

अमेरिका का यह मानना है कि वह घरेलू खपत की आपूर्ति उत्पादन बढ़ाकर कर लेगा व्यावहारिक नहीं लगती। जानकारों का मानना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए कम से कम तीन से पांच वर्ष का समय चाहिए। यह बात उसे गहरे आर्थिक संकट में धकेल सकती है जो मुद्रा जनित आर्थिक मंदी का कारण हो सकती है। कुल मिलाकर अमेरिका का यह कदम उसकी अर्थव्यवस्था के लिए आत्मघाती भी साबित हो सकता है। दूसरा यह कि यदि अमेरिका भारत पर दबाव बनाने के उद्देश्य 27 विधि उच्च टैरिफ लगाना जारी रखता है तो व्यापार क्षेत्र में तनाव के रिश्तों का प्रशांत महासागर में रणनीतिक साझेदारी पर गहरा असर पड़ सकता है। और अंत में महत्वपूर्ण बात यह भी है कि सभी देश टैरिफ बार की चपेट में आने के कारण एक दूसरे से मिलकर काम करेंगे जिससे अमेरिका आर्थिक तौर पर अलग-अलग हो सकता है

इस चित्र का आल्ट गुण खाली है; इसका फ़ाइल नाम Screenshot_2025-03-29-12-50-55-536_com.google.android.googlequicksearchbox-1024x550.jpg है

नया टैरीफ भारत के लिए चुनौती भी, तो अवसर भी —

विश्व व्यापार संगठन के समझौता की धज्जियां उड़ाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक तरफ रिसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा कर विश्व व्यापार के क्षेत्र में हलचल पैदा करदी है। हालांकि 9 अप्रैल से लागू होने वाले इस टैरिफ को इन वक्त पर ट्रंप प्रशासन ने 90 दिन के लिए रोक दिया है। नई टैरिफ दारू की गणना और देश में चुनाव की त्रिकोण ने सभी अर्थशास्त्रियों और व्यापार विश्लेषकों को चौंका दिया है।

कहां जा रहा है कि अमेरिकी गणनाकारों ने प्रत्येक देश से अमेरिका का व्यापार घाटा लिया और उसे उस देश से हो रहे आयात से भाग देकर उसकी घाटा दर निकाली और उसे आधा कर उसकी टैरीफ दरक्योंकि प्रतिस्पर्धी चीन थाईलैंड वियतनाम इंडोनेशिया पाकिस्तान बांग्लादेश आदि की तारीफ करें भारत से बहुत अधिक हैं इसके अतिरिक्त विश्व की सप्लाई चैन में की घोषणा कर दी। दुनिया का कोई भी अर्थशास्त्री इस अजीब फार्मूले का समर्थन नहीं करेगा। आश्चर्य की बात है कि यदि व्यापार घाटा ही गणना का आधार है तो फिर आस्ट्रेलिया ब्रिटेन अरब देश और अर्जेंटीना जैसे देशों पर टैरिफ क्यों और कैसे लगाया है..? इन देशों से तो अमेरिका का व्यापार घाटे में नहीं है। कंजरवेटिव कानून वेदों के समूह ने इस न्यायालय में चुनौती दी है ट्रंप प्रशासन ने 60 व्यापार घाटे वाले देशों पर रैसिप्रोकल टैरिफ लगाया है। यह दर वर्तमान ड्यूटी सामान के अतिरिक्त है। बाकी सभी देशों पर 10% टैरिफ होगा। चीन पर 34% बांग्लादेश पर 37% पाकिस्तान पर 29% श्रीलंका पर 44% वियतनाम पर 46% थाईलैंड पर 36 प्रतिशत इंडोनेशिया पर 32% भारत पर 26% जापान पर 24% यूरोपीय देशों पर 20% और ब्रिटेन पर 10% टैरिफ लगाया गया है। भारत के संदर्भ में देखें तो चुनौतियां निश्चित रूप से हैं लेकिन जो परिस्थितियों को अवसर में और अवसरों को समृद्धि में बदलते हैं वही विजेता होते हैं। यदि भारत का अमेरिका को निर्यात 10% से भी प्रभावित होता है तो हमारी जीडीपी 0.2% काम हो सकती है किंतु अन्य देशों के निर्यात में कमी से भारत का व्यापार घटेगा नहीं अपितु बढ़ेगा। अमेरिका में टैरिफ के कारण कई ऐसी वस्तुएं जो अत्यावशक नहीं है उनका उपयोग कम हो जाएगा जैसे डेरी उत्पादन जावरा ऑटोमोबाइल मेटल आदि। भारत का निर्यात इन वस्तुओं में घटेगा। किंतु आवश्यक उपयोग की वस्तुएं जो सामान्यतः अमेरिका में काम उत्पादित होती हैं, या नहीं होती है जैसे –टेक्सटाइल,फार्मा,आईटी,चिप्स,मोबाइल फोन,मशीनरी खिलौने, इलेक्ट्रॉनिक्स कैपिटल, गुड्स,सोलर पैनल्स,सस्ती कारें, मिनरल फ्यूल,स्टोन ऑर्गेनिक,केमिकल्स आदि का निर्यात बढ़ सकता है। क्योंकि प्रतिस्पर्धी चीन थाईलैंड वियतनाम इंडोनेशिया पाकिस्तान बांग्लादेश आदि की तारीफ करें भारत से बहुत अधिक हैं इसके अतिरिक्त विश्व की सप्लाई चैन में बदलाव भी भारत के पक्ष में जाने की संभावना है। ट्रंप के टैरीफ वार के कई उद्देश्य दिखते हैं जैसे —

— अमेरिका को स्थानीय उद्योगों की मजबूती यानी मेक इन अमेरिका को बढ़ावा देना।

— स्थानीय उद्योगों के माध्यम से अमेरिका में नए रोजगार पैदा करना।

— अमेरिका के व्यापार घाटे को कम कर टैरिफ की आय से क्षतिपूर्ति करना।

— खर्चों में कटौती करना तथा बॉन्ड की दरों में कमी कर ब्याज के खर्चों में कटौती करना।

उल्लेखनीय है कि ट्रंप के आने के बाद बंद की यील्ड 4.79 प्रतिशत से गिरकर 4 पॉइंट 17 प्रतिशत हो गई यानी 0.62 प्रतिशत घटी है। अमेरिका पर 36.5 ट्रिलियन डॉलर अर्थात भारत की जीडीपी का 10 गुना का कर्ज है यानी 2.26 ट्रिलियन डॉलर की बचत है। कहां जा रहा है कि टैरिफ लगाने से अमेरिका में महंगाई बढ़ेगी रोजगार व विकास दर घटेगी शेयर बाजार में मंडी का असर आएगा और डॉलर गिरेगा यह प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है।

क्या कदम उठाने चाहिए भारत को —

भारत को दिन प्रतिदिन बदल रही परिस्थितियों को देखते हुए सोच समझकर कदम उठाने होंगे। इस ट्रेड वॉर में अभी कई मोड़ आएंगे। एट जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। और धैर्य रखना चाहिए किंतु सचेत सजग और तैयार रहना चाहिए। भारत के लिए आने वाले अवसरों को खोजा जाना चाहिए। इसके लिए कई कार्य योजनाओं पर अमल किया जा सकता है जैसे —

–अमेरिका के साथ चल रहे द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बी टी ए ) पर तेजी से किंतु मजबूती के साथ आगे बढ़ा जाए, जो वस्तुओं तक ही सीमित रखा जाए जहां टेरेस सीधा समान स्तर पर अमेरिकी माल से इस स्प्रेधा करता है। शिव पेटेंट आईटी कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा तथा पिछड़े क्षेत्रीय विकास कार्यक्रमों को ईस्वीपक्षीय समझौते के दायरे से बाहर रखकर भारत के व्यापक हितों की रक्षा की जानी चाहिए।

जब अधिक तारीफ वाले देशों से उत्पादन भारत आने लगे तब एनएचसी निवेश के लिए व्यापक पॉलिसी सुधार आवश्यक होंगे जो विदेशी निवेश को आकर्षित करेंगे। मेक इन इंडिया को मजबूती देने के लिए सस्ता कच्चा माल उपलब्ध कराना वैल्यू चेक को मेक इन इंडिया के अनुकूल बनाना भी आवश्यक है। इसके लिए नियामक आयोग प्रस्तावित है। चीन जैसे देश जिन पर भारी तेरे फेवी अपना अतिरिक्त माल भारत में डंप कर सकते हैं। आते भारत को इस पर और 20 सतर्क रहकर ड्यूटी लगाने के लिए तैयार रहना होगा। भारत को आर्थिक रोजगार और औद्योगिक कानून को कानून को सुगम बनाकर औद्योगिक और व्यापार व्यवस्था मैं तत्काल सुधार की ओर बढ़ना होगा बड़े हुए टैरिफ के प्रभाव प्रक्रियाओं सुधारो और उठाए जाने वाले कदमों और प्रस्तावित करने तथा उन्हें त्वरित गति से लागू करने के लिए एक विशेषागों की टास्क फोर्स बनानी भी जरूरी है जो लघु व दीर्घकालिक योजना पर कार्य करें।

इस चित्र का आल्ट गुण खाली है; इसका फ़ाइल नाम IMG_20230908_134557-768x1024.jpg है

फोटो – kedar lal ( सिंह साब ) चीफ एडिटर “आर्थिक फंडा. कॉम “। arthikfunda.com

लेखक के बारे में–

मेरा नाम केदार लाल है, मुझे प्यार से सिंह साहब और K. S. Ligree के नाम सभी जाना जाता है। मैं राजस्थान राज्य के करौली जिले के अंतर्गत एक छोटे से गांव टुड़ावाली का रहने वाला हूं। मैंने राजस्थान विश्वविद्यालय और वर्धमान महावीर विश्वविद्यालय से बीए, एमए, बीएड, MBA, BJMC ( पत्रकारिता ) की शिक्षा प्राप्त की है। मैंने कई अखबारों तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्य किया है। मैंने कई वर्षों तक शिक्षक के तौर पर भी कार्य किया है। मैं कई वर्षों से ब्लॉगर और वर्ड प्रेस पर अपने आर्टिकल लिखता हूं। मुझे लिखने का बहुत शौक है।

मुझे घूमना, समाचार सुनना,अखबार पढ़ना,पत्रिकाएं पढ़ना, समाचार देखना, डिबेट कार्यक्रम देखना, अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के बारे में जानकारियां प्राप्त करना, विश्व के करंट मुद्दों के बारे में पढ़ना, लॉन्ग ड्राइव पर जाना और पर्वतीय क्षेत्रों में घूमना बहुत पसंद है।

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ट्रंप का टैरिफ वार — अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मुद्दे।×ट्रंप का टैरिफ वार×बहुत महंगा पढ़ने वाला है दुनियाँ को ट्रम्प का ट्रेड वार×अर्थव्यवस्था में होने वाले परिवर्तनों कि जानकारी×घरेलु बचत×इन्वेस्टमेंट×निवेश×फाइनेंस×इन्सुरेंस×लोन×बजट×शेयर मार्केट×विश्व अर्थव्यवस्था×आर्थिक विकाश कि जानकारी देने वाले बेहतरीन यूनिक और मौलिक आर्टिकलדपोस्ट संपादित करे”संपादित करें

सिंह साब

Kedar Lal

मेरा नाम केदार लाल है ( K. L. Ligree)। मैं भारत देश के अंतर्गत राजस्थान राज्य के करौली जिले के टुड़ावली गांव का रहने वाला हूँ। मैंने राजस्थान विश्वविधालय एवं वर्धमान महावीर विश्वविद्यालय कोटा से बीए, एमए, बीएड, एमबीए एवं बीजेएमसी (पत्रकारिता ) कि शिक्षा प्राप्त कि है। कुछ वर्षों तक मैं राजस्थान एवं देश की प्रतिष्ठित समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका एवं दैनिक भास्कर में विपणन ( Marketing ) कार्य भी किया एमबीए के बाद मैंने गोदरेज, टाटा AIG, आइडिया एवं वोडाफोन जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्य किया है। मैं करौली जिले के कई विद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में काफी समय तक शिक्षण कार्य से जुड़ा रहा हूं। रुचियाँ — मुझे समाचार पत्र पढ़ने, न्यूज़ देखने, डिबेट देखने, घूमने का शोक है। मुझे पारिवारिक और मनोरंजक फिल्में देखने का भी काफी शौक है। मुझे घूमना और लॉन्ग ड्राइव पर जाना अच्छा लगता है। मैं पर्वतीय क्षेत्र में घूमने का शौकीन हूँ। मुझे पढ़ने और अपने ब्लॉग के लिए आर्टिकल लिखने का भी काफी शौक है। मेरे दो ब्लॉग है जिनके लिए मैं आर्टिकल लिखता हूं और मैं फुल टाइम कंटेंट क्रिएटर हूं। ब्लॉग — 1. प्रेरणा डायरी ( ब्लॉग ) prernadayari.com (blogger ) 2. आर्थिक फंडा (ब्लॉग ) arthikfunda.com ( wordpress ) मैं बचपन से ही लेखक, पत्रकार, और एक अच्छा शिक्षक बनना चाहता था।

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1 टिप्पणी

  1. द्वारा Kedar Lalपोस्ट किया गया 05/06/2025प्रतिक्रियामैं अपने सभी पाठकों से अनुरोध करता हूं कि इस पोस्ट के बारे में अपनी प्रतिक्रिया जरुर व्यक्त करें। अगर कोई कमी दिखाई देती है तो हमें सुझाव दें। हम अपने ब्लॉग को यूनिक बनाने के लिए आपके सुझावों को प्राथमिकता देंगे।

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